सकरी और रैयाम चीनी मिल चालू करने को लेकर बिहार सरकार का बड़ा फैसला, IPL करेगी संचालन
पटना / मधुबनी / दरभंगा। बिहार सरकार ने मिथिलांचल के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को बड़ी सौगात देते हुए मधुबनी जिले की सकरी और दरभंगा जिले की रैयाम में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 29 जुलाई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई।
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, सकरी और रैयाम की बंद पड़ी चीनी मिलों की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिल तथा गन्ने के उपोत्पादों (by-products) पर आधारित अन्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इस पूरी परियोजना की स्थापना और संचालन का जिम्मा इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL), नई दिल्ली को सौंपा गया है।
प्रोजेक्ट लागत की 40% राशि देगी सरकार बैठक के बाद जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सहकारिता विभाग के इस प्रस्ताव के तहत बैंक मूल्यांकन रिपोर्ट (Bank Evaluation Report) के आधार पर स्वीकृत परियोजना लागत की 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान करेगी।
किसानों और युवाओं को मिलेगा बड़ा फायदा सकरी और रैयाम चीनी मिलों के पुनरुद्धार से उत्तर बिहार, खासकर मधुबनी, दरभंगा और आसपास के जिलों के गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। मिलों के चालू होने और बाय-प्रोडक्ट इकाइयों के स्थापित होने से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
मिथिलांचल के विकास को लगी पंख: 6 महीने में 4 लाख से ज्यादा यात्री
उत्तर बिहार के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले दरभंगा हवाई अड्डे (Darbhanga Airport) ने सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों के दौरान दरभंगा एयरपोर्ट से 4 लाख से अधिक यात्रियों ने हवाई सफर किया है। उड़ान योजना (UDAN Scheme) के तहत शुरू हुआ यह हवाई अड्डा देश के सबसे सफल क्षेत्रीय हवाई अड्डों में से एक बनकर उभरा है, जिसने मिथिलांचल की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।
इन जिलों के यात्रियों को मिल रहा सीधा फायदा
दरभंगा एयरपोर्ट की इस शानदार सफलता का सीधा लाभ केवल दरभंगा जिले तक सीमित नहीं है। इससे आसपास के कई जिलों के प्रवासियों और व्यापारियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों की यात्रा करने में अभूतपूर्व सुगमता मिली है। मुख्य रूप से लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं:
दरभंगा और मधुबनी: स्थानीय निवासियों और मखाना व मधुबनी पेंटिंग के कारोबारियों के लिए समय की भारी बचत।
समस्तीपुर और बेगूसराय: औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए तेज व सुगम परिवहन।
सीतामढ़ी, सहरसा और सुपौल: सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को अब पटना जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
दरभंगा एयरपोर्ट की प्रमुख उपलब्धियां और आंकड़े
यात्री संख्या: पिछले 6 माह में 4,00,000+ से अधिक यात्रियों का आवागमन।
प्रमुख रूट: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे मेट्रो शहरों के लिए नियमित सीधी उड़ानें।
उड़ान योजना की सफलता: ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (UDAN) के तहत देश में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला एयरपोर्ट।
आर्थिक गति: मिथिलांचल के पर्यटन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को मिला बड़ा प्रोत्साहन।
सुविधाओं में विस्तार और रनवे का सुदृढ़ीकरण
यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए दरभंगा एयरपोर्ट पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की ओर से बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया जा रहा है। नए टर्मिनल भवन का निर्माण, नाइट लैंडिंग सुविधा और रनवे के विस्तार जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, ताकि आने वाले समय में उड़ानों की संख्या और बढ़ाई जा सके।
