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  • NAMO BHARAT RAPID RAIL : मधुबनी और पटना के बीच चलेगी नमो भारत रैपिड रेल, 24 को माननीय प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन

    NAMO BHARAT RAPID RAIL : मधुबनी और पटना के बीच चलेगी नमो भारत रैपिड रेल, 24 को माननीय प्रधानमंत्री करेंगे उद्घाटन

    दरभंगा: मधुबनी से दरभंगा, समस्तीपुर के राते पटना के बीच नई नमो भारत रैपिड रेल को माननीय प्रधानमंत्री 24 अप्रैल को हरि झंडी दिखा सकते है। जिसको लेकर तैयारी शुरू हो गई है। जारी अधिसूचना के मुताबिक मधुबनी रेलवे स्टेशन पर रनिंग स्टाफ को ट्रेनिंग देने की बात कही गई है।

    क्या है नमो भारत पैपिड रेल

    नमो भारत रैपिड रेल देश की पहली हाई-स्पीड ट्रेन है। नमो भारत रैपिड रेल की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो इसे मेट्रो और अन्य स्थानीय ट्रेनों से कहीं अधिक तेज बनाती है। ट्रेन में छह कोच हैं, जिनमें चार स्टैंडर्ड कोच, एक महिला आरक्षित कोच और एक प्रीमियम कोच शामिल हैं। प्रत्येक ट्रेन में 407 सीटें और 1,061 यात्रियों के लिए खड़े होने की जगह है।

    कहां चल रही रैपिड रेल

    वर्तमान में, नमो भारत ट्रेन साहिबाबाद से मेरठ साउथ तक 42 किलोमीटर के खंड में संचालित हो रही है। और न्यू अशोक नगर तक विस्तार के बाद इसकी कुल लंबाई 54 किलोमीटर हो गई है। न्यू अशोक नगर से मेरठ साउथ तक का सफर अब केवल 40 मिनट में पूरा हो रहा है। एनसीआरटीसी ने न्यू अशोक नगर और सराय काले खां स्टेशन के बीच ट्रायल रन भी शुरू कर दिया है, जो जल्द ही परिचालन में शामिल होगा।

    प्रमुख विशेषताएं व आधुनिक सुविधाएं

    ट्रेन में वाई-फाई, प्रत्येक सीट के लिए चार्जिंग पॉइंट, डायनामिक रूट मैप डिस्प्ले, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, और व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष स्थान उपलब्ध हैं। आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को ड्राइवर से सीधे संपर्क करने के लिए इंटरकॉम की सुविधा भी है।
    नमो भारत रैपिड रेल न केवल परिवहन का एक साधन है, बल्कि यह भारत के आधुनिक बुनियादी ढांचे और आत्मनिर्भर भारत के विजन का प्रतीक भी है। यह परियोजना निश्चित रूप से देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

  • 47 वर्षों का लंबा इंतज़ार खत्म! 1979 से मान्यता की आस लगाए संस्कृत विद्यालय पर पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश

    47 वर्षों का लंबा इंतज़ार खत्म! 1979 से मान्यता की आस लगाए संस्कृत विद्यालय पर पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश

    पटना: पटना उच्च न्यायालय ने मधुबनी जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र बाबूबरही स्थित ‘झोटन अनंत संस्कृत उच्च विद्यालय, नवानगर’ को मान्यता और संबद्धीकरण देने के मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकल पीठ ने विद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव के समक्ष नया आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने बोर्ड प्रशासन को आदेश दिया है कि वह मधुबनी के जिलाधिकारी (DM) से वैधानिक रिपोर्ट प्राप्त कर तीन महीने के भीतर नियमानुसार मान्यता की प्रक्रिया पूरी करे।

    1979 से जारी संघर्ष: लालफीताशाही और प्रशासनिक उपेक्षा का दंश

    अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए विद्वान अधिवक्ता ब्रजेश वर्मा ने पीठ को अवगत कराया कि यह संस्थान वर्ष 1979 से ही लगातार राज्य सरकार और बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड से संबद्धीकरण पाने की प्रतीक्षा कर रहा है। वर्ष 1979 में संस्थापक डॉ. राधाकांत मिश्र ने क्षेत्र में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से इस विद्यालय की स्थापना की थी। इसके लिए उन्होंने अपनी 1 बीघा 19 कट्ठा निजी जमीन विद्यालय को दान में दी, जिस पर पक्का भवन निर्मित है और विद्यालय सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। परंतु, बीते 47 वर्षों से मान्यता न मिलने के कारण यहाँ कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों और अध्ययनरत छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है तथा संस्थान गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक संकट से जूझ रहा है।

