Category: कुशेश्वरस्थान

  • सकरी-हसनपुर नई रेल लाइन परियोजना को रफ्तार: कुशेश्वरस्थान अंचल के 7 गाँवों में भूमि अधिग्रहण की अंतिम राजपत्र अधिसूचना जारी

    सकरी-हसनपुर नई रेल लाइन परियोजना को रफ्तार: कुशेश्वरस्थान अंचल के 7 गाँवों में भूमि अधिग्रहण की अंतिम राजपत्र अधिसूचना जारी

    दरभंगा/समस्तीपुर: मिथिलांचल की बहुप्रतीक्षित रेल परियोजनाओं में से एक सकरी-हसनपुर नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत बिथान-कुशेश्वर स्थान-हरनगर डिटूर एलाइनमेंट (Detour Alignment) के निर्माण की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और अंतिम निर्णय लिया है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय (पूर्व मध्य रेल) द्वारा रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 20E(1) और 20E(2) के तहत आधिकारिक राजपत्र (Gazette Notification) संख्या 2749 प्रकाशित कर भूमि अधिग्रहण की अंतिम घोषणा कर दी गई है। इस घोषणा के साथ ही संबंधित गाँवों की चिन्हित भूमि अब सभी प्रकार के बकाये, दावों और विल्लंगमों से पूरी तरह मुक्त होकर सीधे केंद्र सरकार यानी भारतीय रेलवे के स्वामित्व में आ गई है।

    विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इससे पूर्व रेलवे अधिनियम की धारा 20A(1) के तहत दिसंबर 2025 में उक्त भूमि के अधिग्रहण की मंशा स्पष्ट करते हुए अधिसूचना जारी की गई थी, जिसे जनवरी 2026 में प्रमुख समाचार पत्रों (द टाइम्स ऑफ इंडिया और दैनिक जागरण) में भी प्रकाशित किया गया था। निर्धारित समयावधि के भीतर प्रभावित भू-स्वामियों या किसी अन्य हितबद्ध पक्ष की ओर से कोई वैध आपत्ति प्राप्त नहीं होने के बाद सक्षम प्राधिकारी ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी, जिसके आधार पर अब यह अंतिम मुहर लगाई गई है।

    कुशेश्वरस्थान अंचल के इन 7 गाँवों की भूमि होगी प्रभावित

    यह पूरा भूमि अधिग्रहण दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान अंचल (ब्लॉक) के अंतर्गत आने वाले कुल 7 गाँवों (मौजा) में किया गया है। अधिग्रहित की जाने वाली भूमि में दो-फसली कृषि योग्य भूमि के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण आवासीय भूखंड भी शामिल हैं। राजपत्र के अनुसार प्रभावित गाँवों और उनके रकबे का विवरण इस प्रकार है:

    1. मौजा- बलहा (थाना नं० 190): कुल अधिग्रहित रकबा 73.9050 एकड़ (मुख्यतः कृषि/दो-फसली भूमि)
    2. मौजा- नारायणपुर (थाना नं० 223): कुल अधिग्रहित रकबा 32.5425 एकड़ (कृषि भूमि)
    3. मौजा- लरनी (थाना नं० 185): कुल अधिग्रहित रकबा 6.8175 एकड़ (कृषि भूमि)
    4. मौजा- मनौरीपुर (थाना नं० 222): कुल अधिग्रहित रकबा 4.4025 एकड़ (कृषि भूमि)
    5. मौजा- बेर (थाना नं० 212): कृषि के साथ-साथ आवासीय भूमि शामिल।
    6. मौजा- धरशम (थाना नं० 209): विशेष रूप से घनी आवासीय भूमि शामिल।
    7. मौजा- मनैठा (थाना नं० 182): कृषि योग्य भूमि।

