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झंझारपुर समेत समस्तीपुर मंडल के 20 स्टेशनों का होगा कायाकल्प, रेलवे ने शुरू की ‘प्रोजेक्ट सुपरविजन‘ की प्रक्रिया

खबर सारांश

समस्तीपुर डेस्क: भारतीय रेल बिहार में अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने और यात्री सुविधाओं को विश्वस्तरीय स्तर पर ले जाने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसी कड़ी में, पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले 20 प्रमुख रेलवे स्टेशनों के […]

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झंझारपुर समेत समस्तीपुर मंडल के 20 स्टेशनों का होगा कायाकल्प, रेलवे ने शुरू की ‘प्रोजेक्ट सुपरविजन‘ की प्रक्रिया
लगभग 3 मिनट

समस्तीपुर डेस्क: भारतीय रेल बिहार में अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने और यात्री सुविधाओं को विश्वस्तरीय स्तर पर ले जाने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसी कड़ी में, पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले 20 प्रमुख रेलवे स्टेशनों के लिए एक व्यापक विकास योजना तैयार की गई है । इन कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने ‘प्रोजेक्ट सुपरविजन सर्विसेज एजेंसी’ (PSSA) की नियुक्ति हेतु निविदा (Tender) जारी कर दी है.

₹4.33 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट: 2 साल में बदलेगी सूरत

डिप्टी चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (GSU), समस्तीपुर द्वारा जारी इस टेंडर (संख्या: DyCPM-SPJ-GSU-03-2025) की कुल अनुमानित लागत 4,33,76,701.20 रुपये (लगभग 4.33 करोड़ रुपये) आंकी गई है । इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्टेशनों पर होने वाले निर्माण और पुनर्विकास कार्यों की बारीकी से निगरानी करना है, ताकि काम की गुणवत्ता और समय सीमा से कोई समझौता न हो । रेलवे ने इस कार्य को पूरा करने के लिए 24 महीने का समय निर्धारित किया है ।

इन 20 स्टेशनों की बदलेगी तस्वीर

इस सुपरविजन प्रोजेक्ट के दायरे में समस्तीपुर मंडल के छोटे-बड़े 20 स्टेशनों को शामिल किया गया है:

  • मिथिलांचल के प्रमुख स्टेशन: लहेरियासराय, मधुबनी, सकरी, जयनगर, जनकपुर रोड और झंझारपुर ।
  • चंपारण और तराई क्षेत्र: बेतिया, नरकटियागंज, सुगौली, रक्सौल, चकिया और मोतीपुर ।
  • कोशी और अन्य क्षेत्र: सहरसा, सुपौल, दौरम मधेपुरा, बनमनखी, सिमरी बख्तियारपुर, सलौना, घोड़ासहन और खुद समस्तीपुर जंक्शन ।

विशेषज्ञों की फौज करेगी हर ईंट की निगरानी

इस मेगा प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रेलवे निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘थर्ड पार्टी सुपरविजन’ का सहारा ले रही है। निविदा के अनुसार, नियुक्त होने वाली एजेंसी को उच्च शिक्षित और अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम तैनात करनी होगी।

इस टीम में निम्नलिखित प्रमुख पद शामिल हैं:

  • प्रोजेक्ट मैनेजर और रेजिडेंट इंजीनियर: जो पूरे प्रोजेक्ट की कमान संभालेंगे और तकनीकी बारीकियों की देखरेख करेंगे।
  • सिविल और पी-वे सुपरवाइजर: रेलवे ट्रैक (Permanent Way) और स्टेशनों के सिविल निर्माण कार्यों की पल-पल की रिपोर्ट तैयार करेंगे।
  • इलेक्ट्रिकल विशेषज्ञ: स्टेशनों पर बिजली आपूर्ति और ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) से जुड़े कार्यों की गुणवत्ता जांचेंगे।
  • सर्वेयर और सपोर्ट स्टाफ: जमीन की सटीक पैमाइश के लिए आधुनिक सर्वेयर और प्रशासनिक कार्यों के लिए कंप्यूटर ऑपरेटरों की तैनाती की जाएगी।

24 घंटे फील्ड पर तैनात रहेंगे आधुनिक वाहन

स्टेशनों के बीच की दूरी और कार्यों की सघनता को देखते हुए, रेलवे ने एजेंसी के लिए सख्त नियम बनाए हैं। पर्यवेक्षण टीम की आवाजाही के लिए 4 आधुनिक मल्टी-यूटिलिटी वाहनों (जैसे स्कॉर्पियो, इनोवा या टवेरा) का बेड़ा तैयार रहेगा। ये वाहन प्रतिदिन 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे ताकि आपातकालीन स्थितियों में भी अधिकारी तुरंत साइट पर पहुँच सकें। इसके लिए रेलवे ने लगभग ₹46.83 लाख का बजट अलग से निर्धारित किया है।

डिजिटल पारदर्शिता: ‘इनफराकॉन’ पोर्टल की अनिवार्यता

रेलवे ने भ्रष्टाचार और कागजी हेरफेर को रोकने के लिए इस बार डिजिटल कवच का उपयोग किया है। टेंडर की शर्तों के अनुसार, बोली लगाने वाली कंपनियों को अपने इंजीनियरों और विशेषज्ञों का विवरण INFRACON पोर्टल से ही डाउनलोड कर जमा करना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल वही विशेषज्ञ काम पर रखे जाएं जिनके पास वैध अनुभव और योग्यता है।

स्थानीय व्यापार और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत, इस निविदा में ‘मेक इन इंडिया’ (Public Procurement Order 2017) का पूर्ण पालन किया गया है। कंपनियों को टेंडर भरते समय यह स्पष्ट करना होगा कि वे स्थानीय सामग्री का कितना उपयोग करेंगी।
इससे न केवल रेलवे का विकास होगा, बल्कि क्षेत्र में स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी गति मिलेगी।

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