    कागज़ों में सिमटी प्रक्रिया: भौतिक निरीक्षण के बाद भी अटकी रही फाइल

    सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा मान्यता प्राप्त करने के लिए वर्ष 2014 से पूर्व से ही लगातार प्रयास किए जाते रहे थे। अंततः सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ वर्ष 2014 में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), मधुबनी के समक्ष औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके बाद, सर्व शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने भौतिक निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी थी कि विद्यालय मान्यता की सभी शर्तों को पूरा करता है। इस रिपोर्ट के आधार पर माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष निदेशक ने 1 अप्रैल 2016 को पत्र संख्या 349 के जरिए संस्कृत शिक्षा बोर्ड को नियमानुसार मान्यता की कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और बोर्ड की सुस्ती के कारण मामला वर्षों तक फाइलों में दबा रहा।

    हाईकोर्ट का कड़ा रुख: 3 महीने के भीतर फैसला लेने की तय की समय-सीमा

    राज्य सरकार और बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि ‘बिहार गैर-सरकारी संस्कृत विद्यालय (मान्यता की शर्तें) नियमावली, 1993’ के नियम 5 के तहत जिलाधिकारी की अनुशंसा या आधिकारिक रिपोर्ट अनिवार्य होती है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि नियमावली के तहत डीएम की रिपोर्ट जरूरी है। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता 4 सप्ताह के भीतर बोर्ड के सचिव के समक्ष नया आवेदन जमा करेंगे। आवेदन मिलते ही बोर्ड के सचिव अविलंब जिलाधिकारी (मधुबनी) से रिपोर्ट तलब करेंगे और रिपोर्ट प्राप्त होने के 3 महीने के भीतर कानून एवं लागू नियमों के अनुसार मान्यता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। उच्च न्यायालय के इस कड़े आदेश से बीते 47 सालों से हक की लड़ाई लड़ रहे विद्यालय परिवार, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों में उम्मीद की नई किरण जगी है।

  • झंझारपुर को मिली बड़ी सौगात: केंद्रीय विद्यालय का हुआ भव्य शुभारंभ! 🎓✨

    झंझारपुर को मिली बड़ी सौगात: केंद्रीय विद्यालय का हुआ भव्य शुभारंभ! 🎓✨

    झंझारपुर को मिली बड़ी सौगात: केंद्रीय विद्यालय का हुआ भव्य शुभारंभ! 🎓✨

    ​झंझारपुर वासियों का लंबा इंतजार आज आखिरकार खत्म हो गया! सोमवार को झंझारपुर में केंद्रीय विद्यालय का विधिवत शुभारंभ हुआ।

    ​इस अवसर की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि एक नन्हीं बच्ची के हाथों फीता कटवाकर स्कूल का उद्घाटन कराया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी आनंद शर्मा, जिला शिक्षा पदाधिकारी अक्षय कुमार पांडे और अनुमंडल पदाधिकारी टोनी कुमारी मौजूद रहे।

    झंझारपुर और पूरे मधुबनी जिले के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है!

  • झंझारपुर को मिली बड़ी सौगात: केंद्रीय विद्यालय का हुआ भव्य शुभारंभ! 🎓✨

    झंझारपुर को मिली बड़ी सौगात: केंद्रीय विद्यालय का हुआ भव्य शुभारंभ! 🎓✨

    झंझारपुर को मिली बड़ी सौगात: केंद्रीय विद्यालय का हुआ भव्य शुभारंभ! 🎓✨

    ​झंझारपुर वासियों का लंबा इंतजार आज आखिरकार खत्म हो गया! सोमवार को झंझारपुर में केंद्रीय विद्यालय का विधिवत शुभारंभ हुआ।

    ​इस अवसर की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि एक नन्हीं बच्ची के हाथों फीता कटवाकर स्कूल का उद्घाटन कराया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी आनंद शर्मा, जिला शिक्षा पदाधिकारी अक्षय कुमार पांडे और अनुमंडल पदाधिकारी टोनी कुमारी मौजूद रहे।

    झंझारपुर और पूरे मधुबनी जिले के उज्ज्वल भविष्य के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है!