नई दिल्ली/काठमांडू: भारत और नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। काठमांडू में आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में भारत और नेपाल के अधिकारियों ने अयोध्या और जनकपुर के बीच सीधी यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए इन दोनों पवित्र शहरों की यात्रा सुगम हो जाएगी।
इस महत्वपूर्ण परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए दोनों देशों के रेलवे अधिकारी अब ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस रेल सेवा के शुरू होने से प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या और माता सीता की जन्मस्थली जनकपुर के बीच की दूरियां सिमट जाएंगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की संभावना है।
बैठक में केवल अयोध्या-जनकपुर रूट ही नहीं, बल्कि अन्य रणनीतिक रेल परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें रक्सौल-काठमांडू ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का ‘फाइनल लोकेशन सर्वे’ (FLS) और जयनगर-बिजलपुरा-बरदीबास रेल प्रोजेक्ट के काम में तेजी लाने का निर्णय लिया गया है। ये परियोजनाएं दोनों देशों के बीच व्यापार और परिवहन के आधुनिक तंत्र को स्थापित करने में सहायक होंगी।
भारतीय दूतावास की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन सभी रेल परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सीमा-पार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। इसके अलावा, भारत नेपाल के ‘ईस्ट-वेस्ट रेलवे लिंक’ को तकनीकी विशेषज्ञता भी प्रदान करेगा, जिससे नेपाल के आंतरिक बुनियादी ढांचे को आधुनिक मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल नेटवर्क न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक होगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत की यह पहल दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय विकास और मित्रता के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल नेटवर्क न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक होगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत की यह पहल दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय विकास और मित्रता के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
मिथिला की हर खबर, सबसे पहले आप तक: मिथिला क्षेत्र और सीमावर्ती रेलवे परियोजनाओं से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट के लिए देखते रहें ‘स्टार मिथिला न्यूज़’। हम आप तक पहुँचाते हैं सटीक और विश्वसनीय खबरें, सीधे ज़मीनी स्तर से।
उत्तर बिहार के रेल यात्रियों के लिए एक बेहद सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आ रही है। पूर्व मध्य रेल (ECR) द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, क्षेत्र की अत्यंत लोकप्रिय और प्रतिष्ठित ट्रेन संख्या 12557/12558 मुजफ्फरपुर-आनंद विहार टर्मिनल सप्त क्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस का विस्तार अब दरभंगा (DBG) तक करने की योजना पर गंभीरता से काम शुरू हो गया है।
रेलवे बोर्ड के निर्देशों के बाद हाजीपुर मुख्यालय ने समस्तीपुर रेल मंडल को पत्र लिखकर इस विस्तार की व्यवहार्यता (Feasibility) और समय-सारणी की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय से मिथिलांचल के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि यह ट्रेन न केवल अपनी गति बल्कि अपनी विश्वसनीयता के लिए भी जानी जाती है।
