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  • सुपौल और नई दिल्ली के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन: यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने लिया बड़ा फैसला

    सुपौल और नई दिल्ली के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन: यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे ने लिया बड़ा फैसला

    यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ और उनकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सुपौल और नई दिल्ली के बीच गाड़ी संख्या 04072/04071 नई दिल्ली-सुपौल-नई दिल्ली स्पेशल ट्रेन का परिचालन किया जाएगा। यह ट्रेन सहरसा, मानसी, खगड़िया, बरौनी, शाहपुर पटोरी, हाजीपुर, बलिया, गाजीपुर सिटी, वाराणसी और प्रयागराज के रास्ते चलाई जाएगी।

    रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस स्पेशल ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे। इसमें तृतीय वातानुकूलित श्रेणी के 03 कोच, शयनयान श्रेणी के 08 कोच, साधारण श्रेणी के 04 कोच और एसएलआरडी के 02 कोच शामिल किए गए हैं, जिससे यात्रियों को सफर के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    ट्रेन का समय और रूट विवरण

    गाड़ी संख्या 04072 (नई दिल्ली-सुपौल स्पेशल): यह ट्रेन दिनांक 06.08.2026 से 30.09.2026 तक प्रतिदिन नई दिल्ली से रात 21.35 बजे प्रस्थान करेगी। इसके बाद विभिन्न स्टेशनों पर रुकते हुए यह ट्रेन दूसरे दिन रात 20.53 बजे सोनपुर, 21.05 बजे हाजीपुर और 22.10 बजे शाहपुर पटोरी पहुंचेगी। अपनी यात्रा के तीसरे दिन यह गाड़ी समयानुसार 00.35 बजे बरौनी, 01.03 बजे बेगूसराय, 02.18 बजे खगड़िया, 02.40 बजे मानसी, 03.10 बजे सिमरी बख्तियारपुर और 03.45 बजे सहरसा रुकते हुए सुबह 06.35 बजे सुपौल पहुंचेगी।

    गाड़ी संख्या 04071 (सुपौल-नई दिल्ली स्पेशल): वापसी की दिशा में यह ट्रेन दिनांक 08.08.2026 से 02.10.2026 तक प्रतिदिन सुपौल से सुबह 07.45 बजे खुलेगी। इसके बाद यह सुपौल से चलकर 09.35 बजे सहरसा, 10.08 बजे सिमरी बख्तियारपुर, 10.53 बजे मानसी, 11.05 बजे खगड़िया, 11.38 बजे बेगूसराय, 12.20 बजे बरौनी, 13.30 बजे शाहपुर पटोरी, 14.50 बजे हाजीपुर और 15.05 बजे सोनपुर सहित अन्य निर्धारित स्टेशनों पर रुकते हुए अगले दिन दोपहर 15.00 बजे नई दिल्ली स्टेशन पहुंचेगी।

  • सुपौल को बड़ी सौगात: बिहार का तीसरा ट्रैफिक रिसर्च संस्थान बनने की मंजूरी, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर

    सुपौल को बड़ी सौगात: बिहार का तीसरा ट्रैफिक रिसर्च संस्थान बनने की मंजूरी, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर

    सुपौल (स्टार मिथिला न्यूज): मिथिला और कोसी अंचल के विकास की दिशा में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। बिहार सरकार ने सुपौल जिले में राज्य का तीसरा ट्रैफिक रिसर्च संस्थान (Traffic Research Institute) स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस संस्थान के निर्माण से जहाँ एक ओर राज्य में सड़क हादसों में कमी लाने और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर वैज्ञानिक शोध होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।

    कोसी और मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक सौगात

    राजधानी पटना और राज्य के अन्य प्रमुख केंद्रों के बाद सुपौल में इस अत्याधुनिक संस्थान की स्थापना कोसी और मिथिला क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण से सुपौल सहित आसपास के जिलों—जैसे सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी और दरभंगा—के युवाओं को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह संस्थान यातायात नियमों के अनुपालन, सड़क सुरक्षा मानकों और आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर काम करेगा।

