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Darbhanga

  • दरभंगा से दिल्ली-अमृतसर यात्रा करने वालों के लिए जरूरी अपडेट: 13 ट्रेनें बदले हुए मार्ग से चलेंगी

    दरभंगा से दिल्ली-अमृतसर यात्रा करने वालों के लिए जरूरी अपडेट: 13 ट्रेनें बदले हुए मार्ग से चलेंगी

    यदि आप आने वाले दिनों में दरभंगा, जयनगर और उत्तर बिहार से दिल्ली, अमृतसर या अन्य प्रमुख शहरों की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर कैंट और उनौला स्टेशनों के बीच पैच दोहरीकरण का कमीशनिंग कार्य तेजी से चल रहा है। इस तकनीकी और बुनियादी ढांचे के विकास कार्य के चलते रेल यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है।

    नान-इंटरलॉकिंग (NI) कार्य और आगामी 3 सितंबर को निर्धारित रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) के महत्वपूर्ण निरीक्षण के कारण ट्रेनों के परिचालन का शेड्यूल पूरी तरह प्रभावित हो गया है। रेलवे प्रशासन द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, 31 अगस्त से लेकर 4 सितंबर के बीच यात्रियों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इस विकास कार्य के प्रभावस्वरूप इस अवधि में कुल 3 सवारी गाड़ियों को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है, जबकि 13 महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों को उनके निर्धारित मार्ग के बजाय बदले हुए (डायवर्टेड) मार्गों से संचालित किया जाएगा।

    1. पूरी तरह रद्द (Cancelled) की गई ट्रेनें

    रेलवे प्रशासन द्वारा सुरक्षा और कमिशनिंग कार्यों के चलते निम्नलिखित सवारी गाड़ियों को पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है:

    • ट्रेन संख्या 55095 (नरकटियागंज – गोरखपुर कैंट सवारी गाड़ी): 31 अगस्त से 3 सितंबर तक रद्द।
    • ट्रेन संख्या 55098 (गोरखपुर कैंट – नरकटियागंज सवारी गाड़ी): 31 अगस्त से 3 सितंबर तक रद्द।
    • ट्रेन संख्या 55097 (नरकटियागंज – गोरखपुर कैंट सवारी गाड़ी): 1 से 4 सितंबर तक रद्द।

    2. बदले हुए मार्ग (Diverted Routes) से चलने वाली 13 एक्सप्रेस ट्रेनें

    इन ट्रेनों को उनके निर्धारित मार्ग के बजाय वैकल्पिक मार्गों से चलाया जाएगा, जिससे गोरखपुर, बस्ती, गोंडा, सीवान और देवरिया सदर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर इनका ठहराव प्रभावित रहेगा:

    • ट्रेन संख्या 15212 (अमृतसर – दरभंगा जननायक एक्सप्रेस): 1 और 2 सितंबर को रोजा – लखनऊ – बाराबंकी – अयोध्या कैंट – वाराणसी जंक्शन – छपरा ग्रामीण – मुजफ्फरपुर के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 14674 (अमृतसर – जयनगर शहीद एक्सप्रेस): 1 सितंबर को भटनी – मऊ – वाराणसी जंक्शन – अयोध्या कैंट – बाराबंकी के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 14673 (जयनगर – अमृतसर शहीद एक्सप्रेस): 2 और 3 सितंबर को भटनी – मऊ – वाराणसी जंक्शन – अयोध्या कैंट – बाराबंकी के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 13020 (काठगोदाम – हावड़ा बाघ एक्सप्रेस): 1 सितंबर को बाराबंकी – अयोध्या कैंट – वाराणसी जंक्शन – वाराणसी सिटी – मऊ – भटनी के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 13019 (हावड़ा – काठगोदाम बाघ एक्सप्रेस): 2 सितंबर को छपरा – वाराणसी जंक्शन – अयोध्या कैंट – बाराबंकी के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 14617 (पूर्णिया कोर्ट – अमृतसर जनसेवा एक्सप्रेस): 2 और 3 सितंबर को छपरा – वाराणसी जंक्शन – अयोध्या कैंट – बाराबंकी – लखनऊ – रोजा के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 15565 (ललितग्राम – नई दिल्ली वैशाली एक्सप्रेस): 3 सितंबर को छपरा – वाराणसी जंक्शन – अयोध्या कैंट – बाराबंकी के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 15707 (कटिहार – अमृतसर एक्सप्रेस): 1 और 2 सितंबर को छपरा – औंड़िहार – जौनपुर – अयोध्या कैंट – बाराबंकी के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 12565 (दरभंगा – नई दिल्ली बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस): 3 सितंबर को छपरा – वाराणसी जंक्शन – बनारस – प्रयागराज जंक्शन – कानपुर सेंट्रल के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 15904 (चंडीगढ़ – डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस): 2 सितंबर को लखनऊ – सुलतानपुर – वाराणसी जंक्शन – छपरा के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 19725 (खातीपुरा – दरभंगा अमृत भारत एक्सप्रेस): 1 और 2 सितंबर को बाराबंकी – अयोध्या कैंट – शाहगंज – मऊ – भटनी – सीवान – थावे – कप्तानगंज के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 02563 (बरौनी – नई दिल्ली क्लोन स्पेशल): 3 सितंबर को छपरा – औंड़िहार – वाराणसी जंक्शन – बनारस – प्रयागराज जंक्शन – कानपुर सेंट्रल के रास्ते चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 02569 (दरभंगा – नई दिल्ली क्लोन स्पेशल): 3 सितंबर को छपरा – औंड़िहार – वाराणसी जंक्शन – बनारस – प्रयागराज जंक्शन – कानपुर सेंट्रल के रास्ते चलाई जाएगी।

