झंझारपुर, राघोपुर, फारबिसगंज होकर चलेगी न्यू जलपाईगुड़ी-अमृतसर अमृत भारत एक्सप्रेस, मिली स्वीकृति, उद्घाटन जल्द

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झंझारपुर/मधुबनी: इंतज़ार की घड़ियाँ अब समाप्त होने वाली हैं और पटरियों पर एक नई क्रांति दस्तक देने को तैयार है। भारतीय रेलवे ने उत्तर भारत के गौरव अमृतसर और उत्तर-पूर्व के प्रवेश द्वार न्यू जलपाईगुड़ी के बीच नई ‘अमृत भारत एक्सप्रेस’ (14664/14663) चलाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है. रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि उन हजारों प्रवासी कामगारों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं के सपनों को पंख देने वाली एक जीवनरेखा है, जो बरसों से एक सीधी और सम्मानजनक ट्रेन सेवा की बाट जोह रहे थे.

मिथिला की माटी को मिला सम्मान इस ट्रेन का सबसे भावुक और सुखद पहलू इसका रूट है, जो सीधे मिथिलांचल के हृदय को छूकर गुजरेगा। जब यह ट्रेन झंझारपुर, सकरी, निर्मली और सरायगढ़ जैसे स्टेशनों पर रुकेगी, तो यह केवल यात्रियों को नहीं बिठाएगी, बल्कि मिथिला की संस्कृति और पंजाब की जीवंतता को आपस में जोड़ेगी. बरसों से अपने घर-परिवार से दूर पंजाब और हरियाणा के खेतों या कारखानों में पसीना बहाने वाले हमारे भाइयों के लिए अब घर पहुँचना न केवल आसान होगा, बल्कि ‘अमृत भारत’ के आधुनिक रेक में उनका सफर अब स्वाभिमान से भरा होगा.

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सफर में दिखेगी आधुनिकता और अपनापन अमृतसर से प्रत्येक गुरुवार को दोपहर 12:45 बजे रवाना होने वाली यह ट्रेन जब शुक्रवार की रात फारबिसगंज, नरपतगंज और राघोपुर के रास्तों से गुजरेगी, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की एक नई इबारत लिखेगी. वापसी में शनिवार सुबह न्यू जलपाईगुड़ी से चलकर यह ट्रेन जब सोमवार तड़के अमृतसर पहुँचेगी, तो यह अपने साथ पूरब की खुशबू और यादें लेकर पश्चिम तक जाएगी. आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस इस ट्रेन में सफर करना अब थकावट नहीं, बल्कि एक उत्सव जैसा अनुभव होगा.

आर्थिक और सामाजिक उन्नति का नया सवेरा यह ट्रेन रक्सौल, सीतामढ़ी और जनकपुर रोड जैसे धार्मिक और व्यापारिक केंद्रों को जोड़कर न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय छोटे व्यापारियों के लिए भी संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी. सीतापुर, गोंडा और गोरखपुर जैसे उत्तर प्रदेश के शहरों से होते हुए यह ट्रेन जब पंजाब की सरजमीं पर कदम रखेगी, तो यह उत्तर भारत की विविधता और एकता का प्रतीक बनेगी. रेलवे का यह कदम उन बुजुर्गों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है, जिन्हें अब तीर्थयात्रा या अपनों से मिलने के लिए बार-बार गाड़ियाँ बदलने के कष्ट से मुक्ति मिल जाएगी.

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