    संस्थान की प्रमुख विशेषताएं और मुख्य बिंदु

    • रोजगार के नए अवसर: संस्थान के संचालन के साथ ही शैक्षणिक, तकनीकी, प्रशासनिक और सहायक पदों पर नियुक्तियां होंगी, जिससे स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता और रोजगार मिलेगा।
    • यातायात प्रबंधन पर वैज्ञानिक शोध: सड़कों पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) की पहचान और उनके स्थायी समाधान के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रिसर्च किया जाएगा।
    • विशेष प्रशिक्षण सुविधा: बिहार पुलिस के यातायात कर्मियों, चालकों और सुरक्षा विशेषज्ञों को यहाँ अत्याधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
    • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार: ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर और भारत-नेपाल सीमा के समीप स्थित होने के कारण सुपौल में यह संस्थान सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।

    सड़क सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी गति

    ट्रैफिक रिसर्च संस्थान के बनने से पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती वाहनों की संख्या और हाईवे पर हादसों को रोकने के लिए इस प्रकार के शोध संस्थान समय की मांग थे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि सुपौल एक प्रमुख शैक्षणिक और शोध केंद्र के रूप में भी उभर कर सामने आएगा।

  • ललितग्राम रेलवे स्टेशन पर वाशिंग पिट का शिलान्यास, क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

    ललितग्राम रेलवे स्टेशन पर वाशिंग पिट का शिलान्यास, क्षेत्र के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

    पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर रेल मंडल अंतर्गत ललितग्राम रेलवे स्टेशन के समीप बहुप्रतीक्षित ‘ललितग्राम वाशिंग पिट’ का आज, 27 मई 2026 को, विधिवत शिलान्यास संपन्न हुआ। इस बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी परियोजना का अनावरण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय सांसद (सुपौल) श्री दिलेश्वर कामैत के कर-कमलों द्वारा किया गया।

    इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्र के लोकप्रिय माननीय विधायक (छातापुर) श्री नीरज कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। दोनों मुख्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिलापट्ट का अनावरण कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधिकारिक शुरुआत की। इस दौरान पूर्व मध्य रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामीण इस पल के गवाह बने।

    इस नए वाशिंग पिट (ट्रेन प्राथमिक सफाई और रखरखाव डिपो) के निर्माण से पूरे कोसी और मिथिलांचल क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी और ट्रेनों के परिचालन में एक बड़ा गुणात्मक सुधार देखने को मिलेगा। अब तक इस क्षेत्र में वाशिंग पिट की उचित व्यवस्था न होने के कारण लंबी दूरी की नई ट्रेनें शुरू करने में तकनीकी अड़चनें आ रही थीं। इस डिपो के बन जाने से स्थानीय स्तर पर ही ट्रेनों की गहन तकनीकी जांच, अंदरूनी व बाहरी सफाई और सुरक्षा मानकों का रखरखाव बेहद आसानी से संभव हो सकेगा, जिससे यात्रियों का सफर अधिक सुगम, स्वच्छ और सुरक्षित बनेगा।

    सबसे बड़ी बात यह है कि इस वाशिंग पिट के तैयार होते ही ललितग्राम स्टेशन से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों के लिए नई लंबी दूरी की एक्सप्रेस व मेल ट्रेनें शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इसके अलावा, इस बड़ी परियोजना के निर्माण कार्य और आगामी संचालन से स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को भी बल मिलेगा। इस ऐतिहासिक सौगात को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और व्यापार मंडल में भारी उत्साह देखा जा रहा है, और लोगों ने इसे सीमावर्ती क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया है।

  • दरभंगा-सहरसा रेलखंड पर अब सीधी चलेगी ट्रेन, न्यू झाझा बायपास रेल लाईन बनकर तैयार

    दरभंगा-सहरसा रेलखंड पर अब सीधी चलेगी ट्रेन, न्यू झाझा बायपास रेल लाईन बनकर तैयार

    सुपौल। जिले के निवासियों के लिए नया वर्ष एक बड़े तोहफे के साथ शुरू होने वाला है। सहरसा-फारबिसगंज रेलखंड पर सरायगढ़ जंक्शन से कुछ पहले बैजनाथपुर-झाझा के मध्य निर्माणाधीन नई बाईपास रेल लाइन का काम अब अंतिम दौर में पहुंच गया है।

    रेलवे अधिकारियों और निर्माण में जुटे मजदूरों के अनुसार, यदि सबकुछ तय योजना के मुताबिक चला तो नए साल में इस बहुप्रतीक्षित बाईपास लाइन का शुभारंभ हो सकता है।