    3. विलंब और पुनर्निर्धारण (Rescheduled & Controlled) से जुड़ी अन्य ट्रेनें

    मार्ग परिवर्तन और कैंसिलेशन के अतिरिक्त कुछ ट्रेनों के समय में भी बदलाव किया गया है:

    • ट्रेन संख्या 55040 (बढ़नी – नरकटियागंज सवारी गाड़ी): 30 अगस्त से 3 सितंबर तक 240 मिनट पुनर्निर्धारित रहेगी।
    • ट्रेन संख्या 15274 (आनंद विहार – रक्सौल सत्याग्रह एक्सप्रेस): 31 अगस्त को 60 मिनट की देरी से पुनर्निर्धारित समय पर चलाई जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 15027 (संबलपुर – गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस): 2 सितंबर को 300 मिनट (5 घंटे) की देरी से पुनर्निर्धारित की जाएगी।
    • ट्रेन संख्या 19038 (बरौनी – बांद्रा टर्मिनस अवध एक्सप्रेस): 3 सितंबर को 300 मिनट (5 घंटे) की देरी से चलाई जाएगी।
    • इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य ट्रेनों को रास्ते में 30 से 60 मिनट तक नियंत्रित (कंट्रोल) करके चलाया जाएगा।

    रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन की अद्यतन स्थिति और बदले हुए रूट की पूरी जानकारी आधिकारिक रेलवे हेल्पलाइन या एनटीईएस (NTES) ऐप के माध्यम से जरूर प्राप्त कर लें, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

  • बिहार को 20 नवंबर को मिलेगी बड़ी सौगात: पीएम मोदी करेंगे सकरी और रैयाम चीनी मिलों का शिलान्यास, जानिए उत्पादन की समय-सीमा

    बिहार को 20 नवंबर को मिलेगी बड़ी सौगात: पीएम मोदी करेंगे सकरी और रैयाम चीनी मिलों का शिलान्यास, जानिए उत्पादन की समय-सीमा

    पटना। बिहार में वर्षों से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों के पुनरुद्धार का इंतजार अब समाप्त होने जा रहा है। आगामी 20 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन दोनों चीनी मिलों के पुनर्स्थापना (पुनरुद्धार) कार्य का औपचारिक शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही, बिहार सरकार ने राज्य में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर भी कार्य की गति तेज कर दी है।

    प्रेस वार्ता में गन्ना उद्योग मंत्री ने दी जानकारी

    सूचना भवन में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राज्य के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने इस निर्णय की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिहार में चीनी उद्योग को फिर से जीवंत और मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह से संकल्पबद्ध है। बंद पड़ी पुरानी मिलों को चालू करने और नई मिलों की स्थापना से बिहार के गन्ना किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर बाजार मिलेगा, उनकी आय में वृद्धि होगी तथा राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे।

