नरपतगंज (अररिया)। लोक आस्था का सबसे बड़ा पर्व छठ नजदीक आते ही पूरा इलाका श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से सराबोर हो उठा है। शनिवार को नरपतगंज बाजार में छठ पूजा की तैयारियों को लेकर खरीदारी का जबरदस्त उत्साह देखा गया। विशेषकर सूप, दौरा, डाला, बांस की टोकरी, कलश, नारियल, फल और पूजा सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं, पृष्ठभूमि में गूंज रहे बिहार कोकिला शारदा सिन्हा के अमर छठ गीतों—“कांच ही बांस के बहंगिया”, “छठी मईया आव अंगना हो” और “उग हो सूरज देव”—ने पूरे माहौल को भक्ति से भर दिया।
बाजार में छठ की रौनक चरम पर
सुबह से ही नरपतगंज बाजार में रौनक देखी गई। बाजार के हर कोने में दुकानदारों ने अपने-अपने स्टॉल सजा लिए थे। बांस से बने सूप, दौरा और टोकरी की बिक्री में जोरदार तेजी रही। स्थानीय कारीगर रामविलास मर्रीक ने बताया, “हम लोग सालभर इस समय का इंतजार करते हैं। छठ के पहले बाजार में जो भीड़ लगती है, वही हमारी सालभर की मेहनत का फल होती है। इस बार बिक्री काफी अच्छी है।”
सूप-दौरा बेचने वाली दुकानों के सामने खरीददारों की लंबी कतारें लगीं रहीं। गांवों से आई महिलाएं सूप-दौरा के साथ-साथ पूजा में इस्तेमाल होने वाले दीया, वस्त्र, सिंदूर, कलश, थाली, सुपा और मिट्टी के पात्र की खरीदारी करती नजर आईं।
शारदा सिन्हा के गीतों ने सजाया माहौल
नरपतगंज बाजार का दृश्य इस समय भक्ति और संगीत का संगम बना हुआ है। दुकानों के स्पीकरों और लाउडस्पीकरों पर शारदा सिन्हा की मधुर आवाज में छठ गीत लगातार बजते रहे। उनके गीतों ने बाजार में एक अलग ही माहौल बना दिया।
छोटे-बड़े दुकानदार, ग्राहक, बच्चे और महिलाएं भी अनायास ही गीतों के बोल गुनगुनाते दिखे।
स्थानीय निवासी प्रमोद झा ने बताया, “शारदा सिन्हा के गीतों के बिना छठ अधूरा लगता है। जब तक ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ नहीं बजे, तब तक छठ की शुरुआत महसूस नहीं होती।”
महिलाओं में उमंग और भक्ति भाव
बाजार में सबसे ज्यादा भीड़ महिलाओं की रही। वे अपनी झोली में सूप, दौरा, प्रसाद के लिए फल और पूजा सामग्री लेकर घर लौटती नजर आईं। कई महिलाओं ने बताया कि छठ पूजा केवल पर्व नहीं, बल्कि भावनाओं का उत्सव है।
शिखा देवी, निवासी रामघाट पंचायत, ने कहा, “छठी मईया की पूजा हम पूरे मन से करते हैं। यह पर्व हमारे परिवार की एकता और सुख-समृद्धि का प्रतीक है। खरीदारी करते समय जब शारदा सिन्हा की आवाज कानों में पड़ती है तो भक्ति की अनुभूति और गहरी हो जाती है।”
फल-सब्जी और पूजा सामग्री की बिक्री जोरों पर
सूप-दौरा के साथ-साथ बाजार में फल-सब्जियों की मांग भी तेजी से बढ़ी। केला, नारियल, अमरूद, गन्ना, नींबू, सेब और सिंघाड़ा की खरीदारी करने वालों की भीड़ रही।
सब्जी विक्रेता रंजीत यादव ने कहा, “अभी तो भीड़ की शुरुआत है। असली भीड़ खरना के दिन देखने को मिलेगी। लेकिन इस बार लोग पहले से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं।”
घाटों की सफाई और सजावट जारी
नरपतगंज प्रखंड के रामघाट, बजरंगबली चौक , सोनापुर नदी घाट की सफाई का कार्य जोरों पर है। ग्रामीण, युवक क्लब और पंचायत प्रतिनिधि मिलकर घाटों की सफाई कर रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन ने भी पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष तैयारी की है। नरपतगंज थाना प्रभारी ने बताया कि बाजार और घाटों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी ताकि भीड़ में कोई अव्यवस्था न हो।
कारीगरों के चेहरे पर मुस्कान
बांस के कारीगरों और स्थानीय मिट्टी के बर्तन बनाने वालों के चेहरे पर भी इस समय खुशी झलक रही है। छठ पर्व उनके लिए कमाई का सबसे अच्छा अवसर लेकर आता है। मिठाई और कपड़ा दुकानदारों ने भी बताया कि इस बार लोगों की खरीद क्षमता बढ़ी है, जिससे व्यापार में बढ़ोतरी हो रही है।
छठ गीतों ने लौटाई लोकसंस्कृति की याद
जहां एक ओर आधुनिकता की चकाचौंध ने नए गानों को जन्म दिया है, वहीं शारदा सिन्हा के पारंपरिक छठ गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। नरपतगंज बाजार में युवा वर्ग भी मोबाइल पर उनके पुराने गीत सुनते नजर आए।
स्थानीय शिक्षक दिनबंधु शाह ने कहा, “शारदा सिन्हा के गीत हमारी संस्कृति का प्रतीक हैं। उनकी आवाज सुनकर गांव का पुराना माहौल, घाट की रौनक और परिवार का मिलन याद आ जाता है।”
रिपोर्ट: संवाददाता, नरपतगंज (अररिया)
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