पटना मेट्रो: चार किलोमीटर का सफर, तीन स्टेशन का जोश अब ठंडा — रोजाना सिर्फ 1500 यात्री, कमाई 45 हजार

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Highlights
  • पटना मेट्रो: 1 महीने में उत्साह → सन्नाटा
  • रोज 1500 यात्री | कमाई सिर्फ 45K
  • 4.5 KM, 3 स्टेशन — केंद्रीय पटना दूर
  • फेज-2 तक इंतजार, तब तक ‘सैर’ ही सही!
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पटना, 10 नवंबर 2025 — बिहार की राजधानी को आधुनिक परिवहन का तोहफा देने वाली पटना मेट्रो अब उत्साह के बजाय सन्नाटे की गवाह बन रही है। उद्घाटन के एक महीने बाद मेट्रो में यात्रियों की संख्या तेजी से गिरी है। पहले हफ्ते में हजारों लोग सेल्फी और अनुभव के लिए पहुंचे थे, लेकिन अब रोजाना औसतन सिर्फ 1500 यात्री ही सफर कर रहे हैं। इससे दैनिक कमाई महज 42-45 हजार रुपये तक सिमट गई है।

पहले दिन की चमक, अब सन्नाटे की हकीकत

उद्घाटन के समय स्टेशनों पर फोटो सेशन, बच्चों की हंसी और लंबी टिकट लाइनें थीं। आसपास के जिलों से लोग नई मेट्रो देखने पहुंचे। लेकिन सीमित रूट और तीन स्टेशनों की वजह से यह उत्साह अब ‘प्रयोग’ बनकर रह गया है।

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मेट्रो प्रशासन का बयान: “अब रोजाना 1500 यात्री ही यात्रा कर रहे हैं। कमाई 42 से 45 हजार रुपये के बीच है।”

केवल 4.5 किमी का रूट — यात्री बोले, “केंद्रीय पटना तक नहीं, तो फायदा क्या?”

फिलहाल मेट्रो आईएसबीटी से भूतनाथ तक 4.5 किलोमीटर के रूट पर चल रही है। इसमें तीन स्टेशन हैं:

  • पाटलिपुत्र बस डिपो (आईएसबीटी)
  • जीरो माइल
  • भूतनाथ रोड

किराया:

  • एक स्टेशन: 15 रुपये
  • पूरा रूट: 30 रुपये

यात्री कहते हैं — “जब तक मेट्रो गांधी मैदान, रेलवे स्टेशन या केंद्रीय पटना तक नहीं पहुंचेगी, रोजाना इस्तेमाल कौन करेगा?”

42 फेरे, 12 घंटे सेवा, 3 कोच वाली ट्रेन

  • संचालन समय: सुबह 7:55 से शाम 7:55 तक
  • दैनिक फेरे: 42
  • क्षमता: 138 बैठने + 945 खड़े यात्री
  • मुफ्त यात्रा: 3 फुट से कम ऊंचाई वाले बच्चे

फेज-2 पर टिकी उम्मीद — कब बनेगी ‘शहर की जरूरत’ ?

पटना मेट्रो ने बिहार को नया परिवहन चेहरा जरूर दिया, लेकिन केंद्रीय और दक्षिणी पटना को जोड़ने वाला फेज-2 पूरा होने तक इसका असली फायदा नहीं दिखेगा। अभी यह सिर्फ ‘शहर की सैर’ है, ‘रोजमर्रा की जरूरत’ बनने में वक्त लगेगा।

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