News Area: नरपतगंज

Narpatganj

  • जिलाधिकारी ने सभी परीक्षा केंद्र के केंद्राधीक्षक को दिया आवश्यक दिशा निर्देश

    जिलाधिकारी ने सभी परीक्षा केंद्र के केंद्राधीक्षक को दिया आवश्यक दिशा निर्देश

    जिलाधिकारी द्वारा इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2026 कदाचारमुक्त एवं शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने हेतु दिए गए निर्देश

    बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा-2026 के सफल, शांतिपूर्ण एवं कदाचारमुक्त आयोजन को लेकर जिला पदाधिकारी अररिया श्री विनोद दूहन एवं पुलिस अधीक्षक अररिया श्री जितेन्द्र कुमार की संयुक्त में अध्यक्षता डीआरसीसी भवन अररिया में सभी केंद्राधीक्षक, स्टैटिक दंडाधिकारी, गश्तीदल दंडाधिकारी, उड़नदस्ता दल, अनुमंडल पदाधिकारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एवं परीक्षा से सम्बद्ध सभी पदाधिकारियों के साथ ब्रीफिंग बैठक आयोजित की गई।

    बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा जारी मार्गदर्षिका अनुरूप परीक्षा कदाचारमुक्त एवं शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराना सुनिष्चित किया जाय। उन्होंने कहा कि इंटरमीडिएट परीक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जायेगी। परीक्षा संचालन से जुड़े प्रत्येक पदाधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण जवाबदेही और सतर्कता के साथ करें। उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे, वीडियोग्राफी, प्रवेश द्वार पर कड़ी जांच तथा केंद्र के अंदर सतत पर्यवेक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    स्टेटिक दंडाधिकारी को निर्देश दिया गया कि परीक्षा केन्द्र पर केवल परीक्षार्थियों को ही परीक्षा केन्द्र के मुख्य द्वार पर उनके प्रवेश पत्र एवं एक फोटोयुक्त पहचान पत्र को दखेकर अन्दर जाने अनुमति देंगे। परीक्षा केन्द्र में प्रवेश कराने से पूर्व सभी परीक्षार्थियों का संघन फ्रिस्किंग सुनिश्चित की जायेगी। महिला परीक्षार्थियों की फ्रिस्किंग हेतु महिला वीक्षक की प्रतिनियिुक्त करने का निर्देश दिया गया है।

    बैठक में बताया गया इंटरमीडिएट परीक्षा अररिया जिला के कुल 44 परीक्षा केंद्रों पर दिनांक 02 फरवरी 2026 से प्रारंभ होकर 13 फरवरी 2026 तक दो पालियों में आयोजित होगी। जिसमें अररिया अनुमंडल में 23 एवं फारबिसगंज अनुमंडल में 21 परीक्षा केंद्र शामिल हैं। प्रथम पाली की परीक्षा 9ः30 पूर्वाह्न से 12ः45 अपराह्न तक तथा द्वितीय पाली की परीक्षा 2ः00 अपराह्न से 5ः15 अपराह्न तक निर्धारित है। परीक्षार्थियों को परीक्षा प्रारंभ होने से 30 मिनट पूर्व तक ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। विलंब से आने वाले परीक्षार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जायेगा। साथ ही परीक्षा केंद्र में जूता-मोजा पहनकर प्रवेश वर्जित किया गया है। परीक्षा केंद्रों के आसपास बी0एन0एस0एस0 की धारा 163 लागू रहेगी।

    इंटरमीडिएट परीक्षा अवधि के दौरान उद्योग भवन अररिया में दूरभाष संख्या 06453-222309 पर जिला नियंत्रण कक्ष कार्यरत रहेगा। इसके प्रभार में अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अररिया रहेंगे। वहीं परीक्षा के वरीय प्रभार में अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन, अररिया श्री नवनील कुमार रहेंगे। बैठक में संबंधित पदाधिकारी गण उपपस्थित थे

  • सहरसा फारबिसगंज रेलखंड पर सवारी गाड़ी की संख्या बढ़ाने की मांग हुई तेज

    सहरसा फारबिसगंज रेलखंड पर सवारी गाड़ी की संख्या बढ़ाने की मांग हुई तेज

    नरपतगंज (अररिया)।

    सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड पर पैसेंजर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग इन दिनों जोर पकड़ रही है। बिहार के लोकआस्था के महापर्व छठ के नजदीक आते ही इस रेलखंड पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। लेकिन सीमित ट्रेनों के कारण आम लोगों, खासकर छठ की खरीदारी के लिए बाजार जाने वाले यात्रियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नरपतगंज स्टेशन पर हर दिन सुबह से लेकर देर रात तक भीड़ उमड़ रही है, जिससे यात्रियों में नाराजगी देखी जा रही है।

