1. नीरव मोदी और मेहुल चोकसी बैंक घोटाला (2018): पंजाब नेशनल बैंक से करीब 13,000 करोड़ रुपये लेकर मुख्य आरोपी दे…


1. नीरव मोदी और मेहुल चोकसी बैंक घोटाला (2018): पंजाब नेशनल बैंक से करीब 13,000 करोड़ रुपये लेकर मुख्य आरोपी देश छोड़कर फरार हो गए, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
2. विजय माल्या का भागना (2016): बैंकों का हजारों करोड़ रुपया लेकर विजय माल्या के विदेश भाग जाने के बाद भी इस पर गुस्सा नहीं आया।
3. राफेल विमान सौदा विवाद (2018-2019): प्रक्रिया बदलने और ‘चौकीदार चोर है’ जैसे तीखे नारों के बीच राजनीतिक घमासान मचा, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
4. हिंडनबर्ग-अडानी विवाद (2023): अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट और क्रोनी कैपिटलिज्म के गंभीर आरोपों पर सिर्फ राजनीतिक भाषण दिए गए, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
5. नोटबंदी का फैसला (2016): अचानक नोट बंद होने से देश भर में कतारें लग गईं, अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रहार पड़ा और लाइनों में हजारों मौतें हो गईं, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
6. कठुआ रेप केस (2018): बच्ची के साथ दरिंदगी और हत्या के मामले में जब आरोपियों के समर्थन में रैलियां निकाली गईं, तब भी इस पर गुस्सा नहीं आया।
7. उन्नाव रेप केस (2017-2018): बीजेपी विधायक पर लगे गंभीर आरोपों और पीड़िता के परिवार के साथ हुई दुर्घटना पर राजनीतिक संरक्षण के सवाल उठे, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
8. हाथरस गैंगरेप और हत्या (2020): दलित युवती के साथ बर्बरता और पुलिस द्वारा रातों-रात शव का अंतिम संस्कार कर दिए जाने पर देश भर में उबाल आया, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
9. मणिपुर महिला वायरल वीडियो और हिंसा (2023): महिलाओं को निर्वस्त्र करके घुमाने का वीडियो वायरल होने और महीनों तक राज्य जलने के बाद भी इस पर गुस्सा नहीं आया।
10. महिला पहलवानों का आंदोलन (2023): देश का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवानों ने जंतर-मंतर पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाते हुए महीनों तक धरना दिया, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
11. बिल्कीस बानो दोषियों की रिहाई (2022): सामूहिक बलात्कार के मामले में उम्रकैद काट रहे दोषियों की समय से पहले रिहाई और उनके स्वागत पर राष्ट्रव्यापी नाराजगी रही, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
12. दादरी मॉब लिंचिंग (2015): फ्रिज में बीफ रखने की अफवाह पर मोहम्मद अखलाक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
13. पेहलू खान मॉब लिंचिंग (2017): कथित गौरक्षकों द्वारा डेयरी किसान पेहलू खान की पिटाई और मौत का मामला सामने आया, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
14. दिल्ली दंगे (2020): नागरिकता कानून को लेकर राजधानी के उत्तर-पूर्वी इलाकों में भीषण दंगे भड़के और 50 से अधिक जानें गईं, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
15. नूंह/मेवात हिंसा (2023): धार्मिक यात्रा के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा और आगजनी से पड़ोसी जिले प्रभावित हुए, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
16. ऐतिहासिक किसान आंदोलन (2020-2021): दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से अधिक चले आंदोलन में 700 से अधिक किसानों की मौत हुई और संवादहीनता बनी रही, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
17. कोविड-19 दूसरी लहर कुप्रबंधन (2021): ऑक्सीजन की कमी, अस्पतालों में बिस्तरों के अभाव और गंगा नदी में तैरते शवों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
18. CAA और NRC का विरोध (2019-2020): शाहीन बाग धरने और विश्वविद्यालयों में पुलिस कार्रवाई के दौरान सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हुआ, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
19. लखीमपुर खीरी हिंसा (2021): प्रदर्शन के दौरान गाड़ी से कुचलकर किसानों की मौत का मामला सामने आया, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
20. अग्निवीर योजना का विरोध (2022): स्थायी भर्तियों को बंद करके 4 साल की योजना लाने के खिलाफ देश के कई राज्यों में युवाओं का हिंसक गुस्सा फूटा, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
21. पेगासस जासूसी कांड (2021): पत्रकारों, राजनेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के फोन कथित तौर पर हैक और ट्रैक किए जाने का खुलासा हुआ, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
22. संसद सुरक्षा में चूक (2023): संसद की नई बिल्डिंग के अंदर लोकसभा कार्यवाही के दौरान स्मोक कैनिस्टर फेंकने की बड़ी सुरक्षा चूक हुई, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
23. पुलवामा हमला (2019): सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए और खुफिया विफलता के सवाल उठे, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
24. अनुच्छेद 370 हटाना और लॉकडाउन (2019): विशेष दर्जा समाप्त करने के साथ अनिश्चितकालीन इंटरनेट और संचार प्रतिबंध तथा नेताओं की नजरबंदी लागू हुई, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
25. नोटबंदी के दौरान एटीएम मौतें और मंदी: जीडीपी में गिरावट और लघु उद्योगों के तबाह होने पर सरकार की तरफ से मौन धारण किया गया, लेकिन इस पर गुस्सा नहीं आया।
इन सभी घटनाओं पर कभी गुस्सा नहीं आया, लेकिन जब कुर्सी जाने की बात आई तो अब गुस्सा आ रहा है। यही है सत्ता का असली मोह।
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