    बताते चलें कि बैजनाथपुर-झाझा के बीच बन रही यह नई जंक्शन वाली बाईपास लाइन रेल संचालन के लिहाज से काफी अहम होगी। इसके चालू होने के बाद सहरसा से दरभंगा, पटना और अन्य दूरस्थ स्थानों को जाने वाली ज्यादातर ट्रेनें सरायगढ़ जंक्शन के पास बैजनाथपुर जंक्शन से होकर इस नए रूट पर डायवर्ट कर दी जाएंगी।

    इससे न केवल ट्रेनों के परिचालन में आसानी आएगी, बल्कि समय की भी काफी बचत होगी। फिलहाल सरायगढ़ जंक्शन पर ट्रेनों के रुकने और रूट बदलने की वजह से अक्सर भीड़भाड़ और संचालन संबंधी परेशानियां होती हैं। नई बाईपास लाइन शुरू होने से इन मुश्किलों से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

    ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी

    रेलवे सूत्रों की मानें तो सहरसा से दरभंगा की ओर जाने और आने वाली लगभग सभी ट्रेनों का संचालन इसी नए बाईपास रूट से होगा। इससे ट्रेनों की गति में इजाफा होगा और समयबद्धता में भी बेहतरी आएगी।

    बैजनाथपुर और झाझा इलाके में बन रहे नए जंक्शन को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों और कारोबारियों का कहना है कि जंक्शन के शुरू होने से क्षेत्र में आर्थिक सरगर्मियां बढ़ेंगी। यात्रा सुविधाओं के अलावा व्यापार, रोजगार और परिवहन के नए मौके भी सृजित होंगे।

    खासतौर पर सुपौल, सरायगढ़, बैजनाथपुर और आसपास के इलाकों के बाशिंदों को इसका प्रत्यक्ष फायदा पहुंचेगा। निर्माण में लगे कुछ कर्मियों ने बताया कि रेल पटरी बिछाने, सिग्नल सिस्टम, प्लेटफॉर्म और अन्य तकनीकी कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। बाकी कामों को तेज गति से पूरा किया जा रहा है।

    काम खत्म होने के बाद रेलवे द्वारा जांच-पड़ताल की जाएगी, जिसके बाद उद्घाटन की तारीख तय होगी। कुल मिलाकर, बैजनाथपुर-झाझा बाईपास रेल लाइन सुपौल जिले के रेल मानचित्र को नई दिशा देगी। नए वर्ष में इसके शुरू होने से यात्रा सुगम होगी और पूरे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी।

  • सुपौल में बढ़ेगी एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या, सरायगढ़ बायपास निर्माण अंतिम चरण में

    सुपौल में बढ़ेगी एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या, सरायगढ़ बायपास निर्माण अंतिम चरण में

    सुपौल, 04 दिसंबर 2025: सुपौल-निर्मली-दरभंगा रेलखंड के यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। सरायगढ़ स्टेशन के पास चांदपीपर और निर्माणाधीन न्यू झाझा स्टेशन के बीच सरायगढ़ रेलवे बायपास का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। पटरी बिछाने, ब्लास्टिंग और गिट्टी डालने का काम पूरा हो गया है, जबकि सिग्नलिंग का कार्य तेजी से जारी है।

    झाझा स्टेशन पर शेड का निर्माण भी तेज गति से चल रहा है, जहां अब लिफ्ट लगाने का काम हो रहा है। इस बायपास के पूरा होने से सुपौल से नई दिल्ली समेत कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू हो सकेगी। वर्तमान में सुपौल से निर्मली जाने वाली ट्रेनों को सरायगढ़ जंक्शन पर रिवर्सल करना पड़ता है, जिसमें करीब आधा घंटा लगता है। यह लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए बड़ी बाधा साबित होता है, लेकिन बायपास से यह समस्या दूर हो जाएगी।

    सुपौल के सांसद दिलेश्वर कामैत ने बताया कि बायपास का उद्घाटन बहुत जल्द होगा। इसके बाद सुपौल के लिए 7 से 8 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन सुनिश्चित किया जाएगा। इस मुद्दे पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से चर्चा चल रही है और सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। बायपास शुरू होने से यात्रा का समय कम होगा, साथ ही सुपौल के आर्थिक विकास में तेजी आएगी। उद्योग, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। विशेष रूप से, दरभंगा और पटना आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को अधिक ट्रेन विकल्प उपलब्ध होंगे।

    अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत सुपौल रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण भी तेजी से चल रहा है। 14.50 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे इस स्टेशन का नया भवन पूरा हो चुका है और अब लिफ्ट लगाने का काम अंतिम दौर में है। स्टेशन का चयन 2022 में हुआ था, जबकि फरवरी 2023 में प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शिलान्यास किया था। स्टेशन अब लोकार्पण की प्रतीक्षा कर रहा है, जो यात्रियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करेगा।

    यह विकास न केवल स्थानीय यातायात को सुगम बनाएगा बल्कि बिहार के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ेगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बायपास से ट्रेनों की स्पीड बढ़ेगी और दुर्घटनाओं का जोखिम भी कम होगा।

  • कोशी में बन रहा नया रेलवे स्टेशन, ‘‘न्यू झाझा‘‘ रेलवे स्टेशन देखें

    कोशी में बन रहा नया रेलवे स्टेशन, ‘‘न्यू झाझा‘‘ रेलवे स्टेशन देखें

    ये एक न्यू झाझा रेलवे स्टेशन है। जिसे पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर रेल मंडल के अन्तर्गत कोशी नदी के समीप सरायगढ़ और निर्मली के बीच में बनाया जा रहा है।
    न्यू झाझा रेलवे स्टेशन से एक नया बाय पास लाईन बनाया जा रहा है जो बैजनाथपुर अंदौली में जुड़ेगी।
    इस बाय पास रेल लाईन के पूरा होने के बाद माल वाहक ट्रेन सरायगढ़ नहीं जाएगी। बाय पास से ही सहरसा/ दरभंगा की ओर जा/ आ सकेगी।
    यही बैजनाथपुर अंदौली हॉल्ट है जिसे अब जंक्शन का दर्जा दिया गया है। यहीं बाय पास लाईन आकर मिलेगी।

    सरायगढ़ बाय पास रेल लाईन से देखें अन्य तस्वीर

  • लुधियाना और सुपौल के बीच चलेगी ‘अनारक्षित त्योहार स्पेशल एक्सप्रेस’

    लुधियाना और सुपौल के बीच चलेगी ‘अनारक्षित त्योहार स्पेशल एक्सप्रेस’

    देश में आगामी विशेष रूप से छठ पूजा के त्योहारों के दौरान बिहार जाने वाले यात्रियों की अत्यधिक भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। रेलवे ने लुधियाना (LDH) और सुपौल (SOU) के बीच एक विशेष अनारक्षित त्योहार स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन अप और डाउन दिशाओं में तीन-तीन फेरे लगाएगी, जिससे कुल छह विशेष यात्राएँ होंगी और सुपौल क्षेत्र के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

    जारी अधिसूचना के अनुसार, ट्रेन संख्या 04656 (लुधियाना-सुपौल स्पेशल) 22, 24 और 26 अक्टूबर 2025 को लुधियाना से प्रत्येक निर्धारित दिन को सुबह 11:30 बजे प्रस्थान करेगी। यह स्पेशल ट्रेन लगभग 31 घंटे 30 मिनट का सफ़र तय करके अगले दिन शाम 19:00 बजे सुपौल पहुँचेगी।

    वापसी की यात्रा में, ट्रेन संख्या 04655 (सुपौल-लुधियाना स्पेशल) 23, 25 और 27 अक्टूबर 2025 को सुपौल से रात 23:00 बजे प्रस्थान करेगी और लगभग 32 घंटे 50 मिनट का सफ़र तय करके तीसरे दिन सुबह 07:50 बजे लुधियाना पहुँचेगी।

    यह ट्रेन पूरी तरह से अनारक्षित (Un-reserved festival Special Express) श्रेणी की होगी और इसमें कुल 12 कोच (जनरल और एसएलआरडी) होंगे। यह ट्रेन 1415 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। मार्ग में इसके मुख्य ठहरावों में अंबाला कैंट, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, गोरखपुर, छपरा ग्रामीण, हाजीपुर, बरौनी जंक्शन, मानसी जंक्शन और सहरसा (SHC) शामिल हैं। ट्रेन के परिचालन और क्रू प्रबंधन के लिए छपरा (CPR) और सीवान (SEE) डिवीजनों के साथ-साथ सहरसा (SHC) और समस्तीपुर (SPJ) डिवीजनों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।


    खबर के मुख्य बिंदु (Highlights/Key Points)