इस विस्तार योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए रेलवे प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। आधिकारिक सूचना के मुताबिक, मुख्य यात्री परिचालन प्रबंधक (CPTM) ने वरीय मंडल परिचालन प्रबंधक (Sr. DOM) समस्तीपुर को इस मामले को ‘अत्यधिक महत्वपूर्ण’ श्रेणी में रखने को कहा है।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि दरभंगा तक ट्रेन विस्तार के लिए परिचालन संबंधी सभी पहलुओं और समय की उपलब्धता की जांच जल्द से जल्द पूरी कर अपनी सहमति रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए। रिपोर्ट मिलते ही इसे अंतिम मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड को भेज दिया जाएगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो जल्द ही दरभंगा से दिल्ली के बीच एक और शानदार रेल सेवा उपलब्ध होगी।
सप्त क्रांति एक्सप्रेस का दरभंगा तक विस्तार होना इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। वर्तमान में दरभंगा और आसपास के जिलों के यात्रियों को इस ट्रेन को पकड़ने के लिए मुजफ्फरपुर तक का लंबा सफर तय करना पड़ता है, लेकिन विस्तार के बाद उन्हें सीधे अपने शहर से ही दिल्ली तक की सुगम यात्रा मिल सकेगी।
इससे न केवल यात्रियों के समय और धन की बचत होगी, बल्कि दरभंगा स्टेशन पर यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होने की उम्मीद है। रेलवे के इस सकारात्मक रुख से साफ है कि सरकार और प्रशासन मिथिलांचल की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।
भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के मौसम निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 14 मार्च 2026 को जारी एक आधिकारिक आपूर्ति आदेश के अनुसार, केंद्र सरकार ने लगभग 340 करोड़ रुपये की लागत से देश भर में नए डॉप्लर वेदर रडार स्थापित करने का निर्णय लिया है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पूरे देश में कुल 14 शक्तिशाली C-Band और 18 X-Band रडार लगाए जाएंगे। बिहार के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 14 चुनिंदा स्थानों में उत्तर बिहार के प्रमुख शहर दरभंगा का नाम भी शामिल है, जहाँ यह आधुनिक तकनीक वाला रडार स्थापित किया जाएगा।
दरभंगा में लगने वाला यह C-Band डॉप्लर रडार अपनी श्रेणी में बेहद शक्तिशाली माना जाता है, जो लगभग 250 से 400 किलोमीटर के दायरे में मौसम की हर छोटी-बड़ी हलचल को पकड़ने में सक्षम है। इस रडार के चालू होने से न केवल दरभंगा, बल्कि मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी और सहरसा सहित पूरे मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र में मौसम की सटीक जानकारी समय रहते मिल सकेगी।
विशेष रूप से मानसून के दौरान होने वाली भारी बारिश, अचानक आने वाले चक्रवाती तूफान, ओलावृष्टि और आसमानी बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी अब कई घंटे पहले जारी की जा सकेगी, जिससे जान-माल के नुकसान को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
यह परियोजना मेसर्स डेटा पैटर्न्स (इंडिया) लिमिटेड द्वारा कार्यान्वित की जा रही है, जिसे उपकरणों की आपूर्ति के साथ-साथ अगले 10 वर्षों तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। उत्तर बिहार जैसे बाढ़ और मौसम की अनिश्चितता वाले संवेदनशील क्षेत्र के लिए यह रडार एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
वर्तमान में पटना और पूर्णिया जैसे शहरों में पहले से रडार सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन दरभंगा में इस नए और उन्नत C-Band रडार के लगने से क्षेत्रीय स्तर पर मौसम विभाग की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इससे न केवल आम नागरिकों को सुविधा होगी, बल्कि किसानों को भी अपनी फसलों के प्रबंधन के लिए सटीक मौसम पूर्वानुमान प्राप्त हो सकेगा।