    1 से 2 वर्षों में उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य

    प्रेस वार्ता के दौरान विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि 20 नवंबर को शिलान्यास होने के बाद सकरी और रैयाम चीनी मिलों में आगामी एक से दो वर्षों के भीतर चीनी का उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

    मिलों के संचालन के लिए पर्याप्त कच्चा माल (गन्ना) उपलब्ध रहे, इसके लिए सरकार समानांतर रूप से गन्ना उत्पादन क्षेत्र के विस्तार पर विशेष जोर दे रही है। किसानों को अधिक से अधिक भू-भाग पर गन्ने की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि मिल शुरू होते ही आपूर्ति की कोई समस्या न आए।

    ‘सात निश्चय-3’ और ‘समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार’

    यह संपूर्ण पहल बिहार के मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित ‘समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार’ अभियान का प्रमुख हिस्सा है। इस नीति के तहत राज्य में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना के साथ-साथ दशकों से ठप पड़ी पुरानी चीनी मिलों को पुनः चालू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।

    सरकार का मानना है कि इस कदम से बिहार का चीनी उद्योग एक बार फिर से अपनी पुरानी पहचान कायम करेगा और राज्य के समग्र औद्योगिक विकास को एक नई दिशा तथा गति मिलेगी।

  • दरभंगा में स्थापित होगा आधुनिक डेयरी प्लांट : मिथिलांचल में बढ़ेगा दूध-दही का उत्पादन, पशुपालकों की आय में होगा इजाफा

    दरभंगा में स्थापित होगा आधुनिक डेयरी प्लांट : मिथिलांचल में बढ़ेगा दूध-दही का उत्पादन, पशुपालकों की आय में होगा इजाफा

    दरभंगा। मिथिलांचल के प्रमुख केंद्र दरभंगा में जल्द ही दूध और दही का एक बड़ा आधुनिक प्रसंस्करण केंद्र (मॉडर्न डेयरी प्लांट) स्थापित होने जा रहा है। इस संयंत्र के निर्माण से न केवल दरभंगा, बल्कि आसपास के मधुबनी, समस्तीपुर और बेगुसराय जिलों के पशुपालकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। आधुनिक तकनीकों से लैस यह डेयरी प्लांट स्थानीय स्तर पर दूध की खपत और प्रसंस्करण क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा, जिससे किसानों और पशुपालकों की कमाई में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

    आधुनिक सुविधाओं और उच्च तकनीक से लैस होगा प्लांट

    प्रस्तावित डेयरी प्लांट में दूध के संग्रहण, चिलिंग, पाश्चुरीकरण (Pasteurization) और पैकेट बंद दही, लस्सी, मक्खन, पनीर व घी तैयार करने की अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। मिथिलांचल की खान-पान परंपरा में ‘दही-चूड़ा’ का विशेष महत्व है, ऐसे में गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादों की मांग को पूरा करने में यह प्लांट मील का पत्थर साबित होगा।

    किसान और पशुपालकों के लिए प्रमुख फायदे

    • उचित मूल्य और पारदर्शी व्यवस्था: गांव-गांव में दूध संग्रहण केंद्र बनने से पशुपालकों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और दूध की सही कीमत सीधे उनके बैंक खातों में मिलेगी।
    • स्वरोजगार और रोजगार सृजन: डेयरी प्लांट के संचालन, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंँग और वितरण नेटवर्क के माध्यम से सैकड़ों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
    • पशुधन विकास को बढ़ावा: किसानों को उन्नत नस्ल के पशुपालन और वैज्ञानिक तरीके से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
    • ताजा एवं शुद्ध उत्पादों की आपूर्ति: दरभंगा और आसपास के शहरी व ग्रामीण इलाकों में शुद्ध दूध और दही की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

    मिथिलांचल के ग्रामीण अर्थशास्त्र को मिलेगी मजबूती

    माछ और मखाना के क्षेत्र में पहले से ही प्रसिद्ध मिथिलांचल अब दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। दरभंगा में आधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना से क्षेत्र के ग्रामीण अर्थशास्त्र को संबल मिलेगा और कृषि आधारित उद्योगों को नई गति प्राप्त होगी।

  • सकरी और रैयाम की बंद पड़ी चीनी मिलें होंगी पुनर्जीवित, मिथिला के किसानों के लिए ऐतिहासिक सौगात