  • झंझारपुर में लघु खादी मॉल का निर्माण काफी गति से चल रहा है

    झंझारपुर में लघु खादी मॉल का निर्माण काफी गति से चल रहा है

    झंझारपुर में लघु खादी मॉल का निर्माण काफी गति से चल रहा है

    बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर में ‘लघु खादी मॉल’ (Mini Khadi Mall) का निर्माण कराया जा रहा है। यह बिहार सरकार के उद्योग विभाग और अवसंरचना विकास प्राधिकरण (IDA) की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य स्थानीय खादी और हस्तशिल्प उद्योगों को बढ़ावा देना है।

    ​मुख्य बिंदु और विशेषताएं:
    ​उद्देश्य: स्थानीय बुनकरों, कारीगरों और हस्तशिल्पकारों को अपने उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शन के लिए एक आधुनिक और बड़ा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना।

    ​स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा: इस मॉल में खादी के कपड़ों के साथ-साथ मिथिला पेंटिंग (माधुबनी आर्ट), हस्तशिल्प, ग्रामोद्योग उत्पाद और स्थानीय पारंपरिक वस्तुएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएंगी।

    ​रोजगार के अवसर: खादी मॉल के शुरू होने से झंझारपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के कारीगरों और युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

    ​बाजार से जुड़ाव: यह मॉल मिथिला क्षेत्र के खादी और हस्तशिल्प को बड़े बाजारों से जोड़ने में मदद करेगा, जिससे कारीगरों को उनके हुनर का सही मूल्य मिल सकेगा।

  • झंझारपुर-लौकहा बाजार रेलखंड पर ट्रेन में चला सघन टिकट चेकिंग अभियान, यात्रियों में दिखा अनुशासन

    झंझारपुर-लौकहा बाजार रेलखंड पर ट्रेन में चला सघन टिकट चेकिंग अभियान, यात्रियों में दिखा अनुशासन

    स्टार मिथिला न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट | झंझारपुर (मधुबनी): भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ रेल राजस्व को मजबूत करने के लिए लगातार कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर बिहार के बहुप्रतीक्षित झंझारपुर-लौकहा बाजार रेलखंड पर रेलवे प्रशासन और आरपीएफ (RPF) की संयुक्त टीम द्वारा एक विशेष और सघन टिकट चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों में बिना टिकट यात्रा करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाना और यात्रियों के बीच यात्रा नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, जिसकी स्थानीय लोगों और नियमित यात्रियों ने भी जमकर सराहना की है।

    मिली जानकारी के मुताबिक, यह औचक चेकिंग अभियान इस रूट पर नियमित रूप से संचालित होने वाली लोकप्रिय ट्रेन संख्या 55501/55502 में चलाया गया। जैसे ही चेकिंग दल ने ट्रेन के डिब्बों में प्रवेश किया, बिना टिकट सफर करने वालों और नियमों को ताक पर रखकर यात्रा करने वालों में हड़कंप मच गया। चेकिंग टीम ने ट्रेन के भीतर हर एक कोच में जाकर यात्रियों के टिकट और उनके सामान की बेहद बारीकी से जांच-पड़ताल की।

    मुख्य बिंदु: इस औचक और सख्त कार्रवाई से जहां एक ओर बेटिकट यात्रियों पर नकेल कसी गई है, वहीं दूसरी ओर अनुशासित यात्रियों को सफर के दौरान भारी भीड़ और असुविधा से राहत मिली है। रेलवे का यह सकारात्मक कदम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    कार्रवाई के मुख्य आंकड़े एक नजर में:

    • बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्री: 11
    • बिना बुक किए सामान (लगेज) ले जाने वाले: 14
    • कुल वसूल किया गया जुर्माना: ₹7,010/- (कुल 25 मामले)