हाजीपुर/समस्तीपुर: बिहार के रेल नेटवर्क और बुनियादी ढांचे में एक युगांतरकारी बदलाव होने जा रहा है। पूर्व मध्य रेलवे (ECR) मुख्यालय, हाजीपुर ने मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र के रेल यात्रियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय की घोषणा की है। समस्तीपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले छह प्रमुख रेलवे स्टेशनों के नाम में अब आधिकारिक रूप से “जंक्शन” शब्द जोड़ दिया गया है। रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, यह ऐतिहासिक परिवर्तन 15 मार्च 2026 से पूरे देश के रेल परिचालन रिकॉर्ड और यात्री सूचना प्रणाली में पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। यह निर्णय उत्तर बिहार में रेल पटरियों के विस्तार और नई दिशाओं से जुड़ती कनेक्टिविटी का एक आधिकारिक प्रमाण है।
इस बदलाव की प्रक्रिया के तहत जिन स्टेशनों के स्वरूप में विस्तार किया गया है, उनमें कोसी क्षेत्र का प्रमुख केंद्र सुपौल अब सुपौल जंक्शन के नाम से जाना जाएगा। वहीं, ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु के निर्माण के बाद अपनी रणनीतिक पहचान बनाने वाला सरायगढ़ अब सरायगढ़ जंक्शन कहलाएगा। दरभंगा के समीप स्थित ककरघट्टी और शीशो स्टेशनों को भी नई रेल लाइनों के संगम के कारण अब क्रमशः ककरघट्टी जंक्शन और शीशो जंक्शन के रूप में नई पहचान मिली है। इसी कड़ी में, व्यापारिक और भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हसनपुर रोड को अब हसनपुर रोड जंक्शन कहा जाएगा। साथ ही, जगत जननी मां जानकी की पावन जन्मभूमि सीतामढ़ी को भी अब आधिकारिक तौर पर सीतामढ़ी जंक्शन का गौरवपूर्ण नाम प्राप्त हो गया है।
रेलवे की तकनीकी शब्दावली में किसी भी स्टेशन को ‘जंक्शन’ का दर्जा तब दिया जाता है, जब वहां से कम से कम तीन अलग-अलग दिशाओं के लिए रेल मार्ग निकलते हों। पिछले कुछ वर्षों में, केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के विशेष प्रयासों से इन क्षेत्रों में अमान परिवर्तन और नई लाइनों का जाल बिछाया गया है। उदाहरण के तौर पर, सरायगढ़ और सुपौल अब केवल स्थानीय कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये निर्मली, राघोपुर और सहरसा जैसी महत्वपूर्ण दिशाओं को जोड़ने वाले बड़े ‘इंटरचेंज’ बन चुके हैं। सीतामढ़ी की स्थिति भी रक्सौल, दरभंगा और मुजफ्फरपुर रेल खंडों के मिलन बिंदु के रूप में सुदृढ़ हुई है। यही कारण है कि इन स्टेशनों को ‘जंक्शन’ का दर्जा देना न केवल तकनीकी आवश्यकता थी, बल्कि यह यात्रियों की सुविधा के लिए भी अनिवार्य हो गया था।
15 मार्च 2026 से प्रभावी होने वाले इस बदलाव का सीधा असर रेलवे की डिजिटल और भौतिक व्यवस्थाओं पर पड़ेगा। भारतीय रेलवे के ऑनलाइन टिकट बुकिंग पोर्टल (IRCTC) और पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) पर इन स्टेशनों के नाम अपडेट कर दिए जाएंगे। स्टेशनों के मुख्य द्वार पर लगे पीले साइनबोर्ड, प्लेटफॉर्म की पट्टिकाएं और स्वचालित उद्घोषणा प्रणाली (PA System) को भी नए नामों के अनुरूप बदल दिया जाएगा। अब जब यात्री इन स्टेशनों पर पहुंचेंगे, तो उन्हें “जंक्शन पर आपका स्वागत है” जैसी आधिकारिक घोषणाएं सुनाई देंगी, जो स्थानीय लोगों के लिए गर्व का विषय होंगी।
विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि ‘जंक्शन’ का दर्जा मिलने से इन क्षेत्रों में विकास की नई लहर आएगी। जंक्शन बनने के बाद इन स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव की प्राथमिकता बढ़ जाती है और भविष्य में लंबी दूरी की नई एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन की संभावना भी प्रबल हो जाती है। यह न केवल यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाएगा, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा। विशेषकर सीतामढ़ी और सुपौल जैसे जिलों के लिए यह एक नई पहचान लेकर आएगा, जिससे ये शहर राष्ट्रीय रेल मानचित्र पर और अधिक मजबूती से उभरेंगे।
समस्तीपुर रेल मंडल के अधिकारियों ने इस संबंध में सभी तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के निर्देशन में सिग्नलिंग विभाग और स्टेशन मास्टर कार्यालयों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यह बदलाव इस बात का प्रतीक है कि मिथिलांचल और कोसी की रेल परियोजनाएं अब अपने पूर्ण स्वरूप की ओर बढ़ रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता ने रेलवे के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे नए युग की शुरुआत बताया है, जो बिहार के आर्थिक और सामाजिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
भैरव स्थान थाना क्षेत्र के रैयाम ग्राम सहित संपूर्ण मिथिलांचल के लिए एक युग का अंत हो गया है, जब 24 फरवरी 2026 को अंग्रेजी साहित्य के प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर रुद्रकांत झा का उनके पैतृक निवास पर निधन हो गया। 1 सितंबर 1942 को जन्मे प्रोफेसर झा का जीवन ज्ञान की साधना और सामाजिक सुधार का एक अद्भुत संगम था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के पश्चात झंझारपुर के दीप कॉलेज से अपने गौरवशाली शिक्षण करियर की शुरुआत की थी।
इसके उपरांत उन्होंने असम के ऐतिहासिक माजुली द्वीप स्थित माजुली कॉलेज में दशकों तक अपनी सेवाएं दीं, जहाँ उनके पढ़ाने की शैली और अंग्रेजी साहित्य पर उनकी पकड़ ने उन्हें विद्यार्थियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बना दिया। 31 अगस्त 2002 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका शिक्षा के प्रति लगाव कम नहीं हुआ और वे निरंतर समाज को नई दिशा देने में लगे रहे।
प्रोफेसर झा केवल एक कुशल शिक्षक ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी समाजसेवी भी थे। महिला शिक्षा के प्रति उनकी संवेदनशीलता का प्रमाण तब मिला जब उन्होंने असम के कमलाबाड़ी में बालिकाओं के लिए विद्यालय की स्थापना हेतु अपनी निजी भूमि सहर्ष दान कर दी। शिक्षा के साथ-साथ उनकी गहरी आध्यात्मिक आस्था भी उनके व्यक्तित्व का मुख्य आधार थी। उन्होंने अपने पैतृक गांव रैयाम में पूर्णा पोखर के तट पर संकट मोचन हनुमान मंदिर का भव्य निर्माण करवाया, जो आज आस्था का प्रमुख केंद्र है।
इसके अतिरिक्त, गांव के विकास में रुचि लेते हुए उन्होंने सार्वजनिक घाटों के निर्माण और शिव मंदिर की स्थापना में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। उनका जीवन सादगी और उच्च विचारों का जीवंत उदाहरण था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, पूर्व शिष्यों और ग्रामीणों का उनके निवास पर तांता लग गया। लोगों ने उन्हें एक ऐसे मनीषी के रूप में याद किया जिन्होंने असम और बिहार के बीच शिक्षा व संस्कृति का एक मजबूत सेतु बनाया था। उनके जाने से शिक्षा जगत और सामाजिक क्षेत्र में एक ऐसी रिक्तता पैदा हो गई है जिसे भरना अत्यंत कठिन है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रोफेसर झा का योगदान केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने कार्यों से हजारों लोगों के जीवन को प्रकाशित किया। इस दुःखद घड़ी में ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और उनके शोक संतप्त परिवार को यह अपार कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की जा रही है।
दरभंगा: उत्तर बिहार के निवासियों के लिए दरभंगा एयरपोर्ट किसी सपने से कम नहीं है। हाल ही में धुंध और कोहरे के कारण विमानों की लैंडिंग में बाधा आने से काफी असुविधा हुई थी, जिसके बाद नाइट लैंडिंग की मांग जोर पकड़ने लगी। अब अच्छी खबर यह है कि एयरपोर्ट पर CAT-II अप्रोच लाइटिंग सिस्टम का इंस्टालेशन तेजी से चल रहा है, जो रात के समय और कम विजिबिलिटी में भी सुरक्षित उड़ानें सुनिश्चित करेगा।
कोहरे से निपटने के लिए तैयार हो रहा एयरपोर्ट
