भारतीय रेलवे में 10 वर्षों के दौरान रेल दुर्घटनाओं में 90% की आई ऐतिहासिक कमी, सरकार ने बताया सुरक्षा सुधार का रोडमैप

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10 वर्षों में रेल सुरक्षा का बदला परिदृश्य: दुर्घटनाओं में 90% की गिरावट

भारतीय रेल नेटवर्क में पिछले एक दशक में व्यापक बदलाव और आधुनिकीकरण देखा गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में रेल दुर्घटनाओं में 90 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां एक समय ट्रेनों के पटरी से उतरने (Derailment), आमने-सामने की टक्कर और समपार फाटक दुर्घटनाओं की खबरें आम हुआ करती थीं, वहीं अब रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में बुनियादी सुधारों और नई तकनीकों के प्रयोग से यह संख्या अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है।

रेल हादसों को रोकने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम

सरकार ने भारतीय रेल को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा रणनीति अपनाई है। दुर्घटनाओं को 90% तक कम करने के पीछे निम्नलिखित तकनीकी एवं अवसंरचनात्मक सुधार मुख्य कारक रहे हैं:

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  • मानवरहित समपार फाटकों (UMLCs) का खात्मा: ब्रॉड गेज नेटवर्क से सभी मानवरहित लेवल क्रॉसिंग को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इनकी जगह रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) का निर्माण किया गया, जिससे क्रासिंग हादसों में भारी कमी आई।
  • स्वदेशी ‘कवच’ प्रणाली का क्रियान्वयन: ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम ‘कवच’ (Kavach) को तेजी से इंस्टॉल किया जा रहा है। यह तकनीक ट्रेन चालकों द्वारा सिग्नल ओवरशूट करने या विपरीत दिशा से आ रही ट्रेन की स्थिति में ऑटोमैटिक ब्रेक लगाकर टक्कर को रोकती है।
  • LHB कोचों का तेजी से उपयोग: पुराने पारंपरिक ICF कोचों को बदलकर सुरक्षित Linke Hofmann Busch (LHB) कोचों की तैनाती की जा रही है। LHB कोचों में एंटी-क्लाइंबिंग (Anti-climbing) फीचर्स होते हैं, जो हादसे के वक्त डिब्बों को एक-दूसरे पर चढ़ने से रोकते हैं।
  • ट्रैक नवीनीकरण एवं अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग: पटरियों की सेहत सुधारने के लिए नियमित रूप से ट्रैक रिन्यूअल किया जा रहा है। पटरियों के भीतर की सूक्ष्म दरारों का पता लगाने के लिए अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्टर्स (USFD) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष (RRSK): रेल सुरक्षा कार्यों के लिए समर्पित 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ‘राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष’ (RRSK) का गठन किया गया, जिसके तहत सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं के लिए निरंतर धन आबंटित किया जा रहा है।
  • फॉग पास डिवाइस (Fog PASS): कोहरे के मौसम में दृश्यता कम होने पर लोको पायलटों की सहायता के लिए जीपीएस आधारित ‘फॉग पास’ उपकरण दिए गए हैं, जो चालक को आने वाले सिग्नल और क्रासिंग की पूर्व सूचना देते हैं।

आंकड़ों की ज़बानी: मिलियन ट्रेन किलोमीटर पर हादसों की दर घटी

रेल मंत्रालय के सुरक्षा मानकों के अनुसार, प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर (Million Train Kilometres) में होने वाली परिणामी रेल दुर्घटनाओं (Consequential Train Accidents) का सूचकांक रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। साल 2013-14 की तुलना में 2023-24 तक यह आंकड़ा काफी हद तक नियंत्रित किया जा चुका है। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम को आधुनिक बनाकर स्टेशनों पर मैन्युअल गलतियों के कारण होने वाले हादसों को भी रोका जा रहा है।

यात्रियों के लिए सहायता एवं सूचना तंत्र

भारतीय रेलवे यात्रियों से अपील करती है कि वे अपनी यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए अधिकृत रेलवे सूचना प्रणालियों का उपयोग करें:

  • रेल मदद (RailMadad): यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति, सुरक्षा संबंधी चिंता या शिकायत के लिए ‘रेल मदद App’ या हेल्पलाइन नंबर 139 पर संपर्क करें।
  • नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम (NTES): अपनी ट्रेन की लाइव रनिंग स्थिति और समय सारणी जानने के लिए NTES ऐप या पोर्टल का उपयोग करें।
  • रेलवे सुरक्षा नियम: पटरियां पार न करें, केवल फुट ओवर ब्रिज (FOB) का प्रयोग करें और चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का प्रयास न करें।

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