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  • खगड़िया-कुशेश्वरस्थान रेल परियोजना: अलौली से चेरा खेड़ा नई लाइन के लिए 211 करोड़ का टेंडर जारी, मिथिला और कोसी को बड़ा तोहफा

    खगड़िया-कुशेश्वरस्थान रेल परियोजना: अलौली से चेरा खेड़ा नई लाइन के लिए 211 करोड़ का टेंडर जारी, मिथिला और कोसी को बड़ा तोहफा

    खगड़िया / समस्तीपुर: मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र को आपस में जोड़ने वाली रेलवे की महत्वाकांक्षी खगड़िया-कुशेश्वरस्थान नई रेल लाइन परियोजना को लेकर एक बेहद बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। इस परियोजना के अंतर्गत अलौली से चेरा खेड़ा के बीच नई ब्रॉड-गेज (बड़ी) रेल लाइन के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। पूर्व मध्य रेलवे (East Central Railway) के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण)/उत्तर द्वारा इसके लिए ₹211.35 करोड़ का आधिकारिक ई-टेंडर जारी कर दिया गया है

    इस टेंडर के जारी होने से स्थानीय लोगों में काफी उत्साह है, क्योंकि यह पैच इस पूरे रेल नेटवर्क को आपस में जोड़ने के लिए रीढ़ की हड्डी माना जा रहा है

    टेंडर और प्रोजेक्ट से जुड़ी मुख्य बातें (Key Highlights)

    प्रोजेक्ट से जुड़े मुख्य प्रशासनिक और तकनीकी आंकड़े इस प्रकार हैं:

    • परियोजना का नाम: खगड़िया – कुशेश्वरस्थान नई रेल लाइन परियोजना (समस्तीपुर डिवीजन)।
    • कार्य का विवरण: अलौली (19+569.260 KM) से चेरा खेड़ा (24+090.000 KM) के बीच 4.521 किलोमीटर नई रेल लाइन और चेरा खेड़ा यार्ड का निर्माण।
    • टेंडर नंबर: ECR-CAO-C-N-EPC-39-25-26।
    • कुल अनुमानित लागत: ₹2,11,35,57,635.59 (लगभग 211.35 करोड़ रुपये)।
    • काम पूरा करने की समय सीमा: टेंडर अलॉट होने के बाद एजेंसी को 720 दिनों (लगभग 2 वर्ष) के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा।
    • टेंडर भरने की आखिरी तारीख: 24 जुलाई 2026 (दोपहर 14:30 बजे तक)।

    EPC मोड पर होगा काम: डिजाइन से लेकर निर्माण तक की जिम्मेदारी

    यह टेंडर इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड के तहत जारी किया गया है। इसका मतलब यह है कि जिस भी निर्माण कंपनी को यह ठेका मिलेगा, उसी के ऊपर इस रूट की पूरी डिजाइनिंग, सामग्री की खरीद और निर्माण की जिम्मेदारी होगी

    इस रूट पर क्या-क्या निर्माण कार्य किए जाएंगे?

    1. भारी अर्थवर्क और कंक्रीट कार्य: रूट पर पड़ने वाले पुलों की नींव, रिटेनिंग वॉल और एप्रोच स्लैब के लिए बड़े पैमाने पर मिट्टी की खुदाई, भराई और कंक्रीटिंग का काम होगा।
    2. कुआं नींव (Well Foundation) तकनीक: जलभराव और नदी वाले क्षेत्रों को देखते हुए पुलों के खंभों (Piers) के लिए करीब 30 मीटर की गहराई तक कुआं धंसाने (Sinking of Wells) की आधुनिक तकनीक अपनाई जाएगी।
    3. यार्ड और विद्युतीकरण: चेरा खेड़ा में एक नया और आधुनिक रेल यार्ड विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में होने वाले रेल विद्युतीकरण (Electrification) को ध्यान में रखते हुए OHE पोल के लिए मजबूत फाउंडेशन पहले ही तैयार कर लिया जाएगा।