बार-बार फ्लाइट डायवर्जन की समस्या से जूझ रहे दरभंगा एयरपोर्ट को जल्द राहत मिलने वाली है। अधिकारियों के मुताबिक, नाइट लैंडिंग और कोहरे में विमान संचालन के लिए आवश्यक लाइटिंग सिस्टम का कार्य जनवरी 2026 तक समाप्त होने की संभावना है। जल संसाधन विभाग से एनओसी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट में तेजी आई है। रनवे के आसपास करीब 900 वर्ग मीटर क्षेत्र में यह सिस्टम स्थापित किया जा रहा है, और अधिकांश काम पूरा हो चुका है। इससे सर्दियों में उड़ानों के रद्द होने या डायवर्ट होने की दिक्कत काफी कम हो जाएगी।
दरभंगा एयरपोर्ट पर कैट-2 का काम अंतिम चरण में
ऑपरेशनल समय बढ़ेगा, यात्रियों को मिलेगी सुविधा
CAT-II सिस्टम के चालू होने के साथ एयरपोर्ट का वॉच आवर बढ़ाया जाएगा, जिससे रात्रिकालीन उड़ानें संभव होंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कनेक्टिविटी भी मजबूत बनेगी। यात्री अब रात में भी आसानी से सफर कर सकेंगे।
दरभंगा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन
बिजली व्यवस्था को मिलेगी नई ताकत
दरभंगा एयरपोर्ट के विकास को और मजबूती देने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BSPTCL) ने एक महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते से एयरपोर्ट की बिजली सप्लाई अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित हो जाएगी। प्रमुख कदमों में शामिल हैं:
GSS गंगवारा में 33 केवी का नया बे स्थापित करना।
गंगवारा से नए टर्मिनल तक नई पावर लाइन का निर्माण।
यह पहल एयरपोर्ट की समग्र क्षमता को बढ़ाएगी और यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करेगी।
नया टर्मिनल भवन ले रहा आकार, आधुनिक सुविधाओं से लैस
दरभंगा एयरपोर्ट पर निर्माणाधीन नया टर्मिनल अब अपनी झलक दिखाने लगा है। पहले फेज में 51,800 वर्ग मीटर क्षेत्र में बन रहा यह टर्मिनल दूसरे फेज के बाद 1,00,000 वर्ग मीटर से ज्यादा फैल जाएगा। इसकी मुख्य विशेषताएं:
प्रतिदिन 8,000 से अधिक यात्रियों को हैंडल करने की क्षमता।
रोजाना 50 से ज्यादा फ्लाइट ऑपरेशन।
सालाना 30 लाख यात्रियों की हैंडलिंग।
टर्मिनल में ग्राउंड फ्लोर पर अराइवल और पहली मंजिल पर डिपार्चर की व्यवस्था होगी। यहां 40 चेक-इन काउंटर, 14 सेल्फ चेक-इन कियोस्क, 12 ऑटोमैटिक ट्रे रिट्रीवल सिस्टम, 30 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, 4 कन्वेयर बेल्ट और 5 एयरोब्रिज जैसी सुविधाएं होंगी।
एप्रन और टैक्सीवे का काम भी तेज गति से
एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 7 कोड-सी एयरक्राफ्ट के लिए नया एप्रन और दो लिंक टैक्सीवे तैयार हो रहे हैं। नए टर्मिनल के पास मल्टी-लेवल पार्किंग भी बनेगी। यह काम मई 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य है, जिससे अधिक विमानों को पार्क करने की सुविधा मिलेगी और रनवे पर देरी कम होगी।
सितंबर 2026 तक पूरा होगा पूरा प्रोजेक्ट
कुल 912 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह टर्मिनल सितंबर 2026 तक तैयार हो जाएगा। नाइट लैंडिंग, नया एप्रन और आधुनिक टर्मिनल के साथ दरभंगा एयरपोर्ट बिहार का प्रमुख हवाई केंद्र बनने की राह पर है। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक विकास के नए अवसर खुलेंगे। स्थानीय निवासी इस बदलाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
नई दिल्ली/पटना, 6 दिसंबर 2025: यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने पटना और दरभंगा से आनंद विहार टर्मिनल के बीच स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू करने का फैसला किया है। ये स्पेशल ट्रेनें 6 दिसंबर से 9 दिसंबर 2025 तक चलेंगी, जिससे दिल्ली और बिहार के बीच यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ये ट्रेनें त्योहारों और बढ़ती मांग को देखते हुए चलाई जा रही हैं।
ट्रेनों का विस्तृत शेड्यूल इस प्रकार है:-
ट्रेन नंबर 02309 पटना-आनंद विहार स्पेशल: यह ट्रेन पटना से 6 और 8 दिसंबर को रात 8:30 बजे रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 3:00 बजे आनंद विहार टर्मिनल पहुंचेगी।
