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भारत-नेपाल रेल कनेक्टिविटी: अयोध्या और जनकपुर के बीच सीधी ट्रेन सेवा की तैयारी, तीर्थयात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

खबर सारांश

नई दिल्ली/काठमांडू: भारत और नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। काठमांडू में आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में भारत और नेपाल के अधिकारियों ने अयोध्या और जनकपुर के बीच सीधी यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने के प्रस्ताव […]

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भारत-नेपाल रेल कनेक्टिविटी: अयोध्या और जनकपुर के बीच सीधी ट्रेन सेवा की तैयारी, तीर्थयात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत
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नई दिल्ली/काठमांडू: भारत और नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। काठमांडू में आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में भारत और नेपाल के अधिकारियों ने अयोध्या और जनकपुर के बीच सीधी यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए इन दोनों पवित्र शहरों की यात्रा सुगम हो जाएगी।

इस महत्वपूर्ण परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए दोनों देशों के रेलवे अधिकारी अब ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस रेल सेवा के शुरू होने से प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या और माता सीता की जन्मस्थली जनकपुर के बीच की दूरियां सिमट जाएंगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की संभावना है।

बैठक में केवल अयोध्या-जनकपुर रूट ही नहीं, बल्कि अन्य रणनीतिक रेल परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें रक्सौल-काठमांडू ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का ‘फाइनल लोकेशन सर्वे’ (FLS) और जयनगर-बिजलपुरा-बरदीबास रेल प्रोजेक्ट के काम में तेजी लाने का निर्णय लिया गया है। ये परियोजनाएं दोनों देशों के बीच व्यापार और परिवहन के आधुनिक तंत्र को स्थापित करने में सहायक होंगी।

भारतीय दूतावास की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन सभी रेल परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सीमा-पार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। इसके अलावा, भारत नेपाल के ‘ईस्ट-वेस्ट रेलवे लिंक’ को तकनीकी विशेषज्ञता भी प्रदान करेगा, जिससे नेपाल के आंतरिक बुनियादी ढांचे को आधुनिक मजबूती मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल नेटवर्क न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक होगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत की यह पहल दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय विकास और मित्रता के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल नेटवर्क न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक होगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत की यह पहल दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय विकास और मित्रता के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

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— स्टार मिथिला न्यूज़ डेस्क

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