     

     

    छठ पर्व के दौरान यात्रियों की बढ़ी संख्या

     

    छठ महापर्व बिहार का सबसे बड़ा और लोकआस्था से जुड़ा त्यौहार है। इस पर्व के लिए लोग सहरसा, सुपौल, अररिया और फारबिसगंज जैसे बड़े बाजारों से पूजा सामग्री की खरीदारी करते हैं। लेकिन सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड पर ट्रेनों की संख्या सीमित होने के कारण लोग समय पर अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

     

    नरपतगंज स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। ट्रेनें जब आती हैं तो डिब्बों में तिल रखने की भी जगह नहीं रहती। कई बार लोग छत पर चढ़कर या दरवाजे पर लटककर सफर करते हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर भी खतरा बढ़ गया है।

     

    नरपतगंज बाजार में खरीदारी करने पहुंचे अररिया निवासी रमेश तिवारी बताते हैं —

     

    > “छठ पूजा की तैयारी के लिए सहरसा जाना था, लेकिन ट्रेन इतनी भीड़भाड़ वाली थी कि तीन बार कोशिश करने के बाद भी जगह नहीं मिली। मजबूरन बस से जाना पड़ा, जो महंगी भी है और समय भी ज्यादा लगाती है।”

     

     

     

    स्कूल-कॉलेज के छात्रों को हो रही भारी दिक्कत

     

    इस रेलखंड से रोजाना हजारों छात्र-छात्राएं सफर करते हैं। सुपौल, सहरसा, अररिया और फारबिसगंज के कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए ट्रेन सबसे सस्ता और सुविधाजनक साधन है। लेकिन ट्रेनों की कमी से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

     

    नरपतगंज निवासी छात्रा रिया झा कहती हैं —

     

    > “सुबह की ट्रेन अगर छूट जाए तो फिर दोपहर तक कोई ट्रेन नहीं मिलती। कॉलेज में लेट पहुंचने के कारण कई बार उपस्थिति कम हो जाती है। अगर रेलवे एक-दो अतिरिक्त पैसेंजर ट्रेनें चलाए तो हमें बहुत राहत मिलेगी।”

     

     

     

    इसी तरह सुपौल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र अमन कुमार का कहना है —

     

    > “हम रोज सुबह ट्रेन से कॉलेज जाते हैं, लेकिन भीड़ इतनी होती है कि कई बार स्टेशन से ही वापस लौटना पड़ता है। त्योहार के समय तो हाल और भी खराब हो जाता है।”

     

     

     

    नरपतगंज स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ चरम पर

     

    नरपतगंज रेलवे स्टेशन पर इस समय जनसाधारण एक्सप्रेस के समय दृश्य किसी मेला स्थल जैसा है। टिकट काउंटर पर लंबी लाइनें, प्लेटफॉर्म पर बैठे यात्री और ट्रेन के आने का बेसब्री से इंतजार करते लोग — यह आम नजारा बन गया है।

     

     

    व्यापारियों और बाजारों पर भी असर

     

    सहरसा, सुपौल और फारबिसगंज के बाजारों में छठ पर्व के दौरान खरीदारों की भारी भीड़ रहती है। लेकिन ट्रेनों की कमी से ग्राहक कम पहुंच रहे हैं। इससे बाजारों में कारोबार प्रभावित हो रहा है।

     

    फारबिसगंज के व्यापारी मोहम्मद शमीम बताते हैं —

     

    > “पहले अररिया, नरपतगंज और सुपौल से लोग बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए आते थे। लेकिन अब ट्रेनें कम होने और भीड़ ज्यादा होने के कारण लोग आने से कतराते हैं। इससे व्यापार पर सीधा असर पड़ा है।”

     

     

    स्थानीय लोगों में बढ़ता असंतोष

     

    नरपतगंज और आसपास के गांवों के लोगों ने रेलवे प्रशासन से कई बार मांग की है कि इस रूट पर अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जाएं। त्योहारों के अलावा आम दिनों में भी लोगों को कामकाज, इलाज, पढ़ाई और खरीदारी के लिए बार-बार सफर करना पड़ता है। ऐसे में सिर्फ कुछ ट्रेनों पर निर्भर रहना मुश्किल हो गया है।

     

    नरपतगंज नगरपंचायत के वार्ड पार्षद सुरेश पासवान ने बताया,

     

    > “यह रेलखंड हमारे क्षेत्र के लिए जीवनरेखा है, लेकिन जब ट्रेनें ही कम चलेंगी तो इसका लाभ अधूरा रह जाएगा। हमारी मांग है कि कम से कम सुबह और शाम में दो नई पैसेंजर ट्रेनें चलाई जाएं ताकि लोग आसानी से यात्रा कर सकें।”

