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Jhanjharpur

  • तमुरिया रेलवे स्टेशन पर अमृत की वर्षा हो रही है।

    तमुरिया रेलवे स्टेशन पर अमृत की वर्षा हो रही है।

    तमुरिया रेलवे स्टेशन पर अमृत की वर्षा हो रही है।

    इस अमृत काल में सभी अमृत भारत स्टेशनों का भी यही हाल है तो अन्य स्टेशन का क्या हाल होगा?

    थोड़ी भी बरसात में झंझारपुर निर्मली रेलखंड के लगभग सभी स्टेशनों का यही हाल हो जाता है। बता दें कि इस रेलखंड पर इन स्टेशनों का नव निर्माण आमान परिवर्तन के दौरान हुआ जो लगभग 6 से 7 साल पहले बना, अब 6,7 सालों में ही ये हाल स्टेशनों का है।

  • झंझारपुर रेलवे स्टेशन परिसर में आरपीएफ अधिकारी पर जानलेवा हमला: पांच गिरफ्तार, दो फरार

    झंझारपुर रेलवे स्टेशन परिसर में आरपीएफ अधिकारी पर जानलेवा हमला: पांच गिरफ्तार, दो फरार

    झंझारपुर रेलवे स्टेशन के समीप स्थित टैक्सी स्टैंड और पार्किंग क्षेत्र में सोमवार देर रात (लगभग 11:30 बजे) 10 से 12 असामाजिक तत्वों व स्थानीय लोगों के बीच आपसी विवाद को लेकर उग्र हंगामा हो रहा था। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के प्रभारी अरविंद कुमार के निर्देश पर सहायक उप-निरीक्षक (ASI) विकास कुमार आरपीएफ के जवानों के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। जब एएसआई विकास कुमार दोनों पक्षों को शांत कराने और समझाकर मामला निपटाने का प्रयास कर रहे थे, उसी दौरान मोटरसाइकिल से आए कुछ उपद्रवियों ने पीछे से उन पर लाठी-डंडों से अचानक जानलेवा हमला कर दिया।

    हमले का प्रभाव और पुलिस कार्रवाई सिर पर लाठी का सीधा और ज़ोरदार वार लगते ही एएसआई विकास कुमार लहूलुहान होकर ज़मीन पर गिर पड़े। इस अचानक हुए हमले में उनके सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घटना के तुरंत बाद आरपीएफ और राजकीय रेल पुलिस (GRP) की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुस्तैदी दिखाई और मौके से एक हमलावर को रंगे हाथों दबोच लिया। पकड़े गए आरोपी से कड़ाई से की गई पूछताछ और उसकी निशानदेही के आधार पर पुलिस ने रेलवे परिसर और आसपास के इलाकों में सघन छापेमारी अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप चार अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

    गिरफ्तार एवं फरार आरोपियों की जानकारी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पाँचों आरोपियों की पहचान अमरेश पासवान, लोकेश कुमार, अवधेश पासवान, रामनारायण पासवान और बसंत पासवान के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी अंधराठाढ़ी थाना क्षेत्र के राजनपुर (वार्ड संख्या 12) के निवासी हैं। पुलिस की इस तत्परता के बीच दो अन्य आरोपी रात के अंधेरे का फ़ायदा उठाकर भागने में सफल रहे। फरार आरोपियों में से एक की पहचान झंझारपुर थाना क्षेत्र निवासी राहुल कुमार के रूप में कर ली गई है, जबकि दूसरे अज्ञात आरोपी की पहचान के प्रयास जारी हैं। पुलिस फरार बदमाशों की गिरफ़्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।

    चिकित्सा एवं स्वास्थ्य स्थिति हमले में घायल एएसआई विकास कुमार को तुरंत इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर में भर्ती कराया गया। अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके सिर के ज़ख्म पर एक टांका लगाया और हाथ की चोट की गंभीरता को देखते हुए एक्स-रे कराया। चिकित्सकों के अनुसार प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति पूरी तरह से स्थिर और ख़तरे से बाहर बताई गई है।

    कानूनी कार्रवाई और अनुसंधान इस घटना के संदर्भ में घायल एएसआई विकास कुमार के लिखित आवेदन के आधार पर राजकीय रेल पुलिस (जीआरपी) थाना, दरभंगा में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पकड़े गए पाँचों आरोपियों को आगे की पूछताछ और कानूनी सत्यापन के लिए दरभंगा लाया गया है। मामले की आगे की जाँच और अनुसंधान की ज़िम्मेदारी उप-निरीक्षक दिलीप कुमार को सौंपी गई है।

  • झंझारपुर लौकहा बाजार रेलखंड पर 3 नए ब्रिज का निर्माण काफी मंद गति से चल रहा है। चुनाव में बड़े बड़े दावे और चुना…

    झंझारपुर लौकहा बाजार रेलखंड पर 3 नए ब्रिज का निर्माण काफी मंद गति से चल रहा है। चुनाव में बड़े बड़े दावे और चुना…

    झंझारपुर लौकहा बाजार रेलखंड पर 3 नए ब्रिज का निर्माण काफी मंद गति से चल रहा है। चुनाव में बड़े बड़े दावे और चुनाव के बाद चल रहे कार्य को भी ग्रहण लग जाता है।

    क्या कहना है आखिर कब तक पूरा होगा रेल ब्रिज निर्माण कार्य?

  • झंझारपुर में छुपेरुस्तम कातिबों को दी गई तिलांजलि, मृत्यु भोज का हुआ आय…

    झंझारपुर में छुपेरुस्तम कातिबों को दी गई तिलांजलि, मृत्यु भोज का हुआ आय…

    झंझारपुर में छुपेरुस्तम कातिबों को दी गई तिलांजलि, मृत्यु भोज का हुआ आयोजन

    झंझारपुर समेत पूरे बिहार में जमीन रजिस्ट्री में पेपर लेस व्यवस्था का विरोध किया जा रहा है। कातिबों के द्वारा विगत 17 अगस्त से असहयोग आंदोलन किया जा रहा है।

    इस असहयोग आंदोलन के दौरान झंझारपुर रजिस्ट्री ऑफिस समेत अन्य रजिस्ट्री ऑफिस में कई ऐसे कातिब है जो चोरी छुपे कातिब संघ के फैसला का निरादर करते हुए लगातार रजिस्ट्री करवा रहे है ।

    इन छुपे रुस्तम कातिबों को कातिब संघ मृत समान मानती हुई आज झंझारपुर रजिस्ट्री ऑफिस के मुंशी संघ कातिब खाना में उन कातिबों को तिलांजलि देकर मृत्यु भोज का आयोजन किया गया।

  • झंझारपुर में छुपेरुस्तम कातिबों को दी गई तिलांजलि, मृत्यु भोज का हुआ आय…

    झंझारपुर में छुपेरुस्तम कातिबों को दी गई तिलांजलि, मृत्यु भोज का हुआ आय…

    झंझारपुर में छुपेरुस्तम कातिबों को दी गई तिलांजलि, मृत्यु भोज का हुआ आयोजन

    झंझारपुर समेत पूरे बिहार में जमीन रजिस्ट्री में पेपर लेस व्यवस्था का विरोध किया जा रहा है। कातिबों के द्वारा विगत 17 अगस्त से असहयोग आंदोलन किया जा रहा है।

    इस असहयोग आंदोलन के दौरान झंझारपुर रजिस्ट्री ऑफिस समेत अन्य रजिस्ट्री ऑफिस में कई ऐसे कातिब है जो चोरी छुपे कातिब संघ के फैसला का निरादर करते हुए लगातार रजिस्ट्री करवा रहे है ।

    इन छुपे रुस्तम कातिबों को कातिब संघ मृत समान मानती हुई आज झंझारपुर रजिस्ट्री ऑफिस के मुंशी संघ कातिब खाना में उन कातिबों को तिलांजलि देकर मृत्यु भोज का आयोजन किया गया।

  • झंझारपुर होकर लौकहा बाजार आनंद विहार स्पेशल 04013/ 14 पूर्ण यात्री भार के साथ चल रही है फिर भी इसे नियमित नहीं क…

    झंझारपुर होकर लौकहा बाजार आनंद विहार स्पेशल 04013/ 14 पूर्ण यात्री भार के साथ चल रही है फिर भी इसे नियमित नहीं क…

    झंझारपुर होकर लौकहा बाजार आनंद विहार स्पेशल 04013/ 14 पूर्ण यात्री भार के साथ चल रही है फिर भी इसे नियमित नहीं किया जा रहा है।

    आखिर कब तक लौकहा को नई सौगात मिलेगी। Ministry of Railways, Government of India

  • रात के अंधेरे में कही खो गया झंझारपुर का मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

    रात के अंधेरे में कही खो गया झंझारपुर का मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

    रात के अंधेरे में कही खो गया झंझारपुर का मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल

    झंझारपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण पिछले 6 वर्षों से चल रहा है। 2020 में इस कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ। अनुमानित लागत 417 करोड़ था जिसे बाद में बढ़ाकर 515 करोड़ किया गया।

    22 एकड़ में बन रहा इस झंझारपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण 2023 में पूरा होना था जिसे बढ़ाकर 2024, फिर अगस्त 2025 और अब 2026 के अंत तक पूरा करने की तैयारी है।

    फिर भी 2026 में इसका निर्माण पूरा होगा या नहीं ये तो आने वाला चुनाव ही बताएगा।

  • आज झंझारपुर होकर JCB जा रहा था। कही भी गया हो, लेकिन अब इसको देखकर लगता है कि ये रूट सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बन…

    आज झंझारपुर होकर JCB जा रहा था। कही भी गया हो, लेकिन अब इसको देखकर लगता है कि ये रूट सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बन…

    आज झंझारपुर होकर JCB जा रहा था। कही भी गया हो, लेकिन अब इसको देखकर लगता है कि ये रूट सिर्फ मालगाड़ियों के लिए बना है।

    पूरे दिन मालगाड़ी जाती/ आती रहती है। करीब 20 से अधिक उप / डाउन मालगाड़ी झंझारपुर होकर प्रतिदिन गुजरती है। ये ट्रेन दिल्ली/ मुंबई/ सूरत/ पंजाब की ओर से आती है और झंझारपुर होते हुए सीधे गुवाहाटी, हावड़ा, कामाख्या, असम की ओर चली जाती है। इसके लिए पूरा पाथ खाली है लेकिन एक यात्री ट्रेन के लिए रेलवे कटिहार, खगड़िया, मानसी को चुनती है।

    इस वर्ष झंझारपुर को एक भी स्पेशल/ नियमित ट्रेन नहीं दिया गया। क्या इस रूट में पैसेंजर नहीं है? आखिर इस रूट को इतना अनदेखा क्यों किया जा रहा है ?

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    बिहार सम्पर्क एक्सप्रेस का विस्तार लौकहा तक, अमृत भारत एक्सप्रेस वाया झंझारपुर : माननीय सांसद संजय झा ने लिखा पत्र Star Mithila News

  • 47 वर्षों का लंबा इंतज़ार खत्म! 1979 से मान्यता की आस लगाए संस्कृत विद्यालय पर पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश

    47 वर्षों का लंबा इंतज़ार खत्म! 1979 से मान्यता की आस लगाए संस्कृत विद्यालय पर पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश

    पटना: पटना उच्च न्यायालय ने मधुबनी जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र बाबूबरही स्थित ‘झोटन अनंत संस्कृत उच्च विद्यालय, नवानगर’ को मान्यता और संबद्धीकरण देने के मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकल पीठ ने विद्यालय के शिक्षकों एवं कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव के समक्ष नया आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने बोर्ड प्रशासन को आदेश दिया है कि वह मधुबनी के जिलाधिकारी (DM) से वैधानिक रिपोर्ट प्राप्त कर तीन महीने के भीतर नियमानुसार मान्यता की प्रक्रिया पूरी करे।

    1979 से जारी संघर्ष: लालफीताशाही और प्रशासनिक उपेक्षा का दंश

    अदालत में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए विद्वान अधिवक्ता ब्रजेश वर्मा ने पीठ को अवगत कराया कि यह संस्थान वर्ष 1979 से ही लगातार राज्य सरकार और बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड से संबद्धीकरण पाने की प्रतीक्षा कर रहा है। वर्ष 1979 में संस्थापक डॉ. राधाकांत मिश्र ने क्षेत्र में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से इस विद्यालय की स्थापना की थी। इसके लिए उन्होंने अपनी 1 बीघा 19 कट्ठा निजी जमीन विद्यालय को दान में दी, जिस पर पक्का भवन निर्मित है और विद्यालय सुचारू रूप से संचालित हो रहा है। परंतु, बीते 47 वर्षों से मान्यता न मिलने के कारण यहाँ कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों और अध्ययनरत छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है तथा संस्थान गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक संकट से जूझ रहा है।

    कागज़ों में सिमटी प्रक्रिया: भौतिक निरीक्षण के बाद भी अटकी रही फाइल

    सुनवाई के दौरान न्यायालय के संज्ञान में लाया गया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा मान्यता प्राप्त करने के लिए वर्ष 2014 से पूर्व से ही लगातार प्रयास किए जाते रहे थे। अंततः सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ वर्ष 2014 में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), मधुबनी के समक्ष औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके बाद, सर्व शिक्षा अभियान के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने भौतिक निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपी थी कि विद्यालय मान्यता की सभी शर्तों को पूरा करता है। इस रिपोर्ट के आधार पर माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष निदेशक ने 1 अप्रैल 2016 को पत्र संख्या 349 के जरिए संस्कृत शिक्षा बोर्ड को नियमानुसार मान्यता की कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और बोर्ड की सुस्ती के कारण मामला वर्षों तक फाइलों में दबा रहा।

    हाईकोर्ट का कड़ा रुख: 3 महीने के भीतर फैसला लेने की तय की समय-सीमा

    राज्य सरकार और बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि ‘बिहार गैर-सरकारी संस्कृत विद्यालय (मान्यता की शर्तें) नियमावली, 1993’ के नियम 5 के तहत जिलाधिकारी की अनुशंसा या आधिकारिक रिपोर्ट अनिवार्य होती है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि नियमावली के तहत डीएम की रिपोर्ट जरूरी है। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता 4 सप्ताह के भीतर बोर्ड के सचिव के समक्ष नया आवेदन जमा करेंगे। आवेदन मिलते ही बोर्ड के सचिव अविलंब जिलाधिकारी (मधुबनी) से रिपोर्ट तलब करेंगे और रिपोर्ट प्राप्त होने के 3 महीने के भीतर कानून एवं लागू नियमों के अनुसार मान्यता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। उच्च न्यायालय के इस कड़े आदेश से बीते 47 सालों से हक की लड़ाई लड़ रहे विद्यालय परिवार, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों में उम्मीद की नई किरण जगी है।