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  • झंझारपुर में रेलवे की बड़ी कार्रवाई: कैथिनिया गुमटी के पास अतिक्रमण पर चला विभाग का डंडा, 16 लोगों को नोटिस

    झंझारपुर में रेलवे की बड़ी कार्रवाई: कैथिनिया गुमटी के पास अतिक्रमण पर चला विभाग का डंडा, 16 लोगों को नोटिस

    झंझारपुर, मधुबनी: पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल अंतर्गत झंझारपुर स्टेशन क्षेत्र में रेल प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त तेवर अपना लिए हैं। झंझारपुर स्टेशन के पूर्व स्थित अंडरपास और कैथिनिया गुमटी के समीप रेलवे की भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए रेल प्रशासन के आईओडब्ल्यू (IOW) कार्यालय द्वारा 16 स्थानीय निवासियों को आधिकारिक नोटिस निर्गत किया गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है.

    30 धुर जमीन पर पक्का निर्माण, खाली करने को मिला 2 दिन का समय

    रेलवे विभाग के अनुसार, कैथिनिया गुमटी के पास लगभग 30 धुर रेल भूमि को अतिक्रमित पाया गया है। विभागीय जांच और रेल अमीन द्वारा की गई हालिया नापी के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि रेलवे की एक बड़ी भू-भाग पर लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है और कई जगहों पर तो स्थायी पक्के मकान भी बना लिए गए हैं [उपयोगकर्ता इनपुट]। आईओडब्ल्यू रमेश कुमार ने बताया कि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अवैध निर्माण को हटाने की दिशा में कदम उठाया गया है। नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि महज दो दिनों के भीतर संबंधित भूमि को खाली कर दिया जाए, अन्यथा रेलवे बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा ।

    नोटिस की जद में आए लोग

    रेलवे द्वारा जारी किए गए इस नोटिस ने क्षेत्र के कई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। जिन 16 लोगों को नोटिस थमाया गया है, उनमें जना नंद ठाकुर, धनेश्वर कामत, भोगी कामत, मुनेश्वर कामत, भगीरथ ठाकुर, उदय कांत ठाकुर, शंकर झा, झोटन कामत, बिनोद ठाकुर, विद्या नंद झा, सुफल कांत झा, श्रवण कुमार ठाकुर, सुरेंद्र झा, शिव शंकर पासवान, गोविंद ठाकुर और श्यामा नंद ठाकुर के नाम शामिल हैं।

    ग्रामीणों का दावा: “यह हमारी निजी और रजिस्ट्री की जमीन है”

    वहीं दूसरी ओर, नोटिस प्राप्त करने वाले ग्रामीणों ने रेलवे के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रभावित लोगों का तर्क है कि जिस जमीन को रेलवे अपनी बता रहा है, वह वास्तव में उनकी निजी संपत्ति है। ग्रामीणों ने साक्ष्य के तौर पर बताया कि यह जमीन उन्हें विधिवत रजिस्ट्री के माध्यम से प्राप्त हुई है और अंचल कार्यालय में उनकी जमाबंदी भी कायम है। वे वर्षों से इस जमीन की रसीद भी कटा रहे हैं। अचानक मिले इस अल्टीमेटम और घर टूटने के डर से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और तनाव देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि वे अपने साक्ष्यों के साथ रेलवे अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखेंगे ताकि उनकी निजी भूमि का बचाव हो सके।

    विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी इस पूरे मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने ला रही है। इस विवाद की जड़ें दशकों पुरानी हैं और इसमें जमीन के मालिकाना हक को लेकर एक बड़ा पेंच फंसा हुआ है।

    वेदानन्द झा ने पहले ही रेलवे को बेच दी थी जमीन सूत्रों के मुताबिक, यह विवादित भूमि मूल रूप से वेदानन्द झा की ‘खतियानी जमीन’ थी। कई वर्ष पूर्व, वेदानन्द झा ने पूर्णतः सचेत अवस्था में रेलवे के विस्तार और विकास हेतु इस जमीन को भारत सरकार (रेलवे) के नाम ‘निबंधित केवाला’ (रजिस्ट्री) कर दिया था। इस रजिस्ट्री के बाद कानूनी रूप से यह जमीन रेलवे की संपत्ति बन गई थी।

    एक ही जमीन की दूसरी रजिस्ट्री और विवाद का जन्म रेलवे को जमीन बेचने के कुछ सालों बाद तक वह भूमि खाली पड़ी रही। बताया जाता है कि खाली जमीन देखकर वेदानन्द झा के मन में लोभ आ गया। उन्होंने धोखाधड़ी करते हुए उसी जमीन को, जिसे वे पहले ही रेलवे को बेच चुके थे, पुनः ‘रंगलाल बजाज’ नामक व्यक्ति के नाम लिख दिया। इसके बाद से वह जमीन रंगलाल बजाज के दखल-कब्जे में चली आ रही थी।

    छोटी लाइन से बड़ी लाइन तक का सफर और अतिक्रमण जब झंझारपुर में छोटी रेल लाइन (मीटर गेज) थी, तब रेलवे ने अपनी तत्कालीन आवश्यकता के अनुसार जमीन के कुछ हिस्से का उपयोग किया, जबकि शेष भाग खाली छोड़ दिया गया था। रेलवे की इसी खाली जमीन का फायदा उठाते हुए रंगलाल बजाज के पौत्र पंकज बजाज ने एक बड़ा खेल किया।

    आरोप है कि पंकज बजाज ने बिना किसी वैध रजिस्ट्री या कागजात के, केवल मनमाना ‘जरसेमन’ (पैसे) लेकर विभिन्न लोगों को यह जमीन बसने के लिए दे दी। जिन लोगों ने पैसे देकर यहाँ मकान बनाए, उन्हें संभवतः इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह जमीन पहले ही रेलवे को बेची जा चुकी है। यही कारण है कि आज जब रेलवे बड़ी लाइन और स्टेशन विस्तार के लिए अपनी जमीन वापस मांग रहा है, तो 16 परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।

    विकास कार्यों के लिए खाली कराई जा रही जमीन?