    सकरी और रैयाम की बंद पड़ी चीनी मिलें होंगी पुनर्जीवित, मिथिला के किसानों के लिए ऐतिहासिक सौगात

    सकरी और रैयाम चीनी मिल चालू करने को लेकर बिहार सरकार का बड़ा फैसला, IPL करेगी संचालन

    पटना / मधुबनी / दरभंगा। बिहार सरकार ने मिथिलांचल के औद्योगिक और कृषि क्षेत्र को बड़ी सौगात देते हुए मधुबनी जिले की सकरी और दरभंगा जिले की रैयाम में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 29 जुलाई को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई

    कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, सकरी और रैयाम की बंद पड़ी चीनी मिलों की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिल तथा गन्ने के उपोत्पादों (by-products) पर आधारित अन्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इस पूरी परियोजना की स्थापना और संचालन का जिम्मा इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL), नई दिल्ली को सौंपा गया है

    प्रोजेक्ट लागत की 40% राशि देगी सरकार बैठक के बाद जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सहकारिता विभाग के इस प्रस्ताव के तहत बैंक मूल्यांकन रिपोर्ट (Bank Evaluation Report) के आधार पर स्वीकृत परियोजना लागत की 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वित्तीय सहायता के रूप में प्रदान करेगी

    किसानों और युवाओं को मिलेगा बड़ा फायदा सकरी और रैयाम चीनी मिलों के पुनरुद्धार से उत्तर बिहार, खासकर मधुबनी, दरभंगा और आसपास के जिलों के गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। मिलों के चालू होने और बाय-प्रोडक्ट इकाइयों के स्थापित होने से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी

  • दरभंगा एयरपोर्ट की ऐतिहासिक परवाज: पिछले 6 महीने में 4 लाख से अधिक यात्रियों ने भरी उड़ान, मिथिलांचल में कनेक्टिविटी को लगे पंख

    दरभंगा एयरपोर्ट की ऐतिहासिक परवाज: पिछले 6 महीने में 4 लाख से अधिक यात्रियों ने भरी उड़ान, मिथिलांचल में कनेक्टिविटी को लगे पंख

    मिथिलांचल के विकास को लगी पंख: 6 महीने में 4 लाख से ज्यादा यात्री

    उत्तर बिहार के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले दरभंगा हवाई अड्डे (Darbhanga Airport) ने सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों के दौरान दरभंगा एयरपोर्ट से 4 लाख से अधिक यात्रियों ने हवाई सफर किया है। उड़ान योजना (UDAN Scheme) के तहत शुरू हुआ यह हवाई अड्डा देश के सबसे सफल क्षेत्रीय हवाई अड्डों में से एक बनकर उभरा है, जिसने मिथिलांचल की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।

    इन जिलों के यात्रियों को मिल रहा सीधा फायदा

    दरभंगा एयरपोर्ट की इस शानदार सफलता का सीधा लाभ केवल दरभंगा जिले तक सीमित नहीं है। इससे आसपास के कई जिलों के प्रवासियों और व्यापारियों को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों की यात्रा करने में अभूतपूर्व सुगमता मिली है। मुख्य रूप से लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं:

    • दरभंगा और मधुबनी: स्थानीय निवासियों और मखाना व मधुबनी पेंटिंग के कारोबारियों के लिए समय की भारी बचत।
    • समस्तीपुर और बेगूसराय: औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों के लिए तेज व सुगम परिवहन।
    • सीतामढ़ी, सहरसा और सुपौल: सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों को अब पटना जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

    दरभंगा एयरपोर्ट की प्रमुख उपलब्धियां और आंकड़े

    • यात्री संख्या: पिछले 6 माह में 4,00,000+ से अधिक यात्रियों का आवागमन।
    • प्रमुख रूट: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे मेट्रो शहरों के लिए नियमित सीधी उड़ानें।
    • उड़ान योजना की सफलता: ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (UDAN) के तहत देश में शीर्ष प्रदर्शन करने वाला एयरपोर्ट।
    • आर्थिक गति: मिथिलांचल के पर्यटन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को मिला बड़ा प्रोत्साहन।

    सुविधाओं में विस्तार और रनवे का सुदृढ़ीकरण

    यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए दरभंगा एयरपोर्ट पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की ओर से बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया जा रहा है। नए टर्मिनल भवन का निर्माण, नाइट लैंडिंग सुविधा और रनवे के विस्तार जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है, ताकि आने वाले समय में उड़ानों की संख्या और बढ़ाई जा सके।