    इलाके के आर्थिक और सामाजिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार

    खगड़िया से कुशेश्वरस्थान रेल लाइन इस पूरे पिछड़े और बाढ़ प्रभावित इलाके के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। अलौली से चेरा खेड़ा के बीच का यह साढ़े चार किलोमीटर का हिस्सा जैसे ही बनकर तैयार होगा, कोसी और मिथिलांचल के बीच रेल संपर्क और मजबूत हो जाएगा

    इससे न केवल स्थानीय यात्रियों का सफर आसान और सस्ता होगा, बल्कि छोटे व्यापारियों और किसानों को भी अपनी फसल और उत्पाद समस्तीपुर व खगड़िया के मुख्य बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

  • खगड़िया-कुशेश्वरस्थान रेल परियोजना को मिली रफ़्तार: 2028 तक पूरा होगा 1384 करोड़ का नया रेल मार्ग

    खगड़िया-कुशेश्वरस्थान रेल परियोजना को मिली रफ़्तार: 2028 तक पूरा होगा 1384 करोड़ का नया रेल मार्ग

    पटना/खगड़िया: बिहार के रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, रेलवे बोर्ड ने खगड़िया-कुशेश्वरस्थान रेल परियोजना के लिए संशोधित बजट और समय सीमा को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत अलौली से कुशेश्वरस्थान के बीच नई रेल लाइन और पुलों के निर्माण पर 1384.16 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेलवे ने इस चुनौतीपूर्ण परियोजना को दिसंबर 2028 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

    संशोधित रेल मार्ग और पुलों का जाल: तकनीकी सुधारों के बाद अब इस रेल खंड की कुल लंबाई 40.953 किलोमीटर तय की गई है। इस दुर्गम इलाके में रेल दौड़ाने के लिए रेलवे को भारी निर्माण कार्य करना होगा, जिसमें 14 बड़े पुल, 13 छोटे पुल और 20 छोटी पुलिया शामिल हैं। निर्माण प्रक्रिया को गति देने के लिए अलौली से चेरा खेड़ा तक का अनुबंध (EPC Contract) 24 फरवरी 2026 को जारी कर दिया गया है, जबकि अगले हिस्से का टेंडर 20 मार्च 2026 तक जारी होने की उम्मीद है।

    बाढ़ और कटाव की चुनौतियों से निपटने की तैयारी: यह रेल मार्ग करेह, कोसी और कमला बलान जैसी बड़ी नदियों के तटबंधों के करीब से गुजरता है, जहाँ हर साल बाढ़ और मिट्टी के कटाव का खतरा रहता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 2018-19 की विनाशकारी बाढ़ के बाद एक विशेष जल वैज्ञानिक अध्ययन (Hydrological Study) कराया गया था। इसी अध्ययन के आधार पर अब पुलों और तटबंधों का ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है जो भविष्य में आने वाली किसी भी प्राकृतिक आपदा को झेलने में सक्षम होगा।

    भूमि अधिग्रहण और दशकों पुराना इतिहास: दशकों से लंबित इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 1996-97 में मात्र 78.21 करोड़ रुपये के अनुमान के साथ हुई थी, जो अब बढ़ते खर्च और विस्तार के कारण 1384 करोड़ तक पहुँच गई है। भूमि अधिग्रहण की बात करें तो कुल आवश्यक 301 हेक्टेयर जमीन में से 253 हेक्टेयर पर कब्जा मिल चुका है, जबकि शेष 48 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।

    बदलेगी मिथिलांचल और उत्तर बिहार की तस्वीर: समस्तीपुर मंडल के डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने इस भारी-भरकम बजट की पुष्टि करते हुए कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से खगड़िया और दरभंगा जिलों के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। इस नए रूट से न केवल लाखों यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि इलाके में माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।