    • ट्रेन का प्रकार: अनारक्षित त्योहार स्पेशल एक्सप्रेस
    • ट्रेन संख्या: 04656 (लुधियाना से सुपौल) और 04655 (सुपौल से लुधियाना)।
    • अंतिम गंतव्य स्टेशन कोड: SOU (सुपौल)
    • कुल फेरे: प्रत्येक दिशा में 3 फेरे, कुल 6 यात्राएँ।
    • 04656 (लुधियाना से) की परिचालन तिथियाँ: 22, 24 और 26 अक्टूबर 2025
    • 04655 (सुपौल से) की परिचालन तिथियाँ: 23, 25 और 27 अक्टूबर 2025
    • कुल कोच: 12 कोच (जनरल और एसएलआरडी)।
    • यात्रा की दूरी: 1415 किलोमीटर
    • मुख्य ठहराव: अंबाला कैंट, सहारनपुर, मुरादाबाद, गोरखपुर, छपरा ग्रामीण, हाजीपुर, बरौनी जंक्शन, मानसी जंक्शन, सहरसा जंक्शन (SHC)
  • त्रिवेणीगंज में पहली बार दौड़ेगी पैसेंजर ट्रेन: सुपौल-अररिया रेल लाइन का ऐतिहासिक शुभारंभ

    त्रिवेणीगंज में पहली बार दौड़ेगी पैसेंजर ट्रेन: सुपौल-अररिया रेल लाइन का ऐतिहासिक शुभारंभ

    त्रिवेणीगंज (सुपौल), 04 अक्टूबर 2025: कोसी क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि सुपौल के त्रिवेणीगंज से पहली बार पैसेंजर ट्रेन सेवा का शुभारंभ होने जा रहा है। सांसद दिलेश्वर कामैत इस अवसर पर हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना करेंगे। यह ट्रेन सुपौल-अररिया नई रेलवे लाइन का हिस्सा है, जो त्रिवेणीगंज को सहरसा से जोड़ेगी।

    27 सितंबर को त्रिवेणीगंज से अमहा पिपरा के बीच रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद इस रेल लाइन को हरी झंडी मिली थी। अब सहरसा-अमहा पिपरा पैसेंजर ट्रेन का विस्तार त्रिवेणीगंज तक कर दिया गया है। भविष्य में इस रेल लाइन को राजधानी पटना सहित देश के अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने की योजना है।

    सांसद दिलेश्वर कामैत ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह ट्रेन सेवा केवल एक परिवहन माध्यम नहीं, बल्कि विकास की नई दिशा है। इससे क्षेत्रवासियों को किफायती यात्रा सुविधा मिलेगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।” उन्होंने रेलवे में अपनी सेवा के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उपेक्षित शहरों को रेल नेटवर्क से जोड़ना उनकी प्राथमिकता रही है।

    इस नई रेल सेवा से त्रिवेणीगंज और आसपास के क्षेत्रों में बेहतर परिवहन, व्यापारिक अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित होगी। स्थानीय लोगों में इस सेवा को लेकर जबरदस्त उत्साह है, और हर कोई इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने को उत्सुक है। रेलवे प्रशासन ने भी इस शुभारंभ समारोह की तैयारियां पूरी कर ली हैं।

    त्रिवेणीगंज में उद्घाटन कार्यक्रम आज

    त्रिवेणीगंज में आज सुबह 11ः00 बजे उद्घाटन कार्यक्रम निर्धारित है। इस दौरान माननीय सांसद दिलेश्वर कामैत त्रिवेणीगंज से उद्घाटन स्पेशल ट्रेन गाड़ी संख्या 05599 को हरि झंडी दिखाकर रवाना करेंगे जो 11ः00 बजे त्रिवेणीगंज से खुलने के बाद अमहा पिपरा 11ः25 बजे, थुमहा 11ः38 बजे होते हुए सुपौल 12ः30 बजे पहुंचेगी यहां से यह गाड़ी आगे सहरसा तक जाएगी।

    कल से शुरू होगी नियमित परिचालन

    त्रिवेणीगंज और सहरसा के बीच 5 अक्टूबर से नियमित परिचालन शुरू हो जाएगी। गाड़ी संख्या 75249 प्रतिदिन सुबह 05ः30 बजे त्रिवेणीगंज से खुलेगी जो अमहा पिपरा 05ः55 बजे होते हुए सुपौल के रास्ते 08ः50 बजे सहरसा पहुंचेगी वहीं वापसी में यही ट्रेन गाड़ी संख्या 75250 सहरसा से प्रतिदिन दोपहर 14ः05 बजे खुलेगी जो सुपौल के रास्ते अमहा पिपरा 16ः55 बजे होते हुए त्रिवेणीगंज 17ः30 बजे पहुंचेगी।