  • भारत-नेपाल रेल कनेक्टिविटी: अयोध्या और जनकपुर के बीच सीधी ट्रेन सेवा की तैयारी, तीर्थयात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

    भारत-नेपाल रेल कनेक्टिविटी: अयोध्या और जनकपुर के बीच सीधी ट्रेन सेवा की तैयारी, तीर्थयात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

    नई दिल्ली/काठमांडू: भारत और नेपाल के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। काठमांडू में आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में भारत और नेपाल के अधिकारियों ने अयोध्या और जनकपुर के बीच सीधी यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए इन दोनों पवित्र शहरों की यात्रा सुगम हो जाएगी।

    इस महत्वपूर्ण परियोजना को क्रियान्वित करने के लिए दोनों देशों के रेलवे अधिकारी अब ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ (SOP) को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस रेल सेवा के शुरू होने से प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या और माता सीता की जन्मस्थली जनकपुर के बीच की दूरियां सिमट जाएंगी, जिससे धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    बैठक में केवल अयोध्या-जनकपुर रूट ही नहीं, बल्कि अन्य रणनीतिक रेल परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें रक्सौल-काठमांडू ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का ‘फाइनल लोकेशन सर्वे’ (FLS) और जयनगर-बिजलपुरा-बरदीबास रेल प्रोजेक्ट के काम में तेजी लाने का निर्णय लिया गया है। ये परियोजनाएं दोनों देशों के बीच व्यापार और परिवहन के आधुनिक तंत्र को स्थापित करने में सहायक होंगी।

    भारतीय दूतावास की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इन सभी रेल परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सीमा-पार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। इसके अलावा, भारत नेपाल के ‘ईस्ट-वेस्ट रेलवे लिंक’ को तकनीकी विशेषज्ञता भी प्रदान करेगा, जिससे नेपाल के आंतरिक बुनियादी ढांचे को आधुनिक मजबूती मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल नेटवर्क न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक होगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत की यह पहल दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय विकास और मित्रता के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह रेल नेटवर्क न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक होगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास और व्यापारिक गतिविधियों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत की यह पहल दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय विकास और मित्रता के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

    मिथिला की हर खबर, सबसे पहले आप तक: मिथिला क्षेत्र और सीमावर्ती रेलवे परियोजनाओं से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट के लिए देखते रहें ‘स्टार मिथिला न्यूज़’। हम आप तक पहुँचाते हैं सटीक और विश्वसनीय खबरें, सीधे ज़मीनी स्तर से।

    — स्टार मिथिला न्यूज़ डेस्क

  • दरभंगा को मिलेगी सप्तक्रान्ति सुपरफास्ट एक्सप्रेस, मुजफ्फरपुर से दरभंगा विस्तार की तैयारी शुरू

    दरभंगा को मिलेगी सप्तक्रान्ति सुपरफास्ट एक्सप्रेस, मुजफ्फरपुर से दरभंगा विस्तार की तैयारी शुरू

    उत्तर बिहार के रेल यात्रियों के लिए एक बेहद सुखद और उत्साहजनक खबर सामने आ रही है। पूर्व मध्य रेल (ECR) द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, क्षेत्र की अत्यंत लोकप्रिय और प्रतिष्ठित ट्रेन संख्या 12557/12558 मुजफ्फरपुर-आनंद विहार टर्मिनल सप्त क्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस का विस्तार अब दरभंगा (DBG) तक करने की योजना पर गंभीरता से काम शुरू हो गया है।

    रेलवे बोर्ड के निर्देशों के बाद हाजीपुर मुख्यालय ने समस्तीपुर रेल मंडल को पत्र लिखकर इस विस्तार की व्यवहार्यता (Feasibility) और समय-सारणी की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय से मिथिलांचल के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है, क्योंकि यह ट्रेन न केवल अपनी गति बल्कि अपनी विश्वसनीयता के लिए भी जानी जाती है।

    इस विस्तार योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए रेलवे प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। आधिकारिक सूचना के मुताबिक, मुख्य यात्री परिचालन प्रबंधक (CPTM) ने वरीय मंडल परिचालन प्रबंधक (Sr. DOM) समस्तीपुर को इस मामले को ‘अत्यधिक महत्वपूर्ण’ श्रेणी में रखने को कहा है।