    विशेष रूप से प्रभावित होंगे बेर और धरशम के आवासीय क्षेत्र

    इस परियोजना के एलाइनमेंट में विशेष रूप से मौजा-धरशम (थाना नं० 209) और मौजा-बेर (थाना नं० 212) की घनी आवासीय भूमि आ रही है। खेसरा संख्या 862, 863, 866 और 844 जैसी कई आवासीय जमीनों के अधिग्रहण से यहाँ के स्थानीय रैयतों के मकान व रिहायशी भूखंड सीधे प्रभावित हो रहे हैं। राजपत्र में इन सभी भू-स्वामियों और उनके अभिभावकों के नामों (जैसे मजूरम झा उर्फ रामू झा, बालकृष्ण झा, सूर्य नारायण झा, कृत नारायण झा, गंगाधर झा, श्रीनाथ झा, रामजी पाठक, तारपित नाथ पाठक आदि) को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है ताकि पारदर्शी तरीके से संरचनाओं का मूल्यांकन कर उचित मुआवजा तय किया जा सके।

    मुहावजा वितरण और आगे की प्रक्रिया

    अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद अब जिला प्रशासन और समस्तीपुर रेल मंडल के सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रभावित रैयतों को मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार द्वारा निर्धारित दरों और नियमों के अनुसार कृषि तथा आवासीय भूमि का अलग-अलग मूल्यांकन कर सीधे रैयतों के बैंक खातों में राशि भेजी जाएगी। अधिकारियों ने अपील की है कि सभी प्रभावित भू-स्वामी अपने भूमि संबंधी दस्तावेज, खतियान, केवाला और पहचान पत्र तैयार रखें ताकि आवश्यक सत्यापन के बाद बिना किसी व्यवधान के उन्हें उचित मुआवजा मिल सके।

    क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर: सकरी-हसनपुर रेल लाइन का यह नया खंड जुड़ने से न केवल कुशेश्वरस्थान जैसे सुदूर और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में बाबा हरिहरनाथ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी, बल्कि समूचे मिथिलांचल की रेल कनेक्टिविटी को एक नया आयाम मिलेगा। व्यापारिक दृष्टिकोण से भी इस लाइन का पूरा होना क्षेत्र के किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए वरदान साबित होगा।

    👉 नोट: प्रभावित खेसरा नंबरों और रैयतों की पूरी विस्तृत सूची देखने के लिए हमारे फेसबुक पेज और आधिकारिक वेबसाइट (starmithilanews.in) से जुड़े रहें।

  • कुशेश्वरस्थान रेलवे स्टेशन: सांसद शांभवी चौधरी ने लोकसभा में उठाई मांग, पुरानी जगह पर ही बने स्टेशन

    कुशेश्वरस्थान रेलवे स्टेशन: सांसद शांभवी चौधरी ने लोकसभा में उठाई मांग, पुरानी जगह पर ही बने स्टेशन

    समस्तीपुर की युवा सांसद शांभवी चौधरी ने क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे को देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में प्रमुखता से उठाया है।

    सांसद ने नियम 377 के माध्यम से रेल मंत्री का ध्यान सकरी-हसनपुर रेल परियोजना की ओर खींचते हुए मांग की कि कुशेश्वरस्थान रेलवे स्टेशन का निर्माण उसके पहले से निर्धारित मूल स्थान पर ही किया जाना चाहिए।

    उन्होंने तर्क दिया कि यह स्टेशन न केवल कनेक्टिविटी बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए भी रीढ़ की हड्डी साबित होगा, इसलिए इसकी अवस्थिति जनसुविधाओं के अनुरूप होनी चाहिए।

    सांसद शांभवी चौधरी ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में पर्यावरणीय कारणों और पक्षी विहार से संबंधित नियमों की पाबंदी के चलते प्रस्तावित रेलवे स्टेशन को उसके मूल स्थान से लगभग 1.3 किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दिया गया था।

    तत्कालीन परिस्थितियों में वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के लिए यह कदम उठाया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अब उस मूल स्थान पर निर्माण कार्य को लेकर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध प्रभावी नहीं है, जिससे पुराने नक्शे पर काम करना अब संभव और सरल हो गया है।

    उन्होंने वर्तमान योजना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अभी जिस स्थान पर स्टेशन बनाने की तैयारी चल रही है, वह मुख्य आबादी और बाजार से काफी दूर है। अगर स्टेशन आबादी से इतनी दूरी पर बनता है, तो आम यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं को आवागमन में भारी असुविधा होगी।

    इसके अलावा, दूरी अधिक होने के कारण स्थानीय व्यापारियों और किसानों को अपना माल ढुलाई करने में अतिरिक्त खर्च और समय देना पड़ेगा, जो इस परियोजना के वास्तविक उद्देश्य को कमजोर करता है।

    शांभवी चौधरी के अनुसार, यदि रेलवे इस स्टेशन को वापस उसके पुराने तय स्थान पर बनाता है, तो इससे समस्तीपुर और दरभंगा जिले के सीमावर्ती इलाकों के हजारों लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा। कुशेश्वरस्थान एक महत्वपूर्ण धार्मिक और व्यापारिक केंद्र है, ऐसे में स्टेशन का आबादी के करीब होना पर्यटन और स्थानीय व्यापार को नई गति प्रदान करेगा।

    सांसद की इस सक्रिय पहल का स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया है। लोगों को अब उम्मीद है कि रेल मंत्रालय इस जनहितैषी मांग पर जल्द ही सकारात्मक मुहर लगाएगा।

  • खगड़िया-कुशेश्वरस्थान रेल परियोजना को मिली रफ़्तार: 2028 तक पूरा होगा 1384 करोड़ का नया रेल मार्ग

    खगड़िया-कुशेश्वरस्थान रेल परियोजना को मिली रफ़्तार: 2028 तक पूरा होगा 1384 करोड़ का नया रेल मार्ग

    पटना/खगड़िया: बिहार के रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, रेलवे बोर्ड ने खगड़िया-कुशेश्वरस्थान रेल परियोजना के लिए संशोधित बजट और समय सीमा को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत अलौली से कुशेश्वरस्थान के बीच नई रेल लाइन और पुलों के निर्माण पर 1384.16 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेलवे ने इस चुनौतीपूर्ण परियोजना को दिसंबर 2028 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

    संशोधित रेल मार्ग और पुलों का जाल: तकनीकी सुधारों के बाद अब इस रेल खंड की कुल लंबाई 40.953 किलोमीटर तय की गई है। इस दुर्गम इलाके में रेल दौड़ाने के लिए रेलवे को भारी निर्माण कार्य करना होगा, जिसमें 14 बड़े पुल, 13 छोटे पुल और 20 छोटी पुलिया शामिल हैं। निर्माण प्रक्रिया को गति देने के लिए अलौली से चेरा खेड़ा तक का अनुबंध (EPC Contract) 24 फरवरी 2026 को जारी कर दिया गया है, जबकि अगले हिस्से का टेंडर 20 मार्च 2026 तक जारी होने की उम्मीद है।

    बाढ़ और कटाव की चुनौतियों से निपटने की तैयारी: यह रेल मार्ग करेह, कोसी और कमला बलान जैसी बड़ी नदियों के तटबंधों के करीब से गुजरता है, जहाँ हर साल बाढ़ और मिट्टी के कटाव का खतरा रहता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 2018-19 की विनाशकारी बाढ़ के बाद एक विशेष जल वैज्ञानिक अध्ययन (Hydrological Study) कराया गया था। इसी अध्ययन के आधार पर अब पुलों और तटबंधों का ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है जो भविष्य में आने वाली किसी भी प्राकृतिक आपदा को झेलने में सक्षम होगा।

    भूमि अधिग्रहण और दशकों पुराना इतिहास: दशकों से लंबित इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 1996-97 में मात्र 78.21 करोड़ रुपये के अनुमान के साथ हुई थी, जो अब बढ़ते खर्च और विस्तार के कारण 1384 करोड़ तक पहुँच गई है। भूमि अधिग्रहण की बात करें तो कुल आवश्यक 301 हेक्टेयर जमीन में से 253 हेक्टेयर पर कब्जा मिल चुका है, जबकि शेष 48 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।

    बदलेगी मिथिलांचल और उत्तर बिहार की तस्वीर: समस्तीपुर मंडल के डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने इस भारी-भरकम बजट की पुष्टि करते हुए कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से खगड़िया और दरभंगा जिलों के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। इस नए रूट से न केवल लाखों यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि इलाके में माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।