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  • सरायगढ़, सहरसा और सुपौल में पचास हजार गैलन क्षमता के आरसीसी टैंक: निर्माण के लिए ई-टेंडर जारी, बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती

    सरायगढ़, सहरसा और सुपौल में पचास हजार गैलन क्षमता के आरसीसी टैंक: निर्माण के लिए ई-टेंडर जारी, बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती

    पूर्व मध्य रेलवे (East Central Railway) के समस्तीपुर रेल मंडल द्वारा बुनियादी ढांचे और जल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मंडल के अंतर्गत सरायगढ़, सहरसा और सुपौल क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए पचास हजार गैलन क्षमता वाले आरसीसी (RCC) ओवरहेड वाटर टैंक, ट्यूबवेल बोरिंग और पंप हाउस के निर्माण हेतु ई-टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य रेलवे परिसरों और स्थानीय स्तर पर जल आपूर्ति को निर्बाध और सुदृढ़ करना है।

    परियोजनाओं के वित्तीय आंकड़ों और कार्य की अवधि का विवरण इस प्रकार है। सरायगढ़ परियोजना की विज्ञापित राशि लगभग दो करोड़ पचासी लाख छह हजार नौ सौ सत्ताईस रुपये है, जिसके लिए बयाना राशि पांच लाख सत्तर हजार एक सौ रुपये निर्धारित की गई है। सहरसा परियोजना (टेंडर संख्या TC-115-2026-SPJ) के तहत अनुमानित लागत लगभग दो करोड़ तरेसठ लाख रुपये रखी गई है। वहीं, सुपौल परियोजना (टेंडर संख्या TC-119-2026-SPJ) के अंतर्गत अनुमानित लागत लगभग दो करोड़ पचासी लाख रुपये तय की गई है। सफल बोलीदाताओं को निर्धारित मानदंडों के तहत इन सभी विकास कार्यों को दस महीने की समयावधि के भीतर पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा करना होगा।

    भारतीय रेलवे ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केवल ऑनलाइन माध्यम को अनिवार्य किया है। किसी भी रूप में मैनुअल ऑफर स्वीकार नहीं किए जाएंगे और उन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया जाएगा। इच्छुक और पात्र ठेकेदार रेलवे के आधिकारिक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल www.ireps.gov.in के माध्यम से अपनी बोलियां जमा कर सकते हैं। सरायगढ़ और सहरसा परियोजनाओं के लिए बोली जमा करने की अंतिम तिथि इकतीस अगस्त सन दो हजार छब्बीस, दोपहर बारह बजे तक निर्धारित की गई है, जबकि सुपौल परियोजना के लिए ऑनलाइन आवेदन चार सितंबर सन दो हजार छब्बीस, दोपहर बारह बजे तक स्वीकार किए जाएंगे।

    निविदा में भाग लेने वाले बोलीदाताओं को रेलवे द्वारा तय किए गए वित्तीय और तकनीकी पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा। ठेकेदारों के पास पिछले वर्षों में इसी तरह के सिविल इंजीनियरिंग कार्यों, विशेषकर आरसीसी ओवरहेड टैंक निर्माण का पर्याप्त अनुभव होना चाहिए। साथ ही, मेक इन इंडिया नीति के तहत स्थानीय सामग्री का विवरण देना भी आवश्यक है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर गलत या भ्रामक जानकारी पाए जाने पर संबंधित फर्म का टेंडर रद्द कर दिया जाएगा और बयाना राशि जब्त कर ली जाएगी।

  • बिहार के सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर : समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी भीषण आग, टला बड़ा हादसा

    बिहार के सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पर : समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर ट्रेन के इंजन में लगी भीषण आग, टला बड़ा हादसा

    सहरसा: समस्तीपुर-सहरसा रेलखंड पर स्थित सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर सोमवार तड़के एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जानकारी के मुताबिक, समस्तीपुर से सहरसा की ओर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन संख्या 63344 जैसे ही सिमरी बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर पहुँची, उसके इंजन और उससे सटी एक बोगी में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते ट्रेन से घना धुआँ और आग की ऊँची लपटें उठने लगीं, जिससे पूरे स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया और यात्रियों के बीच अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो गया।