  • ललितग्राम में वाशिंग पिट, राज्यरानी सुपरफास्ट, वैशाली सुपरफास्ट, जनसाधारण एक्सप्रेस होगा नियमित, निर्मली – सुरसंड नई रेल लाईन का शिलान्यास: जल्द

    ललितग्राम में वाशिंग पिट, राज्यरानी सुपरफास्ट, वैशाली सुपरफास्ट, जनसाधारण एक्सप्रेस होगा नियमित, निर्मली – सुरसंड नई रेल लाईन का शिलान्यास: जल्द

    सुपौल, 12 अगस्त 2025: सुपौल संसदीय क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी, यात्री सुविधाओं और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए सुपौल के सांसद दिलेश्वर कामैत ने मंगलवार को संसद भवन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से औपचारिक मुलाकात की। इस दौरान सांसद ने एक विस्तृत पत्र सौंपकर क्षेत्र की रेल सुविधाओं को बेहतर करने के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें अस्थायी ट्रेनों का स्थायी संचालन, नई ट्रेनों की शुरुआत, प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव और लंबित रेल परियोजनाओं का शीघ्र क्रियान्वयन शामिल है।सांसद की प्रमुख मांगें:सांसद कामैत ने बताया कि पूर्व मध्य रेल, समस्तीपुर मंडल के अंतर्गत वाया ललितग्राम, सरायगढ़ और सुपौल होकर चलने वाली कई अस्थायी ट्रेनों ने यात्रियों को काफी सुविधा प्रदान की है। इन ट्रेनों को स्थायी रूप से संचालित करने की मांग उन्होंने जोरदार तरीके से उठाई।प्रस्तावित ट्रेनों का स्थायी संचालन:

    1. सहरसा-अमृतसर जनसाधारण साप्ताहिक एक्सप्रेस (14603/04): ललितग्राम तक स्थायी विस्तार और नियमित संचालन। वर्तमान में यह स्पेशल (05503/04) के रूप में संचालित हो रही है।
    2. सहरसा-आनंद विहार गरीब रथ एक्सप्रेस (05579/80): स्थायी संचालन।
    3. सहरसा-पटना राज्यरानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12567/68): ललितग्राम तक स्थायी विस्तार, जो वर्तमान में स्पेशल (05569/70) के रूप में चल रही है।
    4. सहरसा-नई दिल्ली वैशाली एक्सप्रेस (12553/54): ललितग्राम तक विस्तार, जो अभी स्पेशल (05514/13, 05516/15) के रूप में संचालित है।
    5. दानापुर-पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12149/50): सुपौल तक स्थायी विस्तार, जो फिलहाल स्पेशल (03349/50) के रूप में चल रही है।

    नई ट्रेनों की शुरुआत:सांसद ने सीमांचल, कोसी और मिथिलांचल क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए नई ट्रेनों की मांग की, जिनमें शामिल हैं:

    • कटिहार/जोगबनी-नई दिल्ली/अमृतसर सुपरफास्ट ट्रेन: फारबिसगंज, राघोपुर और निर्मली होकर संचालन।
    • सहरसा-अमृतसर अमृत भारत एक्सप्रेस: सुपौल-दरभंगा या ललितग्राम-सहरसा होकर शीघ्र प्रारंभ।
    • सहरसा-सुपौल-मुंबई सुपरफास्ट ट्रेन: आर्थिक राजधानी मुंबई से सीधा जुड़ाव।
    • सहरसा-ललितग्राम डेमू (75206/05): फारबिसगंज तक विस्तार और सुबह 6:30 बजे फारबिसगंज से सहरसा तक संचालन।

    प्रतापगंज में ठहराव की मांग:

    सांसद ने जनसाधारण एक्सप्रेस (14603/14604) का प्रतापगंज रेलवे स्टेशन पर 2 मिनट का ठहराव सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र बड़ी आबादी वाला है और ठहराव से यात्रियों को अमृतसर व अन्य शहरों की यात्रा में सुविधा होगी, साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    रेलवे भूमि का उपयोग:

