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अमृत भारत योजना में शामिल, फिर भी यात्री जान जोखिम में डालकर पटरी पार करने को मजबूर

खबर सारांश

झंझारपुर। उत्तर बिहार और मिथिलांचल के रेल नेटवर्क में झंझारपुर जंक्शन एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 19 सितंबर 2024 को इस स्टेशन को 'अमृत भारत स्टेशन योजना' में शामिल कर रेल मंत्रालय ने स्थानीय लोगों को विकास के बड़े सपने दिखाए थे। लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके […]

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झंझारपुर उत्तर बिहार और मिथिलांचल के रेल नेटवर्क में झंझारपुर जंक्शन एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 19 सितंबर 2024 को इस स्टेशन को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ में शामिल कर रेल मंत्रालय ने स्थानीय लोगों को विकास के बड़े सपने दिखाए थे। लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट है। घोषणा के महीनों बाद भी बजट का आवंटन न होने के कारण स्टेशन का कायाकल्प तो दूर, यात्रियों की बुनियादी सुरक्षा भी दांव पर लगी है।

जानलेवा सफर: ट्रैक पार करना यात्रियों की मजबूरी

स्टेशन से आ रही तस्वीरें डराने वाली हैं। प्लेटफॉर्म संख्या एक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए कोई सुरक्षित रास्ता न होने के कारण यात्री रेल की पटरियों के बीच से होकर गुजरते हैं। इनमें भारी बोझ उठाए मजदूर, छोटे बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। जरा सी चूक या अचानक ट्रेन के आने की स्थिति में यहाँ किसी भी वक्त एक बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन की लापरवाही यात्रियों की जान पर भारी पड़ रही है।

अंडरपास की नाकामी: क्यों यह यात्रियों के काम का नहीं?

प्रशासन अक्सर दलील देता है कि सुरक्षा के लिए विकल्प मौजूद हैं, लेकिन झंझारपुर जंक्शन पर बना अंडरपास पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। स्थानीय यात्रियों और जानकारों का कहना है कि यह अंडरपास इतना अधिक घुमावदार (Zig-Zag) है कि इसमें जाने का मतलब है काफी लंबा रास्ता तय करना।

इतना ही नहीं, सुरक्षा और सुगमता के लिहाज से यह अंडरपास यात्रियों के किसी काम का नहीं रह गया है। ट्रेन पकड़ने की जल्दी में कोई भी यात्री उस जटिल और घुमावदार रास्ते का उपयोग नहीं करना चाहता। यही कारण है कि यात्री सीधे ट्रैक पार करना ज्यादा आसान समझते हैं। लोगों का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ एक सीधा फुट ओवर ब्रिज (FOB) ही इस समस्या का एकमात्र और स्थाई समाधान है।

बजट के अभाव में लटका ‘अमृत भारत’ का सपना

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत झंझारपुर को एक ‘आदर्श स्टेशन’ के रूप में विकसित किया जाना है। प्रस्तावित कार्यों में हाई-लेवल प्लेटफॉर्म, आधुनिक वेटिंग हॉल और स्टेशन का सौंदर्यीकरण शामिल है। लेकिन बजट आवंटन में देरी ने इन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जब तक केंद्र सरकार और रेलवे विभाग फंड जारी नहीं करते, तब तक ये सभी योजनाएं महज फाइलों तक सीमित रहेंगी।

प्राथमिकता पर हो ओवर ब्रिज का निर्माण

झंझारपुर की जनता की अब सरकार और रेल प्रशासन से एक ही प्रमुख मांग है – पुनर्विकास के साथ-साथ फुट ओवर ब्रिज (FOB) का निर्माण तत्काल शुरू किया जाए। यह अब केवल सुविधा का नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने का सवाल है।

‘‘क्या आपको लगता है कि रेलवे को सौंदर्यीकरण के साथ – साथ सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताएं।‘‘

“झंझारपुर जंक्शन: अंडरपास के बेकार होने के कारण यात्री जान जोखिम में डाल ट्रैक पार करने को मजबूर।”

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