    Simri Bakhtiyarpur

    घटना के समय सुबह के करीब 3 बज रहे थे और अधिकांश यात्री गहरी नींद में सो रहे थे। अचानक मची भगदड़ और जान बचाने की पुकार के बीच यात्रियों ने सूझबूझ का परिचय दिया। लोग अपनी जान बचाने और सुरक्षित बाहर निकलने के लिए आनन-फानन में अपना सामान छोड़कर ट्रेन से नीचे उतरने लगे। गनीमत यह रही कि इस भयानक हादसे में किसी भी प्रकार के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, क्योंकि समय रहते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

    स्टेशन पर मौजूद रेलकर्मियों और स्थानीय सुरक्षा बलों ने तुरंत अपनी सक्रियता दिखाते हुए स्थिति को संभालने का प्रयास किया। इसके साथ ही दमकल विभाग को घटना की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुँच गईं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। आग बुझाने के बाद रेलवे प्रशासन और तकनीकी टीम ने राहत की साँस ली।

    फिलहाल ट्रेन के इंजन और बोगी में अचानक आग लगने के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शुरुआती तौर पर रेलवे के जानकारों द्वारा शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है। रेलवे अधिकारियों ने इस पूरी घटना की उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दे दिए हैं। जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के असल कारणों और नुकसान का सही आकलन सामने आ सकेगा।

  • सोनबरसा कचहरी रेलवे स्टेशन पर लो-लेवल प्लेटफॉर्म बना यात्रियों के लिए खतरा, हादसे की आशंका के बीच उठ रही प्लेटफॉर्म ऊंचा करने की मांग

    सोनबरसा कचहरी रेलवे स्टेशन पर लो-लेवल प्लेटफॉर्म बना यात्रियों के लिए खतरा, हादसे की आशंका के बीच उठ रही प्लेटफॉर्म ऊंचा करने की मांग

    सोनबरसा कचहरी स्टेशन पर सुरक्षा से खिलवाड़: लो-लेवल प्लेटफॉर्म बना मुसीबत

    सहरसा/सोनबरसा: पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर रेल मंडल अंतर्गत मानसी-सहरसा रेलखंड पर स्थित सोनबरसा कचहरी रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्टेशन के प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बेहद कम (लो-लेवल) होने के कारण प्रतिदिन सफर करने वाले हजारों यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ट्रेन के पायदान (फुटबोर्ड) और प्लेटफॉर्म के बीच अत्यधिक दूरी तथा ऊंचाई का अंतर होने के कारण चढ़ने-उतरने के दौरान दुर्घटना की आशंका हर समय बनी रहती है।

    Saharsa – Mansi Rail Line

    भीड़ बढ़ने पर बढ़ता है हादसों का खतरा

    सोनबरसा कचहरी स्टेशन आसपास के दर्जनों ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के यात्रियों के लिए आवागमन का मुख्य केंद्र है। जब भी स्टेशन पर किसी सवारी या एक्सप्रेस ट्रेन का आगमन होता है, तो प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। प्लेटफॉर्म नीचा होने के कारण यात्रियों को निम्नलिखित गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ता है:

    • बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी: वृद्धजनों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांग यात्रियों को ट्रेन के पायदान तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है और अक्सर उन्हें चढ़ने के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ती है।
    • फिसलने और गिरने का जोखिम: ट्रेन आने पर आपाधापी की स्थिति में यात्रियों का पैर फिसलने तथा ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच बने खतरनाक गैप में गिरने का खतरा बना रहता है।
    • सामान के साथ चढ़ना कठिन: भारी सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए लो-लेवल प्लेटफॉर्म से ट्रेन के कोच में प्रवेश करना काफी जोखिम भरा साबित होता है।

    मानकों के विपरीत और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी

    भारतीय रेलवे के सुरक्षा और बुनियादी ढांचा मानकों के अनुसार, नियमित यात्री ट्रेनों के ठहराव वाले स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म को ‘हाई-लेवल’ (उच्च स्तरीय) होना अनिवार्य है, ताकि आधुनिक एलएचबी (LHB) और आईसीएफ (ICF) कोचों के धरातल और प्लेटफॉर्म के बीच का अंतर न्यूनतम रहे। स्थानीय निवासियों और दैनिक रेल यात्रियों का कहना है कि सोनबरसा कचहरी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, परंतु रेल प्रशासन द्वारा अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

    रेलवे प्रशासन से जीर्णोद्धार और प्लेटफॉर्म ऊंचा करने की मांग

    स्थानीय दैनिक यात्रियों, छात्र संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने समस्तीपुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल रेल प्रबंधक (DRM) और पूर्व मध्य रेल प्रशासन से मांग की है कि सोनबरसा कचहरी स्टेशन को भी बुनियादी ढांचा विकास और सौंदर्यीकरण योजनाओं (जैसे अमृत भारत स्टेशन योजना) में शामिल कर प्लेटफॉर्म को तत्काल ‘हाई-लेवल’ में तब्दील किया जाए। यात्रियों का कहना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय रेलवे प्रशासन को समय रहते सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने चाहिए।

    यात्रियों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी (Passenger Advisory)

    जब तक रेलवे प्रशासन द्वारा प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाने का कार्य पूरा नहीं किया जाता, तब तक सोनबरसा कचहरी स्टेशन से यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है:

    • ट्रेन में चढ़ते या उतरते समय ट्रेन के पूरी तरह से रुकने का इंतजार करें और जल्दबाजी न दिखाएं।
    • चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का प्रयास कतई न करें।
    • बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को ट्रेन में बिठाते समय प्लेटफॉर्म पर मौजूद अन्य यात्रियों व रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की सहायता लें।
    • किसी भी आपात स्थिति या सहायता के लिए रेलवे के एकीकृत हेल्पलाइन नंबर 139 पर संपर्क करें तथा अपनी ट्रेन की सटीक स्थिति जानने के लिए नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES) ऐप का उपयोग करें।
  • बिहार को बड़ी रेल सौगात: मानसी-सहरसा रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी, ₹499 करोड़ होंगे खर्च

    बिहार को बड़ी रेल सौगात: मानसी-सहरसा रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी, ₹499 करोड़ होंगे खर्च

    नई दिल्ली / सहरसा: बिहार में रेल बुनियादी ढांचे और यात्री सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में भारतीय रेलवे ने एक बड़ा फैसला लिया है। पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के अंतर्गत आने वाले बेहद व्यस्त मानसी-सहरसा रेलखंड के दोहरीकरण (Doubling Project) को केंद्र सरकार ने आधिकारिक मंजूरी दे दी है। 44.40 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण परियोजना पर कुल ₹499 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। इस संबंध में पत्र सूचना कार्यालय (PIB) दिल्ली द्वारा मंगलवार को आधिकारिक जानकारी साझा की गई।

    क्षमता से 108% ज्यादा चल रही हैं ट्रेनें, दोहरीकरण से मिलेगी राहत

    रेल मंत्रालय के मुताबिक, मानसी-सहरसा खंड वर्तमान में मानसी-सारागढ़ मार्ग पर एक सिंगल-लाइन कॉरिडोर है, जिस पर ट्रेनों का अत्यधिक दबाव है। वर्तमान में इस रेल लाइन की क्षमता का उपयोग अपनी सीमा से कहीं अधिक यानी 108.11% तक पहुंच चुका है। अनुमान है कि साल 2028-29 तक यह दबाव बढ़कर 119.34% हो जाएगा। ऐसे में इस रूट पर ट्रेनों के सुचारू संचालन के लिए अतिरिक्त रेल लाइन बिछाना बेहद जरूरी हो गया था।

    रोजाना चलती हैं 24 जोड़ी यात्री ट्रेनें

    इस रूट की व्यस्तता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस खंड पर दोनों दिशाओं से प्रतिदिन 24 जोड़ी यात्री ट्रेनें गुजरती हैं। सिंगल लाइन होने के कारण अक्सर ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए स्टेशनों पर लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे समय-पालन (Punctuality) प्रभावित होती है। दोहरीकरण का काम पूरा होने के बाद परिचालन संबंधी ये सभी बाधाएं दूर हो जाएंगी और यात्रियों का सफर तेज व सुरक्षित होगा।

    व्यापार और रसद (Logistics) को मिलेगी नई रफ्तार

    यह परियोजना न केवल यात्रियों बल्कि क्षेत्र के व्यापारियों और किसानों के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी। इस रूट से हर साल 1.764 मिलियन टन (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई होने की उम्मीद है।

    इस खंड के जरिए मुख्य रूप से:

    • कृषि उत्पाद: गेहूं, मक्का, चावल और उबले चावल।
    • निर्माण सामग्री: सीमेंट, गिट्टी, रेत और पत्थर।
    • अन्य आवश्यक वस्तुएं: उर्वरक (खाद), चीनी और नमक।

    इन सभी आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही अब बिना किसी रुकावट के तेजी से हो सकेगी, जिससे कोशी और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा पहुंचेगा। रेलवे का कहना है कि यह परियोजना देश के उच्च मांग वाले मार्गों पर क्षमता विस्तार और सेवा की विश्वसनीयता में सुधार करने के निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है।

  • लापरवाही पर बड़ा एक्शन: सहरसा स्टेशन अधीक्षक का तबादला, दुर्घटना छिपाने का लगा आरोप

    लापरवाही पर बड़ा एक्शन: सहरसा स्टेशन अधीक्षक का तबादला, दुर्घटना छिपाने का लगा आरोप

    सहरसा। भारतीय रेलवे में सुरक्षा और पारदर्शिता को सर्वोपरि माना जाता है, लेकिन सहरसा स्टेशन पर इसके उलट एक मामला सामने आया है। वाशिंग पिट पर हुई एक दुर्घटना को अधिकारियों से छिपाने के आरोप में सहरसा स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक (SS) रमेश कुमार पर गाज गिरी है। समस्तीपुर मंडल के रेल प्रबंधक (DRM) ज्योतिप्रकाश मिश्रा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया है और उनका तबादला सिमरी बख्तियारपुर कर दिया है।

    हादसे को दबाने की कोशिश

    घटनाक्रम के अनुसार, सहरसा स्टेशन के वाशिंग पिट पर ट्रेनों की सफाई और रखरखाव के दौरान एक खाली बोगी अचानक बेपटरी होकर पलट गई थी। नियमानुसार, रेल परिचालन में किसी भी तरह की “डिरेलमेंट” (पटरी से उतरना) एक गंभीर घटना मानी जाती है जिसकी रिपोर्ट तुरंत मुख्यालय को देनी होती है। लेकिन सहरसा के स्थानीय अधिकारियों और कर्मियों ने अपनी साख बचाने या कार्रवाई के डर से इस खबर को दबा लिया और गुपचुप तरीके से बोगी को ट्रैक पर लाने की कोशिश में जुट गए।

    24 घंटे बाद खुला गोपनीयता का घेरा

    हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी घटना के बारे में समस्तीपुर मंडल मुख्यालय को लगभग 24 घंटे तक कोई जानकारी नहीं दी गई। जब गुप्त सूत्रों या विभागीय फीडबैक के जरिए डीआरएम ज्योतिप्रकाश मिश्रा को इस हादसे का पता चला, तो वे दंग रह गए। मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से इतनी महत्वपूर्ण बात छिपाने पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की और इसे ड्यूटी के प्रति घोर अनुशासनहीनता माना।

    कठोर कार्रवाई और कड़ा संदेश

    डीआरएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सबसे पहले स्टेशन के सर्वोच्च अधिकारी रमेश कुमार को निशाने पर लिया और उन्हें सहरसा से हटाकर सिमरी बख्तियारपुर भेज दिया। डीआरएम ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि “दुर्घटना छोटी हो या बड़ी, उसे छिपाना कतई स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने साफ कर दिया है कि सुरक्षा से समझौता और सूचनाओं को दबाने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।

    रेलवे कर्मियों में हड़कंप और भविष्य की जांच

    इस औचक कार्रवाई के बाद सहरसा स्टेशन के विभिन्न विभागों—जैसे मैकेनिकल, ट्रैफिक और इंजीनियरिंग—के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है। सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल तबादले तक ही सीमित नहीं रहेगा। वर्तमान में इस पूरी घटना की विस्तृत जांच चल रही है। जांच की आंच उन अन्य पर्यवेक्षकों और तकनीकी कर्मियों तक भी पहुँच सकती है जो उस वक्त मौके पर मौजूद थे या जिन्होंने साक्ष्यों को छिपाने में मदद की थी।

  • अमृतसर से सहरसा और पटना के लिए चलेगी स्पेशल ट्रेन, पढ़े पूरी खबर

    अमृतसर से सहरसा और पटना के लिए चलेगी स्पेशल ट्रेन, पढ़े पूरी खबर

    सहरसा, 20 नवंबर 2025: भारतीय रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए अमृतसर रेलवे स्टेशन से दो नई स्पेशल एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू करने का ऐलान किया है। ये ट्रेनें सहरसा और पटना के लिए चलाई जा रही हैं, जो एक ट्रिप के लिए आरक्षित हैं। इससे बिहार और पंजाब के बीच यात्रा करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, खासकर त्योहारों और सर्दियों के मौसम में।

    पहली ट्रेन, 04668 अमृतसर-सहरसा स्पेशल एक्सप्रेस, 21 नवंबर 2025 को अमृतसर से रवाना होगी। यह ट्रेन रात 8:10 बजे प्रस्थान करेगी और लगभग 33 घंटे की यात्रा के बाद सुबह 5:30 बजे सहरसा पहुंचेगी। वापसी में, 04667 सहरसा-अमृतसर स्पेशल एक्सप्रेस 23 नवंबर 2025 को सहरसा से सुबह 7:30 बजे चलेगी और शाम 5:00 बजे अमृतसर पहुंचेगी। यात्रियों की सुविधा के लिए यह ट्रेन दोनों दिशाओं में कई प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी, जिनमें ब्यास, जालंधर सिटी, फगवाड़ा, ढंडारी कलां, अंबाला कैंट, यमुनानगर जगाधरी, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, आलमनगर, रायबरेली, माँ बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, वाराणसी, औंरिहार, गाजीपुर सिटी, बलिया, छपरा, सोनपुर, हाजीपुर, शाहपुर पटौरी, बछवाड़ा, बरौनी, बेगुसराय, खगड़िया और मानसी शामिल हैं।

    दूसरी ट्रेन, 04670 अमृतसर-पटना स्पेशल एक्सप्रेस, 20 नवंबर 2025 को अमृतसर से रात 8:10 बजे रवाना होगी और लगभग 26 घंटे बाद रात 10:40 बजे पटना पहुंचेगी। वापसी यात्रा में, 04669 पटना-अमृतसर स्पेशल एक्सप्रेस 22 नवंबर 2025 को पटना से सुबह 1:00 बजे चलेगी और सुबह 5:20 बजे अमृतसर पहुंचेगी, जिसमें लगभग 28 घंटे लगेंगे। इस ट्रेन के स्टॉप्स में ब्यास, जालंधर सिटी, फगवाड़ा, ढंडारी कलां, अंबाला कैंट, यमुनानगर जगाधरी, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, रायबरेली, माँ बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़, वाराणसी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा और दानापुर रेलवे स्टेशन शामिल हैं।रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ये स्पेशल ट्रेनें यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए शुरू की गई हैं। आरक्षण की सुविधा उपलब्ध है, और यात्रियों से अपील की गई है कि वे समय पर बुकिंग कराएं। इससे न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।

  • सुपौल और लुधियाना के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन, देखें समय सारणी

    सुपौल और लुधियाना के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन, देखें समय सारणी

    सुपौल: त्योहारी सीजन पर अत्यधिक भीड़ को देखते हुए सुपौल और लुधियाना के बीच स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। यह स्पेशल ट्रेन सुपौल और लुधियाना के बीच सहरसा, खगड़िया, हाजीपुर, छपरा, के रास्ते चलेगी। इसका परिचालन अभी सिर्फ 3 फेरा के लिए किया जाएगा। इस ट्रेन में अनारक्षित श्रेणी का कुल 12 कोच लगा होगा।

    लुधियाना से सुपौल की ओर

    गाड़ी संख्या 04656 लुधियाना- सुपौल स्पेशल 22, 23 और 24 अक्टूबर से लुधियाना से दोपहर 11ः30 बजे प्रस्थान करेगी जो ढ़ंढारी कलां 11ः50 बजे, अम्बाला कैंट 14ः10 बजे, यमुनानगर जगधारी 14ः53 बजे, सहारणपुर 15ः35 बजे, मोरादाबाद 19ः30 बजे, बरेली 20ः58 बजे होते हुए गोंडा, गोरखपुर, छपरा, सोनपुर, हाजीपुर, साहपुर पटोरी, बछवारा, बरौनी के रास्ते खगड़िया 17ः28 बजे, मानसी 18ः18 बजे, सहरसा 19ः30 बजे होते हुए सुपौल 21ः00 बजे रात्री में पहुंचेगी।

    सुपौल से लुधियाना की ओर

    गाड़ी संख्या 04655 सुपौल- लुधियाना स्पेशल 23, 24 और 25 अक्टूबर को सुपौल से रात्री 23ः00 बजे खुलेगी जो सहरसा 23ः45 बजे, मानसी 01ः10 बजे, खगड़िया 01ः22 बजे, बेगुसराय 01ः58 बजे, बरौनी 02ः55 बजे, बछवारा 03ः25 बजे, साहपुर पटोरी 03ः58 बजे, हाजीपुर 05ः00 बजे होते हुए छपरा, मोरादाबाद, बरेली, ढ़ंढ़ारी कलां के रास्ते लुधियाना 07ः50 बजे पहुंचेगी।

    लुधियाना-सुपौल-लुधियाना अनारक्षित स्पेशल ट्रेन
  • ललितग्राम से प्रतिदिन चलेगी वैशाली एक्सप्रेस, दिल्ली का सफर हुआ आसान

    ललितग्राम से प्रतिदिन चलेगी वैशाली एक्सप्रेस, दिल्ली का सफर हुआ आसान

    सुपौल: ललितग्राम की चीरलंबित मांग अब पूरी हो गई। ललितग्राम अब राज्य की राजधानी और देश की राजधानी से जुड़ गया। सहरसा-पटना राज्यरानी सुपरफास्ट का ललितग्राम तक स्थाई विस्तार के बाद अब सहरसा-नई दिल्ली वैशाली सुपरफास्ट का स्थाई विस्तार ललितग्राम तक स्वीकृत कर दिया गया है। जल्द ही सहरसा से नई दिल्ली के बीच चलने वाली वैशाली सुपरफास्ट अब ललितग्राम- नई दिल्ली वैशाली एक्सप्रेस बनकर चलेगी। जारी अधिसूचना के अनुसार यह ट्रेन ललितग्राम के बाद सुपौल, सरायगढ़, प्रतापगंज जैसे स्टेशनों पर रूकेगी जिससे अत्यधिक रेल यात्रियों को लाभ मिल सकेगा।

    ललितग्राम से दिल्ली की ओर

    ललितग्राम – नई दिल्ली वैशाली एक्सप्रेस ललितग्राम से प्रतिदिन सुबह 04ः00 बजे खुलेगी जो राघोपुर 04ः18 बजे, सरायगढ़ 04ः30 बजे, सुपौल 05ः00 बजे होते हुए सहरसा 06ः25 बजे पहुंचेगी। सहरसा में करीब 20 मिनट ठहराव के बाद 06ः45 बजे खुलेगी जो अपने पूर्व निर्धारित समय व ठहराव के अनुसार चलकर 06ः30 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी।

    नई दिल्ली से ललितग्राम की ओर

    नई दिल्ली – ललितग्राम वैशाली एक्सप्रेस नई दिल्ली से अपने पूर्व निर्धारित समय के अनुसार रात्री 20ः40 बजे खुलेगी जो अपने पूर्व निर्धारित समय व ठहराव के अनुसार ही चलकर 20ः20 बजे सहरसा पहुंचेगी जो 20ः40 बजे सहरसा से खुलने के बाद सुपौल 21ः13 बजे, सरायगढ़ 21ः40 बजे, राघोपुर 21ः50 बजे होते हुए ललितग्राम 22ः30 बजे पहुंचेगी।

    ललितग्राम – नई दिल्ली वैशाली एक्सप्रेस का नया गाड़ी संख्या 15565/ 15566 होगा।

    Lalitgram- New Delhi Vaishali Express Time Table
  • वैशाली एक्सप्रेस: ललित बाबू का अधूरा सपना, ललितग्राम से स्थायी विस्तार की मांग तेज

    वैशाली एक्सप्रेस: ललित बाबू का अधूरा सपना, ललितग्राम से स्थायी विस्तार की मांग तेज

    सुपौल। बिहार के कोसी क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी को लेकर चल रही बहस अब वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 12553/12554) के विस्तार पर केंद्रित हो गई है। सुपौल के रेल प्रेमी और स्थानीय लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर ललितग्राम स्टेशन से नई दिल्ली तक इस ट्रेन के स्थायी परिचालन की जोरदार मांग कर रहे हैं। वहीं, सहरसा के कुछ निवासियों द्वारा इसका विरोध हो रहा है, जो इसे क्षेत्रीय हितों से जोड़कर देख रहे हैं। यह विवाद पूर्व रेल मंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्र के एक अधूरे सपने से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने 1973 में इस ट्रेन का उद्घाटन किया था।

    ट्रेन का ऐतिहासिक सफर और ललित बाबू का सपना

    वैशाली एक्सप्रेस का उद्घाटन 31 अक्टूबर 1973 को समस्तीपुर से नई दिल्ली के बीच पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र द्वारा किया गया था। शुरुआत में इसे जयंती जनता एक्सप्रेस के नाम से जाना जाता था, जिसे 26 जनवरी 1984 को वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस नाम दिया गया। ललित बाबू के लिए यह ट्रेन मात्र एक सवारी साधन नहीं, बल्कि कोसी क्षेत्र को राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने का माध्यम था। उनका सपना था कि यह ट्रेन उनके पैतृक गांव ललितग्राम (पूर्व नाम बलुआ रोड) से होकर चले, ताकि कोसी का यह सुदूर इलाका देश के अन्य हिस्सों से बेहतर जुड़े। 1971 में ललित नारायण मिश्र ने कोसी क्षेत्र में रेल नेटवर्क का विस्तार किया, जिसमें ललितग्राम से फारबिसगंज तक लाइन बिछाई गई। उनके मरणोपरांत 1975 में इस रेलखंड पर परिचालन शुरू हुआ और स्टेशन का नाम ललितग्राम रखा गया। मीटर गेज से ब्रॉड गेज में रूपांतरण के बावजूद, वैशाली एक्सप्रेस ललितग्राम तक नहीं पहुंच सकी। आज भी यात्री इस ट्रेन में सवार होते ही ललित बाबू की यादें ताजा कर लेते हैं।

    वर्तमान स्थिति: स्पेशल परिचालन से स्थायी विस्तार की मांग

    पिछले चार महीनों से वैशाली एक्सप्रेस ललितग्राम से सहरसा तक स्पेशल ट्रेन (ट्रेन नंबर 05515) के रूप में चल रही है, जो 16 मई 2025 से प्रभावी हुई। सहरसा से यह नई दिल्ली के लिए नियमित रूप से संचालित होती है। सुपौल के रेल फैन और स्थानीय नेता इसे ललित बाबू के सपने को पूरा करने का अवसर मानते हैं। एक्स पर #Vaishali4Lalitgram अभियान चल रहा है, जहां उपयोगकर्ता रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से अपील कर रहे हैं। एक पोस्ट में लिखा गया, “वैशाली एक्सप्रेस का स्थायी विस्तार ललितग्राम तक हो, ताकि कोसी क्षेत्र के लोग आसानी से दिल्ली पहुंचें।” सुपौल वॉइस जैसे हैंडल ने तर्क दिया कि सहरसा में वाशिंग पिट न होने पर भी ट्रेनें 109 किमी दूर बरौनी में मेंटेनेंस के लिए जाती रहीं, तो ललितग्राम में विरोध क्यों? एक अन्य पोस्ट में कहा गया, “यह विस्तार सुपौल के विकास का प्रतीक है, विरोध क्षेत्रीय भेदभाव दिखाता है।”

    सहरसा का विरोध: रखरखाव और क्षेत्रीय हितों का मुद्दा

    सहरसा के रेल प्रेमी इसे अपनी लाइफलाइन मानते हैं और विस्तार को रखरखाव की समस्या से जोड़ते हैं। सहरसा जंक्शन अपडेट्स जैसे हैंडल ने एक्स पर पोस्ट किया, “सुपौल पुणे एक्सप्रेस में गंदगी और टोटी गायब होने की घटनाएं विस्तार के बाद बढ़ीं, वैशाली के साथ यही होगा। #NOT_Extend_VaishaliExpress।” उनका कहना है कि ललितग्राम में सुविधाओं की कमी से ट्रेन की सफाई और मेंटेनेंस प्रभावित होगा, जो सहरसा-खगड़िया-बेगूसराय के यात्रियों को नुकसान पहुंचाएगा। एक पोस्ट में आरोप लगाया गया कि विरोध के बीच ट्रेनों में तोड़फोड़ की साजिश रचाई जा रही है।

    सांसद के प्रयास और भविष्य की उम्मीदें

    सुपौल सांसद दिलेश्वर कामैत ललितग्राम को टर्मिनल स्टेशन बनाने के लिए वाशिंग पिट और अन्य सुविधाओं का विकास करा रहे हैं। उन्होंने संसद में कई बार आवाज उठाई और रेल मंत्री से मुलाकात की। सुपौल के लोग मांग कर रहे हैं कि ललितग्राम को कोसी का बड़ा टर्मिनल बनाकर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत की जाए, ताकि ललित बाबू का सपना साकार हो। रेल मंत्रालय ने अभी तक स्थायी विस्तार पर फैसला नहीं लिया है, लेकिन एक्स पर चल रही बहस से साफ है कि यह मुद्दा कोसी क्षेत्र के विकास का प्रतीक बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सुविधाओं के साथ विस्तार संभव है, जो सभी क्षेत्रों के हित में होगा।

  • पुणे-दानापुर एक्सप्रेस का सुपौल तक स्थाई विस्तार, रेल मंत्रालय ने दी मंजूरी | सुपौल न्यूज़

    पुणे-दानापुर एक्सप्रेस का सुपौल तक स्थाई विस्तार, रेल मंत्रालय ने दी मंजूरी | सुपौल न्यूज़

    सुपौल: कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लिए रेलवे ने एक बड़ी सौगात दी है। पुणे-दानापुर एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 12149 और 12150) का सुपौल तक स्थाई विस्तार को रेल मंत्रालय ने 2 सितंबर को मंजूरी दे दी। अब सुपौल के लोग पुणे तक आसानी से सफर कर सकेंगे।

    सुपौल के सांसद दिलेश्वर कामेत ने लंबे समय से इस ट्रेन को नियमित करने की मांग उठाई थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया। रेल मंत्रालय के पत्र के अनुसार, यह ट्रेन अब नियमित रूप से सुपौल से पुणे तक चलेगी।

    जल्द ही सुपौल से पुणे के लिए सीधी टिकट बुकिंग भी शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, सुपौल से चल रही अन्य स्पेशल ट्रेनें जैसे सहरसा-राज्यरानी सुपरफास्ट, सहरसा-नई दिल्ली वैशाली सुपरफास्ट, और पूर्णिया कोर्ट-आनंद विहार स्पेशल को भी नियमित करने की मांग जोर पकड़ रही है।

    सूत्रों के मुताबिक, 15 सितंबर से पहले कुछ अन्य ट्रेनों को भी स्थाई करने की तैयारी है। इस विस्तार से सुपौल और आसपास के क्षेत्रों में खुशी का माहौल है, और यह क्षेत्र के विकास और कनेक्टिविटी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।