    सांसद ने सुझाव दिया कि ललितग्राम में उपलब्ध रेलवे की 70-80 एकड़ भूमि का उपयोग वाशिंग पिट लाइन और यार्ड निर्माण के लिए किया जाए। इससे सहरसा में जगह की कमी के कारण ट्रेनों के रखरखाव में हो रही कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है।

    नई परियोजनाओं का शिलान्यास:

    सांसद ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 8 अगस्त 2025 को सीतामढ़ी में घोषित सीतामढ़ी, सुरसंड, जयनगर और निर्मली रेल परियोजना के लिए 2400 करोड़ रुपये की स्वीकृति का उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इस परियोजना का शिलान्यास कर कार्य शुरू किया जाए।

    रेल मंत्री का आश्वासन:

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सांसद की सभी मांगों को गंभीरता से सुना और जनहित में इन पर शीघ्र निर्णय लेकर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।

  • ललितग्राम में बन सकता है रेलवे वाशिंग पिट: समस्तीपुर मंडल को व्यवहार्यता जांच के निर्देश

    ललितग्राम में बन सकता है रेलवे वाशिंग पिट: समस्तीपुर मंडल को व्यवहार्यता जांच के निर्देश

    सुपौल, 2 जुलाई 2025: सहरसा-फारबिसगंज रेलखंड के अंतर्गत ललितग्राम रेलवे स्टेशन पर वाशिंग पिट निर्माण की संभावना तलाशी जा रही है। पूर्व मध्य रेलवे के चीफ मैकेनिकल इंजीनियर सुबोध चन्द्र चौधरी ने समस्तीपुर मंडल को इसकी व्यवहार्यता जांच के लिए पत्र लिखा है। ललितग्राम, जो समस्तीपुर मंडल का आखिरी स्टेशन है और नेपाल सीमा से सटा हुआ है, में यह परियोजना क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

    व्यवहार्यता जांच के लिए निर्देश

    रेलवे के पीजी पोर्टल पर साझा जानकारी के अनुसार, समस्तीपुर मंडल की टीम जल्द ही ललितग्राम में स्थल निरीक्षण करेगी। इस दौरान पानी और बिजली की उपलब्धता, ट्रेनों की सुगम आवाजाही, सुरक्षा, और निर्माण व संचालन लागत जैसे पहलुओं की जांच होगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वाशिंग पिट का निर्माण आर्थिक और व्यावहारिक रूप से टिकाऊ हो। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू होगी।

    स्थानीय मांग और मंत्रियों का प्रयास

    छातापुर विधायक व पीएचईडी मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू ने ललितग्राम में वाशिंग पिट की मांग को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे बोर्ड को पत्र लिखा था। 3 मार्च 2024 को लिखे पत्र में उन्होंने रेलवे की 70 एकड़ खाली जमीन का उपयोग वाशिंग पिट या सहायक रेल इंजन कारखाने के लिए करने का सुझाव दिया था। स्थानीय लोगों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।

    रेल मंत्री ने इस प्रस्ताव का संज्ञान लेते हुए हाजीपुर जोन को विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। मंत्री बबलू का कहना है कि इस परियोजना से न केवल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    सहरसा पर निर्भरता होगी कम

    वर्तमान में सहरसा में ट्रेनों की धुलाई और मेंटेनेंस का काम होता है, जिसके कारण वैशाली एक्सप्रेस और राज्यरानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को सहरसा से ललितग्राम तक स्पेशल ट्रेन के रूप में भेजा जाता है। वाशिंग पिट बनने से यह समस्या खत्म होगी, और ललितग्राम तक ट्रेनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय लोगों को बेहतर रेल सुविधाएं मिलेंगी।

    रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण की समस्या

    ललितग्राम रेलवे स्टेशन, जो पूर्व रेल मंत्री स्व. ललित नारायण मिश्र के नाम पर है, के आसपास 70 एकड़ रेलवे की जमीन है। इस जमीन का अभी तक कोई उपयोग नहीं हुआ, जिसके कारण इस पर अवैध कब्जा हो गया है। मंत्री बबलू ने इस जमीन के सदुपयोग की मांग उठाई थी, जिसके बाद यह परियोजना गति पकड़ रही है।

    रोजगार और विकास की नई उम्मीद

    मंत्री बबलू ने बताया कि मधेपुरा में पहले से रेल इंजन निर्माण कारखाना मौजूद है। ललितग्राम में वाशिंग पिट या सहायक कारखाना बनने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। रेलवे को भी अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी।