भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के मौसम निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 14 मार्च 2026 को जारी एक आधिकारिक आपूर्ति आदेश के अनुसार, केंद्र सरकार ने लगभग 340 करोड़ रुपये की लागत से देश भर में नए डॉप्लर वेदर रडार स्थापित करने का निर्णय लिया है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पूरे देश में कुल 14 शक्तिशाली C-Band और 18 X-Band रडार लगाए जाएंगे। बिहार के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 14 चुनिंदा स्थानों में उत्तर बिहार के प्रमुख शहर दरभंगा का नाम भी शामिल है, जहाँ यह आधुनिक तकनीक वाला रडार स्थापित किया जाएगा।
दरभंगा में लगने वाला यह C-Band डॉप्लर रडार अपनी श्रेणी में बेहद शक्तिशाली माना जाता है, जो लगभग 250 से 400 किलोमीटर के दायरे में मौसम की हर छोटी-बड़ी हलचल को पकड़ने में सक्षम है। इस रडार के चालू होने से न केवल दरभंगा, बल्कि मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी और सहरसा सहित पूरे मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र में मौसम की सटीक जानकारी समय रहते मिल सकेगी।
विशेष रूप से मानसून के दौरान होने वाली भारी बारिश, अचानक आने वाले चक्रवाती तूफान, ओलावृष्टि और आसमानी बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी अब कई घंटे पहले जारी की जा सकेगी, जिससे जान-माल के नुकसान को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
यह परियोजना मेसर्स डेटा पैटर्न्स (इंडिया) लिमिटेड द्वारा कार्यान्वित की जा रही है, जिसे उपकरणों की आपूर्ति के साथ-साथ अगले 10 वर्षों तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। उत्तर बिहार जैसे बाढ़ और मौसम की अनिश्चितता वाले संवेदनशील क्षेत्र के लिए यह रडार एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
वर्तमान में पटना और पूर्णिया जैसे शहरों में पहले से रडार सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन दरभंगा में इस नए और उन्नत C-Band रडार के लगने से क्षेत्रीय स्तर पर मौसम विभाग की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इससे न केवल आम नागरिकों को सुविधा होगी, बल्कि किसानों को भी अपनी फसलों के प्रबंधन के लिए सटीक मौसम पूर्वानुमान प्राप्त हो सकेगा।