     

     

     

    महिलाओं और बुजुर्गों को भी मुश्किलें

     

    ट्रेनों की कमी का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और वृद्धजनों पर पड़ रहा है। भीड़भाड़ वाले कोच में उन्हें बैठने की जगह तक नहीं मिलती। कई बार उन्हें अपने बच्चों के साथ फर्श पर बैठकर सफर करना पड़ता है।

     

    नरपतगंज की गृहिणी काजल कुमारी कहती हैं —

     

    > “छठ की खरीदारी के लिए फारबिसगंज जाना था, लेकिन ट्रेन इतनी भरी थी कि हम चढ़ ही नहीं पाए। छोटी बच्ची को लेकर इतना लंबा सफर बस से करना बहुत मुश्किल होता है।”

     

     

    रेल प्रशासन का पक्ष

     

    पूर्व मध्य रेलवे के कटिहार मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे प्रशासन स्थिति पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

     

    > “छठ पर्व के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ विशेष ट्रेनें चलाने की योजना बन रही है। इसके अलावा नियमित पैसेंजर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है। हमारा लक्ष्य है कि त्योहारों के समय किसी यात्री को परेशानी न हो।”

     

     

     

     

    जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज़

     

     

    > “सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड के शुरू होने से क्षेत्र के विकास की नई राह खुली है। लेकिन ट्रेनों की कमी के कारण लोग अभी भी पूर्ण सुविधा नहीं पा रहे हैं। हम छठ पर्व से पहले रेलवे से अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की अपील करेंगे।”

     

     

    साथ ही, अररिया सांसद ने कहा कि वह इस मामले को संसद में उठाएंगे और इस रेलखंड को डबल लाइन व इलेक्ट्रिफिकेशन के साथ सुदृढ़ करने की मांग करेंगे।

     

     

    स्थानीय संगठनों का आंदोलन

     

    युवाओं और सामाजिक संगठनों ने भी ट्रेनों की कमी को लेकर आंदोलन शुरू किया है। नरपतगंज स्टेशन पर कुछ दिन पहले “रेल सेवा बढ़ाओ अभियान” के तहत सैकड़ों लोगों ने शांतिपूर्ण धरना दिया।

     

    युवा नेता प्रदीप कुमार सिंह ने कहा,

     

    > “जब से यह रेलखंड शुरू हुआ है, लोगों को उम्मीद थी कि यह जीवन आसान करेगा। लेकिन ट्रेनें इतनी सीमित हैं कि आम लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। हम चाहते हैं कि सुबह, दोपहर और शाम — तीनों समय ट्रेनों की सुविधा दी जाए।”

     

     

     

    नरपतगंज रेलवे स्टेशन से सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड की स्थिति साफ बताती है कि यात्रियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन रेल सेवाएं अभी भी अपर्याप्त हैं। छठ महापर्व जैसे अवसरों पर यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

     

    यात्रियों, छात्रों, व्यापारियों और किसानों — सभी वर्गों की आवाज एक है: “हमें और ट्रेनें चाहिए।”

    रेल प्रशासन और सरकार को चाहिए कि इस मांग पर शीघ्र कार्रवाई करे, ताकि यह रेलखंड अपने उद्देश्य — जनसुविधा और क्षेत्रीय विकास — को पूरी तरह पूरा कर सके।

     

    सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड ने विकास की दिशा में नई शुरुआत की है, लेकिन अगर पैसेंजर ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई तो यह सुविधा अधूरी रह

    जाएगी। आने वाले छठ पर्व में यात्रियों की भीड़ को देखते हुए यह कदम समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।

     

  • नरपतगंज प्रखंड में पैर पसारता स्मेक

    नरपतगंज प्रखंड में पैर पसारता स्मेक

     

     

    अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों स्मैक का नशा तेजी से अपने पैर पसार रहा है। यह जहरीला जाल गांव से लेकर कस्बों तक युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। कभी शांत और मेहनती जीवन के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में अब स्मैक की तस्करी और सेवन एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है।

     

    स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले जहां शराबबंदी के बाद नशे की प्रवृत्ति में थोड़ी गिरावट आई थी, वहीं अब स्मैक ने उसकी जगह ले ली है। खासकर 15 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के युवा इस नशे के शिकार बनते जा रहे हैं। खेतों में काम करने वाले मजदूर से लेकर कॉलेज जाने वाले छात्र तक इसकी चपेट में हैं। स्मैक के सेवन से युवाओं का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, परिवार बर्बाद हो रहे हैं और समाज में अपराध की घटनाएँ बढ़ रही हैं।

     

    स्मैक का गुप्त कारोबार

     

    स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नरपतगंज बाजार, सोनापुर, रामघाट कोशिकापुर और फुलकाहा जैसे इलाकों में स्मैक की छोटी-छोटी सप्लाई चेन सक्रिय हैं। ये कारोबारी गुप्त रूप से युवाओं को नशे का लालच देकर उन्हें अपने जाल में फंसा रहे हैं। रात के अंधेरे में सौदेबाजी होती है और पुलिस की नजर से बचने के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। बताया जाता है कि नेपाल से आने वाले रास्तों के जरिए भी कुछ मात्रा में स्मैक की आपूर्ति की जाती है।

     

    पुलिस की चुनौती और कार्रवाई

     

    पुलिस प्रशासन ने इस पर अंकुश लगाने के लिए कई बार छापेमारी अभियान चलाया है। हालांकि कुछ तस्कर गिरफ्तार भी हुए हैं, लेकिन फिर भी नशे का नेटवर्क पूरी तरह नहीं टूट पाया है। थाना प्रभारी का कहना है कि “हम लगातार गश्त और निगरानी बढ़ा रहे हैं। स्थानीय लोगों की मदद से जल्द ही इस नशे के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाया जाएगा।”

    लेकिन सच्चाई यह है कि तस्कर नए-नए तरीकों से पुलिस की पकड़ से बच निकलते हैं।

     

    समाज और परिवार पर असर

     

    स्मैक की लत से प्रभावित युवक धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। परिवार की जमा पूंजी नशे में खत्म हो जाती है, जिसके कारण घरों में झगड़े और टूटन बढ़ रही है। माता-पिता अपने बेटों को सुधारने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। कई युवाओं ने नशे के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ दी है, जबकि कुछ चोरी या लूट जैसे अपराधों की ओर बढ़ रहे हैं ताकि नशे के लिए पैसे जुटा सकें।

     

    स्कूल और समाज में जागरूकता की कमी

     

    नरपतगंज क्षेत्र के विद्यालयों और पंचायत स्तर पर नशा मुक्ति अभियान की बहुत जरूरत महसूस की जा रही है। शिक्षकों और समाजसेवियों का कहना है कि अगर प्रशासन और समाज दोनों मिलकर युवाओं को जागरूक करें तो इस बढ़ते संकट पर अंकुश लगाया जा सकता है। पंचायत स्तर पर नशा मुक्ति शिविर, जागरूकता रैली और स्कूलों में नशे के दुष्प्रभाव पर विशेष सत्र आयोजित करने की आवश्यकता है।

     

  • नरपतगंज से जनसुराज के उम्मीदवार जनार्दन यादव

    नरपतगंज से जनसुराज के उम्मीदवार जनार्दन यादव

    जनसूराज पार्टी ने नरपतगंज विधानसभा से पूर्व विधायक श्री जनार्दन यादव को बनाया अपना उम्मीदवार।

  • नरपतगंज प्रखंड के रामघाट पंचायत में एक माह से बिजली का आंख मिचोली से ग्रामीण परेशान

    नरपतगंज प्रखंड के रामघाट पंचायत में एक माह से बिजली का आंख मिचोली से ग्रामीण परेशान

    नरपतगंज प्रखंड के अंतर्गत आने वाले रामघाट कोसकापुर पंचायत के लोगों की परेशानी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। यहां के ग्रामीण पिछले कई सप्ताह से बिजली की आंख-मिचौली से जूझ रहे हैं। कभी बिजली आती है तो कभी चली जाती है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही बिजली का खेल शुरू हो जाता है — कभी आती है तो कभी चली जाती है। कई बार तो पूरी रात अंधेरे में बीत जाती है। इस समस्या से छात्र, किसान, दुकानदार और गृहिणियां सभी परेशान हैं। छात्र वर्ग का कहना है कि परीक्षा नजदीक होने के बावजूद वे ढंग से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। मोबाइल और लैपटॉप चार्ज न होने से ऑनलाइन पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

    गृहिणियों का कहना है कि बिजली की लगातार कटौती के कारण पानी मोटर से नहीं उठता, जिससे सुबह-शाम की दिनचर्या बाधित हो रही है। वहीं दुकानदारों का कहना है कि बिजली के अभाव में रेफ्रिजरेटर और इनवर्टर काम नहीं करते, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।

    गांव के किसानों ने बताया कि खेतों की सिंचाई के लिए डीजल इंजन का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। उन्होंने बिजली विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

    ग्रामीणों ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर की क्षमता भी कमजोर है और कई बार ओवरलोड होने के कारण बिजली कट जाती है। जबतक विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं, तबतक घंटों बिजली गुल रहती है।

    इस समस्या को लेकर पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि विभाग को बार-बार अवगत कराने के बावजूद समाधान नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही व्यवस्था नहीं सुधरी तो वे प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन करेंगे।