    पत्र में स्पष्ट किया गया है कि दरभंगा तक ट्रेन विस्तार के लिए परिचालन संबंधी सभी पहलुओं और समय की उपलब्धता की जांच जल्द से जल्द पूरी कर अपनी सहमति रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाए। रिपोर्ट मिलते ही इसे अंतिम मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड को भेज दिया जाएगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो जल्द ही दरभंगा से दिल्ली के बीच एक और शानदार रेल सेवा उपलब्ध होगी।

    सप्त क्रांति एक्सप्रेस का दरभंगा तक विस्तार होना इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। वर्तमान में दरभंगा और आसपास के जिलों के यात्रियों को इस ट्रेन को पकड़ने के लिए मुजफ्फरपुर तक का लंबा सफर तय करना पड़ता है, लेकिन विस्तार के बाद उन्हें सीधे अपने शहर से ही दिल्ली तक की सुगम यात्रा मिल सकेगी।

    इससे न केवल यात्रियों के समय और धन की बचत होगी, बल्कि दरभंगा स्टेशन पर यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होने की उम्मीद है। रेलवे के इस सकारात्मक रुख से साफ है कि सरकार और प्रशासन मिथिलांचल की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।

  • उत्तर बिहार के लिए बड़ी सौगात: दरभंगा में स्थापित होगा अत्याधुनिक शक्तिशाली C-Band डॉप्लर वेदर रडार

    उत्तर बिहार के लिए बड़ी सौगात: दरभंगा में स्थापित होगा अत्याधुनिक शक्तिशाली C-Band डॉप्लर वेदर रडार

    भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के मौसम निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 14 मार्च 2026 को जारी एक आधिकारिक आपूर्ति आदेश के अनुसार, केंद्र सरकार ने लगभग 340 करोड़ रुपये की लागत से देश भर में नए डॉप्लर वेदर रडार स्थापित करने का निर्णय लिया है।

    इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत पूरे देश में कुल 14 शक्तिशाली C-Band और 18 X-Band रडार लगाए जाएंगे। बिहार के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 14 चुनिंदा स्थानों में उत्तर बिहार के प्रमुख शहर दरभंगा का नाम भी शामिल है, जहाँ यह आधुनिक तकनीक वाला रडार स्थापित किया जाएगा।

    दरभंगा में लगने वाला यह C-Band डॉप्लर रडार अपनी श्रेणी में बेहद शक्तिशाली माना जाता है, जो लगभग 250 से 400 किलोमीटर के दायरे में मौसम की हर छोटी-बड़ी हलचल को पकड़ने में सक्षम है। इस रडार के चालू होने से न केवल दरभंगा, बल्कि मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी और सहरसा सहित पूरे मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र में मौसम की सटीक जानकारी समय रहते मिल सकेगी।

    विशेष रूप से मानसून के दौरान होने वाली भारी बारिश, अचानक आने वाले चक्रवाती तूफान, ओलावृष्टि और आसमानी बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी अब कई घंटे पहले जारी की जा सकेगी, जिससे जान-माल के नुकसान को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।

    यह परियोजना मेसर्स डेटा पैटर्न्स (इंडिया) लिमिटेड द्वारा कार्यान्वित की जा रही है, जिसे उपकरणों की आपूर्ति के साथ-साथ अगले 10 वर्षों तक उनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। उत्तर बिहार जैसे बाढ़ और मौसम की अनिश्चितता वाले संवेदनशील क्षेत्र के लिए यह रडार एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।

    वर्तमान में पटना और पूर्णिया जैसे शहरों में पहले से रडार सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन दरभंगा में इस नए और उन्नत C-Band रडार के लगने से क्षेत्रीय स्तर पर मौसम विभाग की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इससे न केवल आम नागरिकों को सुविधा होगी, बल्कि किसानों को भी अपनी फसलों के प्रबंधन के लिए सटीक मौसम पूर्वानुमान प्राप्त हो सकेगा।

  • पूर्व मध्य रेलवे का बड़ा फैसला: समस्तीपुर मंडल के छह स्टेशनों को मिला ‘जंक्शन’ का आधिकारिक दर्जा

    पूर्व मध्य रेलवे का बड़ा फैसला: समस्तीपुर मंडल के छह स्टेशनों को मिला ‘जंक्शन’ का आधिकारिक दर्जा

    हाजीपुर/समस्तीपुर: बिहार के रेल नेटवर्क और बुनियादी ढांचे में एक युगांतरकारी बदलाव होने जा रहा है। पूर्व मध्य रेलवे (ECR) मुख्यालय, हाजीपुर ने मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र के रेल यात्रियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय की घोषणा की है। समस्तीपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले छह प्रमुख रेलवे स्टेशनों के नाम में अब आधिकारिक रूप से “जंक्शन” शब्द जोड़ दिया गया है। रेलवे बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, यह ऐतिहासिक परिवर्तन 15 मार्च 2026 से पूरे देश के रेल परिचालन रिकॉर्ड और यात्री सूचना प्रणाली में पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। यह निर्णय उत्तर बिहार में रेल पटरियों के विस्तार और नई दिशाओं से जुड़ती कनेक्टिविटी का एक आधिकारिक प्रमाण है।

    इस बदलाव की प्रक्रिया के तहत जिन स्टेशनों के स्वरूप में विस्तार किया गया है, उनमें कोसी क्षेत्र का प्रमुख केंद्र सुपौल अब सुपौल जंक्शन के नाम से जाना जाएगा। वहीं, ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु के निर्माण के बाद अपनी रणनीतिक पहचान बनाने वाला सरायगढ़ अब सरायगढ़ जंक्शन कहलाएगा। दरभंगा के समीप स्थित ककरघट्टी और शीशो स्टेशनों को भी नई रेल लाइनों के संगम के कारण अब क्रमशः ककरघट्टी जंक्शन और शीशो जंक्शन के रूप में नई पहचान मिली है। इसी कड़ी में, व्यापारिक और भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हसनपुर रोड को अब हसनपुर रोड जंक्शन कहा जाएगा। साथ ही, जगत जननी मां जानकी की पावन जन्मभूमि सीतामढ़ी को भी अब आधिकारिक तौर पर सीतामढ़ी जंक्शन का गौरवपूर्ण नाम प्राप्त हो गया है।

    रेलवे की तकनीकी शब्दावली में किसी भी स्टेशन को ‘जंक्शन’ का दर्जा तब दिया जाता है, जब वहां से कम से कम तीन अलग-अलग दिशाओं के लिए रेल मार्ग निकलते हों। पिछले कुछ वर्षों में, केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय के विशेष प्रयासों से इन क्षेत्रों में अमान परिवर्तन और नई लाइनों का जाल बिछाया गया है। उदाहरण के तौर पर, सरायगढ़ और सुपौल अब केवल स्थानीय कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये निर्मली, राघोपुर और सहरसा जैसी महत्वपूर्ण दिशाओं को जोड़ने वाले बड़े ‘इंटरचेंज’ बन चुके हैं। सीतामढ़ी की स्थिति भी रक्सौल, दरभंगा और मुजफ्फरपुर रेल खंडों के मिलन बिंदु के रूप में सुदृढ़ हुई है। यही कारण है कि इन स्टेशनों को ‘जंक्शन’ का दर्जा देना न केवल तकनीकी आवश्यकता थी, बल्कि यह यात्रियों की सुविधा के लिए भी अनिवार्य हो गया था।

    15 मार्च 2026 से प्रभावी होने वाले इस बदलाव का सीधा असर रेलवे की डिजिटल और भौतिक व्यवस्थाओं पर पड़ेगा। भारतीय रेलवे के ऑनलाइन टिकट बुकिंग पोर्टल (IRCTC) और पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) पर इन स्टेशनों के नाम अपडेट कर दिए जाएंगे। स्टेशनों के मुख्य द्वार पर लगे पीले साइनबोर्ड, प्लेटफॉर्म की पट्टिकाएं और स्वचालित उद्घोषणा प्रणाली (PA System) को भी नए नामों के अनुरूप बदल दिया जाएगा। अब जब यात्री इन स्टेशनों पर पहुंचेंगे, तो उन्हें “जंक्शन पर आपका स्वागत है” जैसी आधिकारिक घोषणाएं सुनाई देंगी, जो स्थानीय लोगों के लिए गर्व का विषय होंगी।

    विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि ‘जंक्शन’ का दर्जा मिलने से इन क्षेत्रों में विकास की नई लहर आएगी। जंक्शन बनने के बाद इन स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव की प्राथमिकता बढ़ जाती है और भविष्य में लंबी दूरी की नई एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन की संभावना भी प्रबल हो जाती है। यह न केवल यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाएगा, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा। विशेषकर सीतामढ़ी और सुपौल जैसे जिलों के लिए यह एक नई पहचान लेकर आएगा, जिससे ये शहर राष्ट्रीय रेल मानचित्र पर और अधिक मजबूती से उभरेंगे।

    समस्तीपुर रेल मंडल के अधिकारियों ने इस संबंध में सभी तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के निर्देशन में सिग्नलिंग विभाग और स्टेशन मास्टर कार्यालयों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यह बदलाव इस बात का प्रतीक है कि मिथिलांचल और कोसी की रेल परियोजनाएं अब अपने पूर्ण स्वरूप की ओर बढ़ रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता ने रेलवे के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे नए युग की शुरुआत बताया है, जो बिहार के आर्थिक और सामाजिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

  • प्रख्यात शिक्षाविद् और समाजसेवी प्रोफेसर रुद्रकांत झा का निधन, शोक की लहर

    प्रख्यात शिक्षाविद् और समाजसेवी प्रोफेसर रुद्रकांत झा का निधन, शोक की लहर

    भैरव स्थान थाना क्षेत्र के रैयाम ग्राम सहित संपूर्ण मिथिलांचल के लिए एक युग का अंत हो गया है, जब 24 फरवरी 2026 को अंग्रेजी साहित्य के प्रख्यात विद्वान प्रोफेसर रुद्रकांत झा का उनके पैतृक निवास पर निधन हो गया। 1 सितंबर 1942 को जन्मे प्रोफेसर झा का जीवन ज्ञान की साधना और सामाजिक सुधार का एक अद्भुत संगम था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के पश्चात झंझारपुर के दीप कॉलेज से अपने गौरवशाली शिक्षण करियर की शुरुआत की थी।

    इसके उपरांत उन्होंने असम के ऐतिहासिक माजुली द्वीप स्थित माजुली कॉलेज में दशकों तक अपनी सेवाएं दीं, जहाँ उनके पढ़ाने की शैली और अंग्रेजी साहित्य पर उनकी पकड़ ने उन्हें विद्यार्थियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बना दिया। 31 अगस्त 2002 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनका शिक्षा के प्रति लगाव कम नहीं हुआ और वे निरंतर समाज को नई दिशा देने में लगे रहे।

    प्रोफेसर झा केवल एक कुशल शिक्षक ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी समाजसेवी भी थे। महिला शिक्षा के प्रति उनकी संवेदनशीलता का प्रमाण तब मिला जब उन्होंने असम के कमलाबाड़ी में बालिकाओं के लिए विद्यालय की स्थापना हेतु अपनी निजी भूमि सहर्ष दान कर दी। शिक्षा के साथ-साथ उनकी गहरी आध्यात्मिक आस्था भी उनके व्यक्तित्व का मुख्य आधार थी। उन्होंने अपने पैतृक गांव रैयाम में पूर्णा पोखर के तट पर संकट मोचन हनुमान मंदिर का भव्य निर्माण करवाया, जो आज आस्था का प्रमुख केंद्र है।

    इसके अतिरिक्त, गांव के विकास में रुचि लेते हुए उन्होंने सार्वजनिक घाटों के निर्माण और शिव मंदिर की स्थापना में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। उनका जीवन सादगी और उच्च विचारों का जीवंत उदाहरण था, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

    उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, पूर्व शिष्यों और ग्रामीणों का उनके निवास पर तांता लग गया। लोगों ने उन्हें एक ऐसे मनीषी के रूप में याद किया जिन्होंने असम और बिहार के बीच शिक्षा व संस्कृति का एक मजबूत सेतु बनाया था। उनके जाने से शिक्षा जगत और सामाजिक क्षेत्र में एक ऐसी रिक्तता पैदा हो गई है जिसे भरना अत्यंत कठिन है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रोफेसर झा का योगदान केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपने कार्यों से हजारों लोगों के जीवन को प्रकाशित किया। इस दुःखद घड़ी में ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और उनके शोक संतप्त परिवार को यह अपार कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की जा रही है।