    सघन चेकिंग अभियान के दौरान टीम ने नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल 25 मामलों को पकड़ा। इसमें बिना टिकट यात्रा कर रहे 11 यात्रियों से और बिना वैध बुकिंग के भारी सामान ले जा रहे 14 मामलों में नियमानुसार जुर्माना वसूल किया गया। इस पूरी कार्रवाई के तहत रेलवे खजाने में कुल ₹7,010 की राशि बतौर जुर्माना जमा कराई गई।

    रेलवे अधिकारियों ने इस अभियान के समापन पर यात्रियों से अपील करते हुए कहा कि वे हमेशा उचित टिकट खरीदकर ही यात्रा करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस तरह के औचक अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे, जिससे रेल राजस्व में सुधार होगा और सभी यात्रियों को एक सुरक्षित, सुगम व आरामदायक यात्रा का अनुभव मिल सकेगा।

  • झंझारपुर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की सूझबूझ से मिली बड़ी सफलता: बिहरा थाने की गुमशुदा 12 वर्षीय बच्ची सोनाली कुमारी सुरक्षित परिजनों को सौंपी गई।

    झंझारपुर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की सूझबूझ से मिली बड़ी सफलता: बिहरा थाने की गुमशुदा 12 वर्षीय बच्ची सोनाली कुमारी सुरक्षित परिजनों को सौंपी गई।

    बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर रेलवे स्टेशन पर मानवीय संवेदना और सतर्कता का एक बेहतरीन मामला सामने आया है। दिनांक 04 अगस्त 2026 को झंझारपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 2-3 पर गश्त के दौरान आरक्षी विद्यानंद ठाकुर की नजर एक डरी-सहमी और अकेली बैठी बच्ची पर पड़ी। काफी देर से बच्ची को अकेले देखकर उन्होंने स्थानीय एक महिला की मदद से उससे पूछताछ की।

    पूछताछ के दौरान बच्ची ने अपना नाम सोनाली कुमारी बताया और अपने घर का मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया। इसके बाद उस नंबर पर संपर्क करके उसके परिजनों को इस बात की सूचना दी गई। स्थानीय महिला के सहयोग से बच्ची को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ओपी झंझारपुर लाया गया, जहां उसे सुरक्षित रूप से रखा गया।

    सूचना मिलने के बाद बच्ची के पिता पिंटू राय स्थानीय थाना बिहरा (सहरसा) के पुलिस बल के साथ झंझारपुर ओपी पहुंचे। थाने में हुई विधिवत पूछताछ में बच्ची की पहचान सोनाली कुमारी (उम्र लगभग 12 वर्ष), पिता पिंटू राय, साकिन बिहरा, वार्ड संख्या 6, थाना बिहरा, जिला सहरसा के रूप में हुई।

    जांच में पता चला कि इस संबंध में स्थानीय थाना बिहरा में पहले ही कांड संख्या 267/26 के तहत दिनांक 03.08.2026 को गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी। मौके पर उचित सत्यापन के बाद, स्थानीय थाना बिहरा के पुलिस अवर निरीक्षक राजकमल द्वारा एक लिखित आवेदन दिया गया, जिसके आधार पर सुरक्षित मिली बालिका को सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। समस्त कानूनी और विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस अवर निरीक्षक राजकमल, महिला अधिकारी और परिजनों के साथ अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए सुरक्षित वापस लौट गए।

  • बिहार में निबंधन प्रक्रिया हुई और आसान: दूसरे चरण में 40 कार्यालयों में पेपरलेस व्यवस्था शुरू, जनता को मिलेगी राहत

    बिहार में निबंधन प्रक्रिया हुई और आसान: दूसरे चरण में 40 कार्यालयों में पेपरलेस व्यवस्था शुरू, जनता को मिलेगी राहत

    बिहार सरकार ने राज्य की निबंधन व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा जनहित को ध्यान में रखते हुए ‘बिहार निबंधन नियमावली, 2026’ को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इसी कड़ी में विभागीय अधिसूचना और हालिया आदेशों के आलोक में निबंधन प्रक्रिया को पेपरलेस बनाने के दूसरे चरण का शुभारंभ कर दिया गया है, जिससे आम जनता को कागजी औपचारिकताओं की जटिलताओं से मुक्ति मिलेगी।

    विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, द्वितीय चरण के तहत राज्यभर के कुल 40 जिला और अवर निबंधन कार्यालयों में पेपरलेस दस्तावेजों के निबंधन का कार्य दिनांक 03 अगस्त 2026 से अनिवार्य रूप से शुरू हो चुका है। इस व्यवस्था के लागू होने से भूमि, संपत्ति और अन्य दस्तावेजों के पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद तेज और सुगम हो गई है।

    पेपरलेस निबंधन के दायरे में आने वाले प्रमुख जिला निबंधन कार्यालयों में अरवल, किशनगंज, मधेपुरा, मुंगेर, औरंगाबाद, पश्चिमी चम्पारण (बेतिया), सारण (छपरा), रोहतास, मधुबनी, सहरसा, बक्सर, भागलपुर, कैमूर, शेखपुरा, शिवहर, पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी), नालंदा और लखीसराय शामिल हैं। इसके साथ ही अवर निबंधन कार्यालयों जैसे जोकीहाट, नीमचकबथानी, उदाकिशुनगंज, हवेली खड़गपुर, अमरपुर, चनपटिया, बखरी, परसा, खजौली, डुमरांव, बिहपुर, मोहनियाँ, हिलसा, धमदाहा, किशनपुर, मनिहारी, दरौली, महनार, भुतही, शेरघाटी, रजौली और त्रिवेणीगंज में भी यह डिजिटल सेवा सुचारू रूप से प्रभावी कर दी गई है।

    सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय से न केवल नागरिकों के समय की बचत होगी, बल्कि कार्यालयों में लगने वाली लंबी कतारों और कागजी झंझटों से भी राहत मिलेगी। डिजिटल माध्यम से दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित रहने के कारण लोगों को भविष्य में रिकॉर्ड प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार का यह कदम डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

  • झंझारपुर केंद्रीय विद्यालय में सत्र 2026-27 के लिए दाखिला प्रक्रिया शुरू: जानिए बालवाटिका से पांचवीं तक के रजिस्ट्रेशन की पूरी जानकारी

    झंझारपुर केंद्रीय विद्यालय में सत्र 2026-27 के लिए दाखिला प्रक्रिया शुरू: जानिए बालवाटिका से पांचवीं तक के रजिस्ट्रेशन की पूरी जानकारी

    प्रवेश प्रक्रिया और कक्षाओं का विवरण

    बिहार के झंझारपुर में स्थित नव सृजित केंद्रीय विद्यालय (+2 केजरीवाल हाई स्कूल, झंझारपुर, मधुबनी) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न कक्षाओं में नामांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विद्यालय प्रशासन द्वारा जारी सूचना के अनुसार, बालवाटिका I, II, III और कक्षा I से लेकर कक्षा V तक (प्रत्येक कक्षा में 01 सेक्शन) के लिए ऑफलाइन पंजीकरण फॉर्म जारी किए गए हैं। अभिभावक हमारी वेबसाइट से एडमिशन फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं या निर्धारित तिथियों के भीतर विद्यालय कार्यालय से संपर्क करके फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं।

    पंजीकरण की तिथियां और फॉर्म प्राप्ति के माध्यम

    पंजीयन फॉर्म प्राप्त करने तथा इसे सभी आवश्यक दस्तावेजों व प्रमाण-पत्रों के साथ पूर्णरूप से भरकर जमा करने की तिथि 05 अगस्त 2026 (बुधवार) से 14 अगस्त 2026 (शुक्रवार) तक निर्धारित की गई है। अभिभावक प्रत्येक कार्यदिवस में प्रातः 10:00 बजे से अपराह्न 04:00 बजे तक विद्यालय कार्यालय में जाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा, सुविधा के लिए आप हमारी वेबसाइट से भी एडमिशन फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं, साथ ही यह केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, दरभंगा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगा।

    आयु सीमा और आरक्षण के नियम

    प्रवेश के लिए छात्रों की आयु की गणना 31 मार्च 2026 के आधार पर की जाएगी। बालवाटिका I के लिए न्यूनतम आयु 3 वर्ष और अधिकतम 4 वर्ष से कम होनी चाहिए। इसी प्रकार बालवाटिका II के लिए आयु 4 से 5 वर्ष से कम, बालवाटिका III के लिए 5 से 6 वर्ष से कम, कक्षा I के लिए 6 से 8 वर्ष से कम, कक्षा II के लिए 7 से 9 वर्ष से कम, कक्षा III के लिए 8 से 10 वर्ष से कम, कक्षा IV के लिए 9 से 11 वर्ष से कम और कक्षा V के लिए 10 से 12 वर्ष से कम निर्धारित की गई है। कक्षाओं में सीटों का आरक्षण केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) के प्रवेश दिशानिर्देशों 2026-27 के अनुसार किया जाएगा। प्रवेश से जुड़ी विस्तृत जानकारी KVS की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी प्राप्त की जा सकती है।

    आवश्यक दस्तावेज और विशेष निर्देश

    आवेदन के समय जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, ब्लड ग्रुप रिपोर्ट, पासपोर्ट साइज फोटो और श्रेणी के अनुसार जाति, आय, बीपीएल या सेवा प्रमाण पत्र जैसे तमाम जरूरी दस्तावेज होना अनिवार्य हैं। विद्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि पंजीकरण मात्र से ही प्रवेश का अधिकार प्राप्त नहीं होगा, और फॉर्म में किसी भी प्रकार की गलत या भ्रामक जानकारी पाए जाने पर प्रवेश प्रक्रिया के दौरान आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा।

  • दरभंगा में स्थापित होगा आधुनिक डेयरी प्लांट : मिथिलांचल में बढ़ेगा दूध-दही का उत्पादन, पशुपालकों की आय में होगा इजाफा

    दरभंगा में स्थापित होगा आधुनिक डेयरी प्लांट : मिथिलांचल में बढ़ेगा दूध-दही का उत्पादन, पशुपालकों की आय में होगा इजाफा

    दरभंगा। मिथिलांचल के प्रमुख केंद्र दरभंगा में जल्द ही दूध और दही का एक बड़ा आधुनिक प्रसंस्करण केंद्र (मॉडर्न डेयरी प्लांट) स्थापित होने जा रहा है। इस संयंत्र के निर्माण से न केवल दरभंगा, बल्कि आसपास के मधुबनी, समस्तीपुर और बेगुसराय जिलों के पशुपालकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। आधुनिक तकनीकों से लैस यह डेयरी प्लांट स्थानीय स्तर पर दूध की खपत और प्रसंस्करण क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा, जिससे किसानों और पशुपालकों की कमाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

    आधुनिक सुविधाओं और उच्च तकनीक से लैस होगा प्लांट

    प्रस्तावित डेयरी प्लांट में दूध के संग्रहण, चिलिंग, पाश्चुरीकरण (Pasteurization) और पैकेट बंद दही, लस्सी, मक्खन, पनीर व घी तैयार करने की अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। मिथिलांचल की खान-पान परंपरा में ‘दही-चूड़ा’ का विशेष महत्व है, ऐसे में गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादों की मांग को पूरा करने में यह प्लांट मील का पत्थर साबित होगा।

    किसान और पशुपालकों के लिए प्रमुख फायदे

    • उचित मूल्य और पारदर्शी व्यवस्था: गांव-गांव में दूध संग्रहण केंद्र बनने से पशुपालकों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और दूध की सही कीमत सीधे उनके बैंक खातों में मिलेगी।
    • स्वरोजगार और रोजगार सृजन: डेयरी प्लांट के संचालन, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंँग और वितरण नेटवर्क के माध्यम से सैकड़ों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
    • पशुधन विकास को बढ़ावा: किसानों को उन्नत नस्ल के पशुपालन और वैज्ञानिक तरीके से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
    • ताजा एवं शुद्ध उत्पादों की आपूर्ति: दरभंगा और आसपास के शहरी व ग्रामीण इलाकों में शुद्ध दूध और दही की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

    मिथिलांचल के ग्रामीण अर्थशास्त्र को मिलेगी मजबूती

    माछ और मखाना के क्षेत्र में पहले से ही प्रसिद्ध मिथिलांचल अब दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। दरभंगा में आधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना से क्षेत्र के ग्रामीण अर्थशास्त्र को संबल मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को नई गति प्राप्त होगी।