ट्रेन नंबर 02310 आनंद विहार-पटना स्पेशल: यह ट्रेन आनंद विहार से 7 और 9 दिसंबर को शाम 7:00 बजे निकलेगी और अगले दिन दोपहर 2:00 बजे पटना पहुंचेगी।
ट्रेन नंबर 02395 पटना-आनंद विहार स्पेशल: पटना से 7 दिसंबर को रात 8:30 बजे चलकर अगले दिन दोपहर 3:00 बजे आनंद विहार पहुंचेगी।
ट्रेन नंबर 02396 आनंद विहार-पटना स्पेशल: आनंद विहार से 8 दिसंबर को शाम 7:00 बजे रवाना होकर अगले दिन दोपहर 2:00 बजे पटना पहुंचेगी।
ट्रेन नंबर 05563 दरभंगा-आनंद विहार स्पेशल: दरभंगा से 7 दिसंबर को शाम 6:15 बजे निकलकर अगले दिन रात 9:15 बजे आनंद विहार पहुंचेगी।
ट्रेन नंबर 05564 आनंद विहार-दरभंगा स्पेशल: आनंद विहार से 9 दिसंबर को रात 12:05 बजे चलकर उसी दिन रात 11:00 बजे दरभंगा पहुंचेगी।
नई दिल्ली, 5 दिसंबर 2025: दरभंगा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद गोपाल जी ठाकुर ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से संसद भवन स्थित उनके कक्ष में आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान सांसद ठाकुर ने मंत्री जी को मिथिला परंपरा के अनुसार पाग और चादर से सम्मानित किया। मुलाकात में मुख्य रूप से मिथिला की हृदयस्थली दरभंगा में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (एमएमएलपी) की स्थापना की मांग उठाई गई, जो क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति प्रदान कर सकती है।
सांसद गोपाल जी ठाकुर ने बताया कि दरभंगा में पहले से ही कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें दरभंगा एयरपोर्ट, राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (एनएच-27), आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे शामिल हैं। साथ ही, विश्वस्तरीय दरभंगा रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य प्रगति पर है और न्यू दरभंगा स्टेशन पहले से ही बन चुका है। इसके अलावा, दरभंगा के निकट पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित हैं। यदि इन सुविधाओं के साथ एमएमएलपी का निर्माण होता है, तो दरभंगा सहित पूरे मिथिला क्षेत्र का तीव्र विकास सुनिश्चित होगा।
मुलाकात के दौरान दरभंगा शहर में यातायात जाम की समस्या पर भी विशेष ध्यान दिया गया। सांसद ठाकुर ने मंत्री जी को केंद्रीय सड़क एवं बुनियादी ढांचा कोष (सीआरआईएफ) की सेतु बंधन योजना के तहत दोनार गुमती, पंडासराय गुमती, दिल्ली मोड़, बेला गुमती सहित अन्य स्थानों पर रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) निर्माण के लिए दरभंगा वासियों की ओर से धन्यवाद दिया। यह कदम शहरवासियों को जाम से मुक्ति दिलाने में सहायक साबित होगा।
चर्चा में भारतमाला परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आमस-दरभंगा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का जिक्र हुआ। साथ ही, दरभंगा में एम्स और एयरपोर्ट के कारण शहर को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर पर विचार-विमर्श किया गया। शहर के विस्तारीकरण को देखते हुए आउटर रिंग रोड निर्माण, रामनगर आईटीआई से रोसड़ा सड़क, दिल्ली मोड़ से जयनगर सड़क, पटना-पूर्णिया ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का लिंक रोड दरभंगा शहर को देने, सकरी (एनएच-27) से खगड़िया वाया बेनीपुर-बिरौल-कुशेश्वरस्थान (जिसमें धरौड़ा से दरभंगा शहर को लिंक रोड) बनाने, भारतमाला से निर्माणाधीन उच्चैठ भगवती स्थान से महिषी तारा स्थान सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग 31 (बेगूसराय) से राष्ट्रीय राजमार्ग 27 (सकरी) तक फोरलेन सड़क निर्माण तथा प्रस्तावित गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे जैसे मुद्दों पर विस्तार से वार्ता हुई।
मंत्री नितिन गडकरी ने इन प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। यह मुलाकात मिथिला क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगी।