रेल विद्युतीकरण में भारत का ऐतिहासिक कीर्तिमान
भारतीय रेलवे ने हरित, स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन प्रणाली की दिशा में एक बड़ी वैश्विक सफलता हासिल की है। देश के कुल ब्रॉड गेज (Broad Gauge) रेल नेटवर्क के लगभग 99.6 प्रतिशत भाग का विद्युतीकरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस उपलब्धि के साथ ही भारत ने विद्युतीकृत रेल नेटवर्क के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है और दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस व्यापक विद्युतीकरण अभियान के माध्यम से रेलवे ने डीजल ईंधन पर अपनी निर्भरता को लगभग समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

डीजल खपत में 185 करोड़ लीटर की रिकॉर्ड गिरावट
रेल नेटवर्क के तीव्र विद्युतीकरण का सीधा सकारात्मक प्रभाव भारतीय रेलवे की परिचालन लागत और पर्यावरण दोनों पर देखने को मिला है। जारी आंकड़ों के अनुसार, 99.6% इलेक्ट्रिफिकेशन हासिल होने से रेलवे की वार्षिक डीजल खपत में 185 करोड़ लीटर की भारी कमी आई है। डीजल खपत में इतनी बड़ी गिरावट से न केवल देश की विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है, बल्कि आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता भी घटी है। इसके साथ ही, विषैली गैसों और कार्बन उत्सर्जन (CO2 Emissions) में भारी कमी आने से भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को बहुत मजबूती मिली है।
प्रमुख आंकड़े और मुख्य विशेषताएं
- इलेक्ट्रिफिकेशन कवरेज: भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क का 99.6% हिस्सा पूरी तरह से ओवरहेड इलेक्ट्रो-लाइन (OHE) से लैस किया जा चुका है।
- चीन को पछाड़ा: भारत का विद्युतीकरण का यह आंकड़ा चीन और अन्य विकसित देशों के तुलनात्मक रेल विद्युतीकरण प्रतिशत से आगे निकल गया है।
- ईंधन बचत: ट्रेनों के संचालन में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव्स का दबदबा बढ़ने से 185 करोड़ लीटर डीजल की बचत दर्ज की गई है।
- नेट-जीरो लक्ष्य 2030: यह उपलब्धि भारतीय रेलवे को वर्ष 2030 तक दुनिया का पहला ‘नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जक’ (Net-Zero Carbon Emitter) बड़ा रेल नेटवर्क बनाने के राष्ट्रीय विजन की ओर तेजी से ले जा रही है।
वैश्विक परिदृश्य और आर्थिक व पर्यावरणीय लाभ
दुनिया भर के प्रमुख रेल नेटवर्क जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन की तुलना में भारत ने बीते कुछ वर्षों में रेलवे बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में ऐतिहासिक प्रगति की है। जहां वर्ष 2014 से पहले रेल लाइनों के विद्युतीकरण की गति काफी धीमी थी, वहीं अब प्रतिदिन औसतन रिकॉर्ड किलोमीटर नेटवर्क को इलेक्ट्रिफाइड किया गया है।
इलेक्ट्रिक इंजनों के उपयोग से न केवल यात्री ट्रेनों की औसत गति और त्वरण (acceleration) क्षमता में वृद्धि हुई है, बल्कि भारी मालगाड़ियों की माल ढुलाई क्षमता (Freight Haulage Capacity) में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। डीजल इंजनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक इंजन अधिक शक्तिशाली, कम रखरखाव लागत वाले और शून्य प्रत्यक्ष वायु प्रदूषण पैदा करने वाले होते हैं।
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