    हालांकि वर्तमान कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की है, लेकिन रेलवे के आधिकारिक दस्तावेज़ बताते हैं कि झंझारपुर सहित समस्तीपुर मंडल के कई स्टेशनों पर बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजनाएं चल रही हैं। रेलवे के एक हालिया निविदा दस्तावेज़ (Tender No: TC-216-2025-SPJ) के अनुसार, झंझारपुर, तमुड़िया, निर्मली, लोहना रोड, महरैल और घोघरडीहा स्टेशनों पर पहुँच मार्ग (Station Approach Road) के चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है । इस कार्य के लिए 7,82,67,345.00 रुपये का बजट आवंटित किया गया है । संभवतः इसी तरह के विकास कार्यों और रेल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग अपनी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त करा रहा है।

    तनावपूर्ण स्थिति और भविष्य की कार्रवाई

    वर्तमान में कैथिनिया गुमटी के आसपास की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। एक तरफ जहां रेलवे प्रशासन अपनी जमीन वापस लेने पर अड़ा है, वहीं ग्रामीण अपनी पुश्तैनी और रजिस्ट्री वाली जमीन को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन ग्रामीणों के दावों की पुनः जांच करता है या निर्धारित समय सीमा के बाद बुलडोजर की कार्रवाई शुरू होती है। फिलहाल, झंझारपुर में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

  • झंझारपुर समेत समस्तीपुर मंडल के 20 स्टेशनों का होगा कायाकल्प, रेलवे ने शुरू की ‘प्रोजेक्ट सुपरविजन‘ की प्रक्रिया

    झंझारपुर समेत समस्तीपुर मंडल के 20 स्टेशनों का होगा कायाकल्प, रेलवे ने शुरू की ‘प्रोजेक्ट सुपरविजन‘ की प्रक्रिया

    समस्तीपुर डेस्क: भारतीय रेल बिहार में अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने और यात्री सुविधाओं को विश्वस्तरीय स्तर पर ले जाने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसी कड़ी में, पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले 20 प्रमुख रेलवे स्टेशनों के लिए एक व्यापक विकास योजना तैयार की गई है । इन कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने ‘प्रोजेक्ट सुपरविजन सर्विसेज एजेंसी’ (PSSA) की नियुक्ति हेतु निविदा (Tender) जारी कर दी है.

    ₹4.33 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट: 2 साल में बदलेगी सूरत

    डिप्टी चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (GSU), समस्तीपुर द्वारा जारी इस टेंडर (संख्या: DyCPM-SPJ-GSU-03-2025) की कुल अनुमानित लागत 4,33,76,701.20 रुपये (लगभग 4.33 करोड़ रुपये) आंकी गई है । इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्टेशनों पर होने वाले निर्माण और पुनर्विकास कार्यों की बारीकी से निगरानी करना है, ताकि काम की गुणवत्ता और समय सीमा से कोई समझौता न हो । रेलवे ने इस कार्य को पूरा करने के लिए 24 महीने का समय निर्धारित किया है ।

    इन 20 स्टेशनों की बदलेगी तस्वीर

    इस सुपरविजन प्रोजेक्ट के दायरे में समस्तीपुर मंडल के छोटे-बड़े 20 स्टेशनों को शामिल किया गया है:

    • मिथिलांचल के प्रमुख स्टेशन: लहेरियासराय, मधुबनी, सकरी, जयनगर, जनकपुर रोड और झंझारपुर ।
    • चंपारण और तराई क्षेत्र: बेतिया, नरकटियागंज, सुगौली, रक्सौल, चकिया और मोतीपुर ।
    • कोशी और अन्य क्षेत्र: सहरसा, सुपौल, दौरम मधेपुरा, बनमनखी, सिमरी बख्तियारपुर, सलौना, घोड़ासहन और खुद समस्तीपुर जंक्शन ।

    विशेषज्ञों की फौज करेगी हर ईंट की निगरानी

    इस मेगा प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रेलवे निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘थर्ड पार्टी सुपरविजन’ का सहारा ले रही है। निविदा के अनुसार, नियुक्त होने वाली एजेंसी को उच्च शिक्षित और अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम तैनात करनी होगी।

    इस टीम में निम्नलिखित प्रमुख पद शामिल हैं:

    • प्रोजेक्ट मैनेजर और रेजिडेंट इंजीनियर: जो पूरे प्रोजेक्ट की कमान संभालेंगे और तकनीकी बारीकियों की देखरेख करेंगे।
    • सिविल और पी-वे सुपरवाइजर: रेलवे ट्रैक (Permanent Way) और स्टेशनों के सिविल निर्माण कार्यों की पल-पल की रिपोर्ट तैयार करेंगे।
    • इलेक्ट्रिकल विशेषज्ञ: स्टेशनों पर बिजली आपूर्ति और ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) से जुड़े कार्यों की गुणवत्ता जांचेंगे।
    • सर्वेयर और सपोर्ट स्टाफ: जमीन की सटीक पैमाइश के लिए आधुनिक सर्वेयर और प्रशासनिक कार्यों के लिए कंप्यूटर ऑपरेटरों की तैनाती की जाएगी।

    24 घंटे फील्ड पर तैनात रहेंगे आधुनिक वाहन

    स्टेशनों के बीच की दूरी और कार्यों की सघनता को देखते हुए, रेलवे ने एजेंसी के लिए सख्त नियम बनाए हैं। पर्यवेक्षण टीम की आवाजाही के लिए 4 आधुनिक मल्टी-यूटिलिटी वाहनों (जैसे स्कॉर्पियो, इनोवा या टवेरा) का बेड़ा तैयार रहेगा। ये वाहन प्रतिदिन 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे ताकि आपातकालीन स्थितियों में भी अधिकारी तुरंत साइट पर पहुँच सकें। इसके लिए रेलवे ने लगभग ₹46.83 लाख का बजट अलग से निर्धारित किया है।

    डिजिटल पारदर्शिता: ‘इनफराकॉन’ पोर्टल की अनिवार्यता

    रेलवे ने भ्रष्टाचार और कागजी हेरफेर को रोकने के लिए इस बार डिजिटल कवच का उपयोग किया है। टेंडर की शर्तों के अनुसार, बोली लगाने वाली कंपनियों को अपने इंजीनियरों और विशेषज्ञों का विवरण INFRACON पोर्टल से ही डाउनलोड कर जमा करना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल वही विशेषज्ञ काम पर रखे जाएं जिनके पास वैध अनुभव और योग्यता है।

    स्थानीय व्यापार और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

    भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत, इस निविदा में ‘मेक इन इंडिया’ (Public Procurement Order 2017) का पूर्ण पालन किया गया है। कंपनियों को टेंडर भरते समय यह स्पष्ट करना होगा कि वे स्थानीय सामग्री का कितना उपयोग करेंगी।
    इससे न केवल रेलवे का विकास होगा, बल्कि क्षेत्र में स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी गति मिलेगी।

  • झंझारपुर स्टेशन पर दिखा भारतीय सेना का दम: धमक के साथ गुजरी मिलिट्री स्पेशल ट्रेन

    झंझारपुर स्टेशन पर दिखा भारतीय सेना का दम: धमक के साथ गुजरी मिलिट्री स्पेशल ट्रेन

    झंझारपुर। आज झंझारपुर रेलवे स्टेशन उस समय ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष और गर्व से भर गया, जब भारतीय सेना की साजो-सामान से लदी एक विशेष मिलिट्री ट्रेन यहाँ से गुजरी। इस ट्रेन पर लदी विशालकाय तोपें और अत्याधुनिक सैन्य उपकरण भारतीय सेना की अजेय शक्ति और बढ़ते सामर्थ्य की गवाही दे रहे थे।

    स्वदेशी शक्ति का भव्य प्रदर्शन

    ट्रेन पर रखे गए सैन्य साजो-सामान और तोपों को देखकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद आम नागरिक और रेल यात्री दंग रह गए। सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से सेना की ये आवाजाही नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होती है, लेकिन झंझारपुर के रेल खंड पर इन वज्र रूपी तोपों का दिखना क्षेत्र के लोगों के लिए कौतूहल और गर्व का विषय बना रहा।

    अजेय पराक्रम का जीवंत नजारा

    जैसे-जैसे मिलिट्री स्पेशल ट्रेन झंझारपुर जंक्शन के करीब आई, इंजन की गूँज और पहियों की धमक ने पूरे परिसर में एक अलग ही ऊर्जा भर दी। ट्रेन के खुले वैगनों पर तैनात स्वदेशी तकनीक से निर्मित तोपें न केवल भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित कर रही थीं, बल्कि यह भी बता रही थीं कि भारतीय रक्षा तंत्र अब दुनिया के बेहतरीन तंत्रों में से एक है। लोहे के विशालकाय ढांचों और मजबूत जंजीरों से बंधी ये तोपें अनुशासन और शक्ति का एक ऐसा संगम पेश कर रही थीं, जिसे देख हर राहगीर ठहर गया।

    रणनीतिक सुदृढ़ता और रेलवे का तालमेल

    झंझारपुर-निर्मली रेल खंड पर सेना की इस बड़ी हलचल ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह मार्ग अब राष्ट्र की सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है। भारतीय रेलवे का मजबूत बुनियादी ढांचा अब भारी सैन्य मशीनों को सुगमता से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने में सक्षम है। यह दृश्य देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास और रक्षा तैयारियों के बीच के बेहतरीन समन्वय की एक सुखद तस्वीर पेश कर रहा था।

    सुरक्षा के प्रति अटूट विश्वास

    प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों के चेहरों पर भय नहीं, बल्कि अपनी सेना के प्रति अटूट विश्वास और सुरक्षा का भाव नजर आया। तिरंगे के सम्मान में उठते हाथ और सेना के प्रति लोगों का यह सहज प्रेम दर्शाता है कि देश की जनता अपने नायकों और उनके शस्त्रों को किस कदर सम्मान देती है। सेना के इस काफिले ने शांतिपूर्ण तरीके से गुजरते हुए भी अपनी मूक उपस्थिति से यह संदेश दे दिया कि भारत की सीमाएं और आंतरिक सुरक्षा पूरी तरह अभेद्य हैं।

    भविष्य की ओर बढ़ते कदम

    यह मिलिट्री ट्रेन आधुनिक भारत की उस तस्वीर को पेश करती है जहाँ हम अपनी रक्षा जरूरतों के लिए स्वावलंबी हो रहे हैं। झंझारपुर जैसे शहरों से होकर गुजरती ये तोपें आने वाली पीढ़ी को देश सेवा के लिए प्रेरित करती हैं। यह मात्र एक स्थान से दूसरे स्थान पर सामान पहुँचाना नहीं, बल्कि राष्ट्र की अखंडता और एकता का एक भव्य प्रदर्शन था, जिसने मिथिलांचल की धरती पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।

  • झंझारपुर: चुनाव खत्म होते ही छीनी तीन जोड़ी ट्रेनें, अब होली पर कैसे घर आएंगे प्रवासी?

    झंझारपुर: चुनाव खत्म होते ही छीनी तीन जोड़ी ट्रेनें, अब होली पर कैसे घर आएंगे प्रवासी?

    झंझारपुर (मधुबनी): मिथिलांचल की रेल राजनीति और व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारों के बीच झंझारपुर रेलखंड की उपेक्षा का एक ऐसा अध्याय शुरू हुआ है, जिसने हजारों रेल यात्रियों को अधर में लटका दिया है। विधानसभा चुनाव और छठ महापर्व के शोर-शराबे के बीच जिन तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनों को ‘बड़ी उपलब्धि’ बताकर शुरू किया गया था, चुनावी नतीजे आते ही रेलवे ने उन्हें चुपचाप बंद कर दिया।

    अब जब होली जैसा पर्व सिर पर है और दिल्ली-अमृतसर जैसे शहरों से बिहार आने वाली ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं है, तब रेलवे का यह ‘यू-टर्न’ इलाके के लोगों के गले नहीं उतर रहा है।

    चुनावी स्टंट बनकर रह गईं ये 3 महत्वपूर्ण ट्रेनें!

    रेलवे प्रशासन ने पिछले महीनों में यात्रियों की भारी भीड़ का हवाला देते हुए निम्नलिखित ट्रेनों का परिचालन शुरू किया था, जो झंझारपुर के रास्ते गुजरती थीं:

    1. 05580/79 पूर्णिया कोर्ट-आनंद विहार स्पेशल: जिसने कोसी और मिथिला को सीधे देश की राजधानी से जोड़ा था।
    2. 05735/36 कटिहार-अमृतसर स्पेशल: जो पंजाब में हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले बिहारी कामगारों का एकमात्र सहारा बनी थी।
    3. 05737/38 न्यू जलपाईगुड़ी-नरकटियागंज स्पेशल: जो तराई क्षेत्र के व्यापार और आवागमन की रीढ़ साबित हो रही थी।

    हैरानी की बात यह है कि जैसे ही चुनाव का खुमार उतरा और महापर्व छठ संपन्न हुआ, इन तीनों ट्रेनों के चक्के थाम दिए गए। क्या रेलवे के लिए यात्री सुविधा केवल चुनावी सीजन तक ही सीमित है?

    फायदा भरपूर, फिर बंद क्यों? आंकड़ों की जुबानी

    जब ये तीनों ट्रेनें चल रही थीं, तब झंझारपुर, निर्मली और घोघरडीहा जैसे स्टेशनों पर टिकटों की बिक्री में रिकॉर्ड उछाल देखा गया था। इन ट्रेनों में ऑक्यूपेंसी (यात्रियों की संख्या) 100% से ऊपर रह रही थी। दिल्ली जाने के लिए अब तक लोगों को दरभंगा या समस्तीपुर की दौड़ लगानी पड़ती थी, लेकिन इन स्पेशल ट्रेनों ने उन्हें घर के पास ही सुविधा दे दी थी। आर्थिक रूप से सफल होने के बावजूद इन ट्रेनों का अचानक बंद होना किसी बड़ी साजिश या प्रशासनिक विफलता से कम नहीं लग रहा।

    होली पर ‘हाहाकार’: प्रवासी मजदूरों की बढ़ी धड़कनें

    होली आने में अब कुछ ही समय शेष है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में रहने वाले मिथिला के लोग टिकटों के लिए दर-दर भटक रहे हैं। जयनगर-नई दिल्ली रूट की नियमित ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट का आंकड़ा 300 के पार जा चुका है। ऐसे में इन तीन स्पेशल ट्रेनों का बंद होना प्रवासियों के लिए किसी बड़े झटके जैसा है।

    “रेलवे को समझना चाहिए कि झंझारपुर कोई छोटा स्टेशन नहीं, बल्कि एक लाइफलाइन है। चुनाव के वक्त ट्रेनें देना और फिर छीन लेना यहां की जनता के साथ धोखा है। हमें होली से पहले इन ट्रेनों की बहाली चाहिए।” — स्थानीय संघर्ष समिति, झंझारपुर

  • अमृत भारत योजना में शामिल, फिर भी यात्री जान जोखिम में डालकर पटरी पार करने को मजबूर

    अमृत भारत योजना में शामिल, फिर भी यात्री जान जोखिम में डालकर पटरी पार करने को मजबूर

    झंझारपुर। उत्तर बिहार और मिथिलांचल के रेल नेटवर्क में झंझारपुर जंक्शन एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 19 सितंबर 2024 को इस स्टेशन को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ में शामिल कर रेल मंत्रालय ने स्थानीय लोगों को विकास के बड़े सपने दिखाए थे। लेकिन धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट है। घोषणा के महीनों बाद भी बजट का आवंटन न होने के कारण स्टेशन का कायाकल्प तो दूर, यात्रियों की बुनियादी सुरक्षा भी दांव पर लगी है।

    जानलेवा सफर: ट्रैक पार करना यात्रियों की मजबूरी

    स्टेशन से आ रही तस्वीरें डराने वाली हैं। प्लेटफॉर्म संख्या एक से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए कोई सुरक्षित रास्ता न होने के कारण यात्री रेल की पटरियों के बीच से होकर गुजरते हैं। इनमें भारी बोझ उठाए मजदूर, छोटे बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। जरा सी चूक या अचानक ट्रेन के आने की स्थिति में यहाँ किसी भी वक्त एक बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन की लापरवाही यात्रियों की जान पर भारी पड़ रही है।

    अंडरपास की नाकामी: क्यों यह यात्रियों के काम का नहीं?

    प्रशासन अक्सर दलील देता है कि सुरक्षा के लिए विकल्प मौजूद हैं, लेकिन झंझारपुर जंक्शन पर बना अंडरपास पूरी तरह से विफल साबित हुआ है। स्थानीय यात्रियों और जानकारों का कहना है कि यह अंडरपास इतना अधिक घुमावदार (Zig-Zag) है कि इसमें जाने का मतलब है काफी लंबा रास्ता तय करना।

    इतना ही नहीं, सुरक्षा और सुगमता के लिहाज से यह अंडरपास यात्रियों के किसी काम का नहीं रह गया है। ट्रेन पकड़ने की जल्दी में कोई भी यात्री उस जटिल और घुमावदार रास्ते का उपयोग नहीं करना चाहता। यही कारण है कि यात्री सीधे ट्रैक पार करना ज्यादा आसान समझते हैं। लोगों का स्पष्ट मानना है कि सिर्फ एक सीधा फुट ओवर ब्रिज (FOB) ही इस समस्या का एकमात्र और स्थाई समाधान है।

    बजट के अभाव में लटका ‘अमृत भारत’ का सपना

    अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत झंझारपुर को एक ‘आदर्श स्टेशन’ के रूप में विकसित किया जाना है। प्रस्तावित कार्यों में हाई-लेवल प्लेटफॉर्म, आधुनिक वेटिंग हॉल और स्टेशन का सौंदर्यीकरण शामिल है। लेकिन बजट आवंटन में देरी ने इन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जब तक केंद्र सरकार और रेलवे विभाग फंड जारी नहीं करते, तब तक ये सभी योजनाएं महज फाइलों तक सीमित रहेंगी।

    प्राथमिकता पर हो ओवर ब्रिज का निर्माण

    झंझारपुर की जनता की अब सरकार और रेल प्रशासन से एक ही प्रमुख मांग है – पुनर्विकास के साथ-साथ फुट ओवर ब्रिज (FOB) का निर्माण तत्काल शुरू किया जाए। यह अब केवल सुविधा का नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने का सवाल है।

    ‘‘क्या आपको लगता है कि रेलवे को सौंदर्यीकरण के साथ – साथ सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताएं।‘‘

    “झंझारपुर जंक्शन: अंडरपास के बेकार होने के कारण यात्री जान जोखिम में डाल ट्रैक पार करने को मजबूर।”
  • कल से बदल जाएगी झंझारपुर होकर चलने वाली सभी ट्रेनों का समय, देखें नई समय सारणी

    कल से बदल जाएगी झंझारपुर होकर चलने वाली सभी ट्रेनों का समय, देखें नई समय सारणी

    भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए झंझारपुर जंक्शन होकर गुजरने वाली सभी ट्रेनों की समय सारणी में सकारात्मक बदलाव किए हैं। कल यानी 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाली यह नई समय सारणी यात्रियों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित होगी, जिसमें बेहतर समयबद्धता, बढ़ी हुई फ्रीक्वेंसी और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने वाले कदम शामिल हैं। रेल मंडल के अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव न केवल यात्रा को आसान बनाएगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।

    झंझारपुर जंक्शन, जो बिहार के मधुबनी जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है, पूर्व मध्य रेलवे जोन के अंतर्गत आता है। यहां से गुजरने वाली प्रमुख ट्रेनों में जोगबनी-दानापुर एक्सप्रेस (13211/13212), रक्सौल-जोगबनी एक्सप्रेस (15501/15502), सहरसा-छेरहटा अमृत भारत एक्सप्रेस और अन्य कई ट्रेनें शामिल हैं।

    वर्तमान में यहां से लगभग 10 से अधिक ट्रेनें प्रतिदिन गुजरती हैं, जो दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, जोगबनी, रक्सौल और अन्य प्रमुख शहरों को जोड़ती हैं।

    नई समय सारणी के तहत इन ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय में सुधार किया गया है, जिससे यात्रियों को दिन के व्यस्त समय में बेहतर विकल्प मिलेंगे।

    Jhanjharpur Junction New Time Table effective from 01.01.2026

    नई समय सारणी के अनुसार, स्टेशन पर आने वाली प्रमुख ट्रेनों में जोगबनी-रक्सौल एक्सप्रेस (15502) सुबह 03ः58 बजे पहुंचेगी और 04ः00 बजे प्रस्थान करेगी। इसी तरह, झंझारपुर-लौकहा सवारी गाड़ी (55503) 04ः05 बजे प्रस्थान करेगी। लहेरियासराय-सहरसा मेमू (63379) सुबह 05ः29 पहुंचेगी और 05ः31 प्रस्थान करेगी। फारबिसगंज-दरभंगा सवारी गाड़ी (75218) 06ः06 पहुंचकर 06ः08 प्रस्थान करेगी। अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों में छेरहटा (अमृतसर)-सहरसा अमृत भारत एक्सप्रेस (14628) सुबह 07ः00 पहुंचेगी और 07ः02 प्रस्थान करेगी, जो अमृतसर से सहरसा तक सोमवार को चलती है।

    लौकहा-झंझारपुर सवारी गाड़ी (55504) 08ः00 पहुंचेगी। जोगबनी-दानापुर एक्सप्रेस (13211) 08ः18 पहुंचकर 08ः20 प्रस्थान करेगी। सहरसा-लहेरियासराय मेमू (63378) 09ः01 पहुंचेगी और 09ः03 प्रस्थान करेगी।

    Laukaha Railway Station New Time Table effective from 01.01.2026

    दिन के अन्य समय में दानापुर-जोगबनी एक्सप्रेस (13212) 11ः45 पहुंचेगी और 11ः47 प्रस्थान करेगी। लहेरियासराय-सहरसा मेमू (63377) 14ः02 पहुंचकर 14ः04 प्रस्थान करेगी। सहरसा-लहेरियासराय मेमू (63382) 14ः04 पहुंचेगी और 14ः06 प्रस्थान करेगी। झंझारपुर-लौकहा सवारी गाड़ी (55501) 14ः35 प्रस्थान करेगी। सहरसा-छेरहटा (अमृतसर) अमृत भारत एक्सप्रेस (14627) 15ः16 पहुंचेगी और 15ः18 प्रस्थान करेगी।

    शाम की ट्रेनों में रक्सौल-जोगबनी एक्सप्रेस (15501) 17ः51 पहुंचेगी और 17ः53 प्रस्थान करेगी। लौकहा-झंझारपुर सवारी गाड़ी (55502) 18ः30 पहुंचेगी। दरभंगा-फारबिसगंज सवारी गाड़ी (75217) 20ः24 पहुंचकर 20ः26 प्रस्थान करेगी। सहरसा-लहेरियासराय मेमू (63380) 21ः49 पहुंचेगी और 21ः51 प्रस्थान करेगी। लहेरियासराय-सहरसा मेमू (63381) 22ः28 पहुंचकर 22ः30 प्रस्थान करेगी।

  • वैशाली एक्सप्रेस, जोगबनी-दानापुर एक्सप्रेस, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेन देरी से चलेगी, पढ़े पूरी खबर

    वैशाली एक्सप्रेस, जोगबनी-दानापुर एक्सप्रेस, स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेन देरी से चलेगी, पढ़े पूरी खबर

    पटना : भारतीय रेलवे के सोनपुर डिवीजन के अंतर्गत हाजीपुर स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) के गर्डर लॉन्चिंग का काम चल रहा है। इसके लिए 22 दिसंबर से 24 दिसंबर 2025 तक ट्रैफिक और पावर ब्लॉक लिया जाएगा। इस ब्लॉक की वजह से कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को रीशेड्यूल (देरी से चलाना) या रेगुलेट (रास्ते में रोकना) किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह ब्लॉक ट्रेनों की सुरक्षा और स्टेशन के विकास के लिए जरूरी है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा से पहले भारतीय रेलवे की वेबसाइट या ऐप पर ट्रेन का लाइव स्टेटस चेक करें, ताकि असुविधा से बचा जा सके।

    यह ब्लॉक हाजीपुर स्टेशन पर कोचिंग ट्रेनों के संचालन को प्रभावित करेगा। प्रभावित ट्रेनों की सूची दिन और समय के अनुसार नीचे दी गई है।

    22 दिसंबर 2025 (सोमवार) – ब्लॉक समय: दोपहर 1:05 से 4:05 बजे तक

    रीशेड्यूल ट्रेनें (देरी से शुरू होंगी):

    • ट्रेन नंबर 13211 (जोगबनी से दानापुर जाने वाली): जोगबनी से 140 मिनट (करीब 2 घंटे 20 मिनट) देरी से चलेगी।
    • ट्रेन नंबर 75219 (डीईआईए से सोनपुर जाने वाली लोकल डेमू): डीईआईए से 140 मिनट देरी से चलेगी। (यह ट्रेन वैशाली होते हुए सोनपुर जाती है।)
    • ट्रेन नंबर 63305 (कटिहार से सोनपुर जाने वाली): कटिहार से 120 मिनट (2 घंटे) देरी से चलेगी।

    रेगुलेट ट्रेनें (रास्ते में रोकी जाएंगी):

    • ट्रेन नंबर 22450 (नई दिल्ली से गुवाहाटी जाने वाली): दानापुर डिवीजन में 100 मिनट (करीब 1 घंटा 40 मिनट) रोकी जाएगी।

    23 दिसंबर 2025 (मंगलवार) – ब्लॉक समय: सुबह 8:30 से 11:30 बजे तक

    • कोई ट्रेन प्रभावित नहीं होगी। (निल)

    24 दिसंबर 2025 (बुधवार) – ब्लॉक समय: दोपहर 12:30 से 3:30 बजे तक

    रीशेड्यूल ट्रेनें (देरी से शुरू होंगी):

    • ट्रेन नंबर 15028 (गोरखपुर से संबलपुर जाने वाली): गोरखपुर से 120 मिनट (2 घंटे) देरी से चलेगी।
    • ट्रेन नंबर 14673 (जयनगर से अमृतसर जाने वाली शहीद एक्सप्रेस): जयनगर से 155 मिनट (करीब 2 घंटे 35 मिनट) देरी से चलेगी।
    • ट्रेन नंबर 15231 (बरौनी से गोंदिया जाने वाली): बरौनी से 135 मिनट (2 घंटे 15 मिनट) देरी से चलेगी।
    • ट्रेन नंबर 13211 (जोगबनी से दानापुर जाने वाली): जोगबनी से 90 मिनट (1 घंटा 30 मिनट) देरी से चलेगी।
    • ट्रेन नंबर 75219 (डीईआईए से सोनपुर जाने वाली): डीईआईए से 90 मिनट देरी से चलेगी।
    • ट्रेन नंबर 18182 (थावे से टाटानगर जाने वाली): थावे से 60 मिनट (1 घंटा) देरी से चलेगी।

    रेगुलेट ट्रेनें (रास्ते में रोकी जाएंगी):

    • ट्रेन नंबर 18181 (टाटानगर से कटिहार जाने वाली): दानापुर और सोनपुर डिवीजन में 135 मिनट (2 घंटे 15 मिनट) रोकी जाएगी।
    • ट्रेन नंबर 15708 (अमृतसर से कटिहार जाने वाली किरण एक्सप्रेस): उत्तर पूर्वी रेलवे (एनईआर) में 120 मिनट (2 घंटे) रोकी जाएगी।
    • ट्रेन नंबर 12554 (नई दिल्ली से ललितग्राम जाने वाली वैशाली एक्सप्रेस): उत्तर पूर्वी रेलवे में 100 मिनट (1 घंटा 40 मिनट) रोकी जाएगी।
    • ट्रेन नंबर 12562 (नई दिल्ली से जयनगर जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस): उत्तर पूर्वी रेलवे में 50 मिनट और सोनपुर डिवीजन में 30 मिनट रोकी जाएगी।
    • ट्रेन नंबर 15516 (दानापुर से नरकटियागंज जाने वाली): दानापुर डिवीजन में 20 मिनट रोकी जाएगी।
    • ट्रेन नंबर 19483 (अहमदाबाद से सहरसा जाने वाली): दानापुर डिवीजन में 75 मिनट (1 घंटा 15 मिनट) रोकी जाएगी।
  • अब लौकही तक चलेगी ट्रेन, सीतामढ़ी-जयनगर-लौकही-निर्मली रेलखंड का निर्माण जल्द होगा शुरू

    अब लौकही तक चलेगी ट्रेन, सीतामढ़ी-जयनगर-लौकही-निर्मली रेलखंड का निर्माण जल्द होगा शुरू

    पटना: बिहार की रेल परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने राज्य को इस संबंध में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। हाल ही में बिहार के योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की, जिसमें रेल मंत्री ने बिहार की रेल योजनाओं के लिए हरसंभव मदद का भरोसा जताया। विशेष रूप से सीतामढ़ी-जयनगर-निर्मली वाया सुरसंड रेल परियोजना और ललितग्राम-वीरपुर रेल परियोजना पर काम शुरू करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

    इस परियोजना को अक्टूबर 2025 में केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिली, जिसकी लागत लगभग 2400 करोड़ रुपये है। 189 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन में कुल 25 स्टेशन होंगे, जिनमें 21 नए स्टेशन शामिल हैं, जैसे भूताही, सोनबरसा, सुरसंड, उमगांव, लालमणि और लौकही। मौजूदा स्टेशन सीतामढ़ी, जयनगर, लौकाहा बाजार और निर्मली से यह लाइन गुजरेगी।

    यह परियोजना 2007 में ही स्वीकृत हो चुकी थी, लेकिन 16-18 वर्षों की देरी के बाद अब इसे गति मिलने की उम्मीद है। इससे सीतामढ़ी, मधुबनी और सुपौल जिलों को जोड़ते हुए मिथिला क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही भारत-नेपाल व्यापार में भी सुधार होगा।

    वर्तमान में बिहार में 86 हजार करोड़ रुपये की 52 रेल परियोजनाएं चल रही हैं, जो कुल 4663 किलोमीटर की हैं। इनमें से कई निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं, और अब तक 30 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

    अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 93 रेल स्टेशनों का 3164 करोड़ रुपये से पुनर्विकास हो रहा है। हालांकि, कुछ घोषणाएं अभी भी जमीन पर उतरने का इंतजार कर रही हैं। नवंबर 2025 में सोशल मीडिया पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने परियोजना की प्रगति पर सवाल उठाए हैं, जैसे भूमि अधिग्रहण और सर्वे की स्थिति, तथा इसे पीएम गति शक्ति योजना में शामिल करने की मांग की है।

    मंत्री यादव ने बिहटा-औरंगाबाद रेल परियोजना में भी तेजी लाने का आग्रह किया, जिस पर रेल मंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई का वादा किया। कुल मिलाकर, ये परियोजनाएं बिहार के सीमावर्ती इलाकों में विकास की नई दिशा प्रदान करेंगी।

  • झंझारपुर : नवनिर्वाचित विधायक नीतीश मिश्रा का भव्य स्वागत, बोले – “मैं झंझारपुर का बेटा हूं, बेटा बनकर ही काम करूंगा”

    झंझारपुर : नवनिर्वाचित विधायक नीतीश मिश्रा का भव्य स्वागत, बोले – “मैं झंझारपुर का बेटा हूं, बेटा बनकर ही काम करूंगा”

    झंझारपुर (मधुबनी), 26 नवंबर। बिहार विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड मतों से दूसरी बार विजयी हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक नीतीश मिश्रा का मंगलवार को उनके गृह क्षेत्र झंझारपुर में जोरदार स्वागत किया गया। नई सरकार गठन के बाद पहली बार अपने क्षेत्र पहुंचे नीतीश मिश्रा का जगह-जगह फूलमालाओं, आतिशबाजी और नारों से स्वागत हुआ।

    एनएच-27 स्थित राजे टोल प्लाजा से ही सैकड़ों एनडीए कार्यकर्ताओं ने काफिले के साथ चलना शुरू किया। रास्ते में दर्जनों स्थानों पर स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया। झंझारपुर पहुंचकर सबसे पहले उन्होंने शांतिनाथ मंदिर के पास ललित नारायण मिश्र स्मारक पर माल्यार्पण किया। इसके बाद बेहट गांव में ग्रामीणों ने और लंगड़ा चौक पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।

    लंगड़ा चौक पर सामाजिक कार्यकर्ता रविंद्र भारती के नेतृत्व में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में जनता को संबोधित करते हुए नीतीश मिश्रा ने कहा, “मैं झंझारपुर का बेटा हूं। बेटा बनकर ही रहना है और बेटा बनकर ही झंझारपुर के विकास के लिए काम करना है। जनता ने जो उम्मीद और इतना बड़ा जनादेश दिया है, उसे पूरा करने का काम चुनाव परिणाम के अगले दिन से ही शुरू हो गया है। एक पल भी बर्बाद नहीं करूंगा।”

    कन्हौली स्थित भाजपा कार्यालय में हजारों कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। यहां आयोजित अभिनंदन समारोह में श्री मिश्रा ने कहा, “झंझारपुर ने जितनी बड़ी जीत दी है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी है। मैं इसे बेटे की तरह निभाऊंगा।”

    मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर उठे सवालों के जवाब में उन्होंने स्पष्ट कहा, “मंत्री बनना या न बनना मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व का अधिकार क्षेत्र है। मेरा काम क्षेत्र की जनता की सेवा करना है। मैं उसी में लगा हूं।” साथ ही विपक्ष के चुनावी आरोपों पर मुस्कुराते हुए बोले, “जनता ने मतपेटी में इसका करारा जवाब दे दिया है।”

    हालांकि कार्यकर्ताओं व आम जनता में यह चर्चा जोरों पर रही कि इतनी बड़ी जीत के बावजूद नीतीश मिश्रा को अभी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में उन्हें सूबे की नई सरकार में बड़ा दायित्व जरूर मिलेगा।

    इस मौके पर बड़ी संख्या में एनडीए नेता, कार्यकर्ता और आम नागरिक मौजूद रहे।

  • नीतीश मिश्रा को बिहार के नए मंत्रिमंडल में क्यों नहीं मिली जगह? भाजपा के फैसले से मधुबनी में नाराजगी

    नीतीश मिश्रा को बिहार के नए मंत्रिमंडल में क्यों नहीं मिली जगह? भाजपा के फैसले से मधुबनी में नाराजगी

    संवाददाता, मधुबनी: नीतीश कुमार ने 20 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में शपथ ली, जहां उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। उनके साथ 26 मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की, जिसमें एक मुस्लिम और तीन महिलाएं शामिल हैं। भाजपा ने अपने कोटे से कई पुराने चेहरों को दरकिनार कर नए नेताओं को मौका दिया। मधुबनी जिले से खजौली विधायक अरुण शंकर प्रसाद को कैबिनेट में शामिल किया गया है, जिन्हें पर्यटन, कला-संस्कृति और युवा मामलों का विभाग सौंपा गया है।

    हालांकि, नीतीश मिश्रा को बाहर रखे जाने से स्थानीय स्तर पर हलचल मची हुई है। मधुबनी और झंझारपुर में लोग सवाल उठा रहे हैं कि पूर्व उद्योग मंत्री, जिन्होंने बिहार में निवेश और विकास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई, उन्हें क्यों नजरअंदाज किया गया। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे ‘उद्योग-रहित बिहार’ का संकेत बता रहे हैं। अब जदयू ने इस पर अपना पक्ष रखा है।

    जदयू का स्पष्टीकरण
    मंत्रिमंडल गठन के बाद मीडिया से बातचीत में जदयू जिलाध्यक्ष फूले भंडारी ने मामले की सफाई दी। उन्होंने झंझारपुर विधायक नीतीश मिश्रा और अन्य कुछ नेताओं को मंत्री पद न मिलने पर पार्टी की राय जाहिर की।

    भंडारी ने कहा, “किसी क्षेत्र के विधायक का मंत्री बनना स्थानीय विकास के लिए जरूरी है। जदयू भी चाहता था कि झंझारपुर को प्रतिनिधित्व मिले, लेकिन कोटे की सीमाओं के कारण सभी को शामिल नहीं किया जा सका। नीतीश मिश्रा योग्य और लोकप्रिय नेता हैं, लेकिन उनका नाम न आना भाजपा का आंतरिक फैसला है, जिसमें हमारा कोई हस्तक्षेप नहीं।

    “सोशल मीडिया की अफवाहों पर नाराजगी
    जिलाध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक पोस्टों पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिना तथ्यों के एनडीए की एकता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जो गठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचाता है। “ऐसी अफवाहें जनता में भ्रम पैदा करती हैं। हम अपील करते हैं कि सोशल मीडिया पर तथ्य-आधारित और मर्यादित चर्चा हो,” उन्होंने जोड़ा।

    रिक्त पदों पर नजर
    भंडारी ने बताया कि एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल में कुल 36 पद हैं। भाजपा के 15 कोटे में से 14 भर चुके हैं, एक खाली है। जदयू के 15 में से 9 मंत्रियों की घोषणा हो गई है, जबकि 6 पद रिक्त हैं। चिराग पासवान की पार्टी की एक सीट और एक अन्य सीट भी खाली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य के विस्तार में नीतीश मिश्रा जैसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।एनडीए को ‘पांच पांडवों जैसा मजबूत’ बताते हुए भंडारी ने कहा कि भाजपा ने शायद किसी रणनीतिक वजह से फिलहाल उन्हें बाहर रखा है। मधुबनी में नीतीश मिश्रा के समर्थक इस फैसले से नाराज हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही सुधार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में उद्योग विकास के लिए ऐसे अनुभवी नेताओं की जरूरत है, और यह फैसला राज्य की आर्थिक प्रगति पर असर डाल सकता है।