झंझारपुर (मधुबनी): पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में रेल सुरक्षा और यात्री संरक्षा को पुख्ता करने के लिए आरपीएफ (RPF) एक्शन मोड में है। रविवार को दरभंगा पोस्ट कमांडर के निर्देश पर झंझारपुर आउटपोस्ट की टीम ने झंझारपुर-लौकहा रेलखंड के कर्णपुर और बटोआ इलाकों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया।
युवाओं को सख्त हिदायत: ‘शौक न बन जाए मौत’
अभियान का नेतृत्व कर रहे प्रभारी अरबिंद कुमार और एएसआई विकास कुमार ने स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं को रेल नियमों का पाठ पढ़ाया। टीम ने स्पष्ट किया कि रेलवे ट्रैक पर सेल्फी लेना या इयरफोन लगाकर चलना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जानलेवा अपराध है। ग्रामीणों को समझाया गया कि ट्रैक पार करना कानूनन जुर्म है और ट्रेनों पर पत्थरबाजी करना या सिग्नल उपकरणों से छेड़छाड़ करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, मवेशियों को ट्रैक के पास न बांधने की अपील की गई ताकि रेल परिचालन बाधित न हो।
नशाखुरानी गिरोह से बचने की सलाह
आरपीएफ ने यात्रियों को सफर के दौरान अलर्ट रहने को कहा। टीम ने सलाह दी कि अनजान लोगों से खाने-पीने की चीजें न लें, क्योंकि यह नशाखुरानी गिरोह की साजिश हो सकती है। साथ ही, ट्रेन में पटाखे या ज्वलनशील पदार्थ ले जाने को पूरी तरह वर्जित बताया गया।
झंझारपुर स्टेशन के नए शेड ने छोड़ा साथ, बारिश में ‘झरना’ बने प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3
झंझारपुर: एक तरफ रेलवे आधुनिक सुविधाओं के दावे कर रहा है, तो दूसरी तरफ झंझारपुर स्टेशन की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। पिछले दो दिनों की बारिश ने स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन की सूरत बिगाड़ दी है। यात्रियों के सिर ढकने के लिए बनाया गया शेड अब बारिश में ‘झरना’ बन चुका है।
नए निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
हैरानी की बात यह है कि स्टेशन का निर्माण नया है, फिर भी शेड में आधा दर्जन से अधिक जगहों पर लीकेज है। बारिश होते ही पूरा प्लेटफॉर्म किसी खुले मैदान जैसा दिखने लगता है। यात्रियों के बैठने वाली बेंचें पूरी तरह भीग जाती हैं, जिससे यात्रियों को खड़े रहकर या इधर-उधर भागकर खुद को बचाना पड़ता है।
यात्रियों का दर्द: ‘स्टेशन पहुंचना अब सजा जैसा’
ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्री रमेश कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा, “नया स्टेशन होने के बावजूद पानी टपकना निर्माण में लापरवाही को दर्शाता है।” वहीं, छोटे बच्चों के साथ सफर कर रही महिला यात्रियों ने बताया कि स्टेशन परिसर में भीगना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में हुई कोताही के कारण यह नौबत आई है। यदि मानसून से पहले मरम्मत नहीं हुई, तो यात्रियों की मुसीबतें और बढ़ जाएंगी।
धनबाद। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की आवाजाही और परिचालनिक कारणों का हवाला देते हुए धनबाद, गोमो और बोकारो रेलखंड से होकर गुजरने वाली दो जोड़ी महत्वपूर्ण स्पेशल ट्रेनों के आगामी सभी फेरे रद्द कर दिए हैं। दक्षिण पूर्व रेलवे की इस घोषणा से उत्तर बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों को बड़ा झटका लगा है।
रद्द की गई ट्रेनों का विवरण
रेलवे प्रशासन के अनुसार, रांची से चलकर धनबाद और दरभंगा के रास्ते झंझारपुर तक जाने वाली स्पेशल ट्रेन (08105/08106) अब पटरी पर नहीं दिखेगी। इसी तरह, रांची से बोकारो, गोमो और गया के रास्ते गोरखपुर जाने वाली ट्रेन (08629/08640) की सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। इन ट्रेनों के रद्द होने की प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं:
रांची-झंझारपुर स्पेशल: 23 और 30 मार्च को रद्द।
झंझारपुर-रांची स्पेशल: 24 और 31 मार्च को रद्द।
रांची-गोरखपुर स्पेशल: 23 और 30 मार्च को रद्द।
गोरखपुर-रांची स्पेशल: 25 मार्च और 1 अप्रैल को रद्द।
यात्रियों के लिए उपलब्ध विकल्प
ट्रेनों के रद्द होने के बावजूद यात्रियों के लिए कुछ राहत भरी खबरें भी हैं। धनबाद से गोरखपुर जाने वाले यात्रियों के लिए धनबाद-गोरखपुर स्पेशल (23 व 30 मार्च) एक बेहतर विकल्प के रूप में उपलब्ध है, क्योंकि मौर्य एक्सप्रेस में लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। इस वैकल्पिक ट्रेन में स्लीपर से लेकर एसी कोच तक में पर्याप्त सीटें खाली हैं। वहीं, उत्तर बिहार जाने वाले यात्री राउरकेला-जयनगर एक्सप्रेस का सहारा ले सकते हैं, जिसमें फिलहाल सभी श्रेणियों में जगह उपलब्ध है।
गर्मी की छुट्टियों में रूट डायवर्जन से बढ़ेगी परेशानी
आगामी गर्मी की छुट्टियों के दौरान जम्मू की ओर जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उत्तर रेलवे में चल रहे विकास कार्यों के कारण टाटा-जम्मूतवी और संबलपुर-जम्मूतवी एक्सप्रेस के मार्ग में मई और जून के महीनों में बदलाव किया गया है। अब ये ट्रेनें कानपुर और दिल्ली के बजाय खुर्जा, मेरठ सिटी, सहारनपुर और अंबाला कैंट होकर अपनी मंजिल तक पहुंचेंगी।
परिवर्तित मार्ग से चलने वाली ट्रेनें:
18101 टाटा-जम्मूतवी एक्सप्रेस: 29 मई, 31 मई और 3 जून।
18102 जम्मूतवी-टाटा एक्सप्रेस: 30 मई, 1 जून और 3 जून।
18309 संबलपुर-जम्मूतवी एक्सप्रेस: 30 मई, 1 जून और 2 जून।
18310 जम्मूतवी-संबलपुर एक्सप्रेस: 31 मई, 2 जून और 4 जून।
झंझारपुर: भारतीय रेल द्वारा बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से आज दिनांक 14 मार्च 2026 को झंझारपुर-निर्मली रेलखंड पर एक वृहद जांच अभियान चलाया गया। मंडल वाणिज्य निरीक्षक झंझारपुर, रवि कुमार साहनी के कुशल नेतृत्व में टीम ने इस रेलखंड से गुजरने वाली प्रमुख ट्रेनों में सघन तलाशी ली। इस औचक कार्रवाई का मुख्य केंद्र दानापुर-जोगबनी इंटरसिटी एक्सप्रेस और सहरसा-लहरियासराय मेमू ट्रेन रही, जहाँ चेकिंग टीम ने ट्रेन के हर कोच में जाकर यात्रियों के टिकटों और उनके पास मौजूद सामानों की गहनता से पड़ताल की।
इस अभियान के दौरान टीम ने बड़ी संख्या में नियमों का उल्लंघन करने वाले यात्रियों को चिन्हित किया। पूरी कार्रवाई के दौरान कुल 35 यात्रियों को बिना उचित टिकट के यात्रा करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके साथ ही चेकिंग टीम ने सामानों की ढुलाई के नियमों के प्रति भी कड़ाई दिखाई और कुल 131 ऐसे व्यक्तियों को पकड़ा जो बिना बुक किए हुए लगेज के साथ सफर कर रहे थे। इन सभी के विरुद्ध रेल अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए मौके पर ही कुल 19,030 रुपये का जुर्माना राजस्व के रूप में वसूल किया गया।
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों का बड़ा दल तैनात था। मंडल वाणिज्य निरीक्षक रवि कुमार साहनी के सहयोग के लिए 08 चल टिकट निरीक्षक (TTE) मौजूद रहे, जिन्होंने पूरी तत्परता से यात्रियों की जांच की। इसके अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था को संभालने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए रेलवे सुरक्षा बल झंझारपुर के सहायक उप निरीक्षक विकास कुमार यादव अपने दो जवानों के साथ मौके पर मुस्तैद रहे।
रेल प्रशासन की इस कड़ी कार्रवाई से बिना टिकट यात्रा करने वाले असामाजिक तत्वों में दिन भर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए इस प्रकार के अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे। उन्होंने आम जनता से यह भी अपील की है कि वे रेलवे को अपना सहयोग दें और हमेशा वैध टिकट लेकर ही गौरवमयी रेल यात्रा का आनंद उठाएं।
झंझारपुर और आसपास के क्षेत्र के रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। रेलवे ने पुर्णिया कोर्ट और सहरसा से आनंद विहार (दिल्ली) के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेनों की परिचालन अवधि को बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले इन ट्रेनों को केवल 17 मार्च तक चलाने की योजना थी, लेकिन यात्रियों की भारी संख्या और सुगम यातायात सुनिश्चित करने के लिए अब इन्हें मार्च के अंत तक चलाया जाएगा।
इस विस्तार से मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र के लोगों को दिल्ली आने-जाते समय काफी सुविधा होगी। विशेष रूप से झंझारपुर, निर्मली और सुपौल के यात्रियों के लिए यह एक सीधा और सुलभ विकल्प बना रहेगा।
ट्रेनों की नई समय सारणी और संचालन तिथियां
जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, इन स्पेशल ट्रेनों का नया शेड्यूल इस प्रकार है:
पुर्णिया कोर्ट – आनंद विहार (05579): यह ट्रेन अब 29 मार्च तक अपनी सेवाएं देगी। हालांकि, ध्यान रहे कि 21 और 28 मार्च को यह ट्रेन पुर्णिया कोर्ट से नहीं चलेगी (रद्द रहेगी)।
सहरसा – आनंद विहार (05575): सहरसा से यह ट्रेन 11, 18 और 25 मार्च को संचालित की जाएगी।
आनंद विहार – पुर्णिया कोर्ट (05580): वापसी दिशा में यह ट्रेन आनंद विहार से 29 मार्च तक उपलब्ध रहेगी।
आनंद विहार – सहरसा (05576): यह ट्रेन आनंद विहार से सहरसा के लिए 31 मार्च तक चलेगी।
कोच संरचना में बदलाव: अब मिलेगी बेहतर सुविधा
इस बार रेलवे ने यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कोच संरचना (Coach Composition) में भी बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत ट्रेन में निम्नलिखित श्रेणी के कोच शामिल होंगे:
जनरल कोच: कम बजट में यात्रा करने वालों के लिए।
स्लीपर क्लास: रात के सफर को आरामदायक बनाने के लिए।
3E (इकोनॉमी एसी): कम किराए में एसी के सफर का आनंद लेने के लिए।
इन स्टेशनों से होकर गुजरेगी ट्रेन
यह ट्रेन उत्तर बिहार के कई महत्वपूर्ण स्टेशनों को जोड़ती है। पुर्णिया कोर्ट से खुलने के बाद यह बनमनखी, मुरलीगंज, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, सरायगढ़, निर्मली, घोघरडीहा, झंझारपुर, सकरी, सीतामढ़ी, रक्सौल, नरकटियागंज और गोरखपुर होते हुए आनंद विहार पहुंचेगी।
झंझारपुर-निर्मली रेलखंड पर रेल राजस्व की सुरक्षा और बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से शनिवार, 7 मार्च 2026 को एक विशेष और सघन टिकट चेकिंग अभियान चलाया गया। यह पूरी कार्रवाई मंडल वाणिज्य निरीक्षक रवि कुमार साहनी के कुशल नेतृत्व में संपन्न हुई, जिसके दौरान रेलखंड से गुजरने वाली प्रमुख ट्रेनों में सघन तलाशी ली गई। इस अभियान की भनक लगते ही बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों में हड़कंप मच गया और रेलवे स्टेशन परिसर में काफी गहमागहमी देखी गई।
इस विशेष अभियान के तहत टीम ने मुख्य रूप से दानापुर-जोगबनी इंटरसिटी एक्सप्रेस और सहरसा-लहरिया सराय मेमू ट्रेन को अपने निशाने पर लिया। मंडल वाणिज्य निरीक्षक के साथ मौजूद 08 टीटीई की टीम ने ट्रेन के प्रत्येक कोच में जाकर यात्रियों के टिकटों की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान न केवल बिना टिकट यात्रा करने वाले लोग पकड़े गए, बल्कि उन यात्रियों पर भी कार्रवाई की गई जो बिना बुकिंग कराए भारी मात्रा में सामान लेकर यात्रा कर रहे थे। रेलवे सुरक्षा बल झंझारपुर के सहायक उप निरीक्षक विकास कुमार यादव और उनके दो स्टाफ की मौजूदगी ने पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित किया।
दिन भर चली इस कार्रवाई के सुखद परिणाम सामने आए जिसमें टीम ने कुल 38 व्यक्तियों को बिना उचित टिकट के यात्रा करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। इसके साथ ही रेलवे के नियमों का उल्लंघन कर बिना बुकिंग के लगेज ले जा रहे 100 अन्य यात्रियों को भी चिन्हित किया गया। इन सभी उल्लंघनकर्ताओं से रेलवे अधिनियम के तहत तत्काल जुर्माना वसूल किया गया। इस पूरे अभियान के दौरान रेलवे ने कुल 16,438 रुपये की राशि जुर्माने के तौर पर सरकारी खजाने में जमा कराई।
रेलवे अधिकारियों ने इस सफल अभियान के बाद स्पष्ट संदेश दिया है कि रेलखंड पर इस तरह के औचक निरीक्षण भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे हमेशा वैध टिकट लेकर और अपने सामान की उचित बुकिंग कराकर ही गौरवशाली भारतीय रेल का सफर करें ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या असुविधा का सामना न करना पड़े। इस अभियान से न केवल राजस्व में वृद्धि हुई है बल्कि नियम का पालन करने वाले यात्रियों के बीच सुरक्षा का भाव भी सुदृढ़ हुआ है।
झंझारपुर : होली के पावन अवसर पर घर जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने रांची और झंझारपुर के बीच विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह कदम त्योहार के दौरान ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए उठाया गया है। रांची-झंझारपुर होली स्पेशल ट्रेन के परिचालन से झारखंड और बिहार के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। यह ट्रेन सेवा मार्च के पूरे महीने उपलब्ध रहेगी जिससे प्रवासियों को अपने घर पहुंचने में कोई असुविधा नहीं होगी।
गाड़ी संख्या 08105 रांची-झंझारपुर होली स्पेशल ट्रेन का परिचालन 2 मार्च से 30 मार्च के बीच प्रत्येक सोमवार को किया जाएगा। यह ट्रेन रांची जंक्शन से रात 10:50 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन शाम 4:00 बजे झंझारपुर पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 08106 झंझारपुर-रांची होली स्पेशल ट्रेन 3 मार्च से 31 मार्च के बीच हर मंगलवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन झंझारपुर से शाम 6:00 बजे रवाना होकर अगले दिन दोपहर 12:15 बजे रांची पहुंचेगी।
यात्रा के दौरान यह स्पेशल ट्रेन मुरी जंक्शन, बोकारो स्टील सिटी, चंद्रपुरा, धनबाद, चितरंजन, मधुपुर, जसीडीह, झाझा, किउल, बरौनी, समस्तीपुर, दरभंगा और सकरी जंक्शन जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी। इन ठहरावों की मदद से न केवल रांची और झंझारपुर बल्कि रास्ते में पड़ने वाले अन्य शहरों के यात्री भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। रेलवे ने इस ट्रेन में जनरल, स्लीपर, 3AC और 2AC कोचों की व्यवस्था की है ताकि हर श्रेणी के यात्री अपनी सुविधा अनुसार सफर कर सकें।
इस विशेष रेल सेवा के शुरू होने से मिथिलांचल और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। होली के दौरान टिकटों की भारी मारामारी को देखते हुए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते अपना आरक्षण करा लें। रेलवे प्रशासन को उम्मीद है कि इस ट्रेन के चलने से नियमित ट्रेनों पर दबाव कम होगा और यात्रियों का सफर सुखद एवं सुरक्षित रहेगा।
झंझारपुर: होली पर्व पर जहां झंझारपुर होकर पांच जोड़ी स्पेशल ट्रेन की घोषणा की गई वहीं इस पांच जोड़ी स्पेशल ट्रेन में सबसे पहले कटिहार- अमृतसर (05735/36) को कटिहार की ओर से 18 फरवरी को और अमृतसर की ओर से 20 फरवरी को रद्द कर दिया गया वहीं अब पुर्णिया कोर्ट और सहरसा से आनंद विहार के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन के परिचालन अवधि में भी बड़ा बदलाव किया गया है। इस बदलाव से इस क्षेत्र के रेल यात्रियों को अब फिर एक बार कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा।
दरअसल पूर्व में नॉर्थ इस्टर्न रेलवे द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक गाड़ी संख्या 05575 सहरसा से आनंद बिहार के बीच 30 दिसम्बर तक प्रत्येक बुधवार को और 05576 आनंद विहार से सहरसा 29 दिसम्बर तक प्रत्येक मंगलवार को चलाने की योजना थी साथ ही 05579 पुर्णिया कोर्ट – आनंद विहार स्पेशल 29 दिसम्बर तक प्रत्येक सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार और रविवार को और 05580 आनंद विहार- पुर्णिया कोर्ट स्पेशल 01 जनवरी 2027 तक सप्ताह में चार दिन प्रत्येक बुधवार, गुरूवार, रविवार और शुक्रवार को चलाने की योजना थी।
लेकिन वर्त्तमान में जारी अधिसूचना के अनुसार इस ट्रेन के एक सात तक विस्तारित अवधि को अब सिर्फ 7 दिनों के लिए चलाने का निर्णय लिया गया है। जारी अधिसूचना के मुताबिक गाड़ी संख्या 05575 सहरसा से आनंद बिहार के बीच 11 मार्च बुधवार को सिर्फ एक फेरा और और 05576 आनंद विहार से सहरसा 10 और 17 मार्च मंगलवार को सिर्फ दो फेरा चलेगी। साथ ही 05579 पुर्णिया कोर्ट – आनंद विहार स्पेशल 06 मार्च से 15 मार्च के बीच मंगलवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को सिर्फ 8 फेरा और 05580 आनंद विहार- पुर्णिया कोर्ट स्पेशल 08 मार्च से 16 मार्च के बीच गुरूवार, रविवार, सोमवार और मंगलवार को सिर्फ 7 फेरा में चलेगी।
पुर्णिया कोर्ट से निर्मली, झंझारपुर के रास्ते चलने वाली मात्र एक ट्रेन का परिचालन अविध कम होने से रेल यात्रियों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है। पूर्व में इस ट्रेन को अगले एक साल तक चलाने की अधिसूचना जारी हुई थी। अब देखना ये है कि आगे होली के बाद इस ट्रेन के परिचालन अवधि की कोई घोषणा होती है या फिर इस रूट से चलने वाली मात्र एक ट्रेन हमेशा के लिए बंद हो जाएगी।
होली के पावन अवसर पर अपने घर जाने और अपनों के साथ खुशियां मनाने की राह देख रहे यात्रियों के लिए रेलवे की ओर से एक बेहद मायूस करने वाली खबर आई है। रेलवे प्रशासन द्वारा धूमधाम से घोषित की गई कटिहार-अमृतसर होली स्पेशल (ट्रेन संख्या 05736), जो झंझारपुर के रास्ते संचालित होने वाली थी, को अपनी पहली ही ट्रिप में निरस्त कर दिया गया है।
रेलवे के इस अचानक लिए गए फैसले ने उन सैकड़ों यात्रियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिन्होंने त्योहार के सीजन में कंफर्म टिकट की चाहत में काफी पहले ही इस विशेष ट्रेन में अपनी बुकिंग सुनिश्चित कराई थी।
खासकर झंझारपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लोगों के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि इस रेल मार्ग पर लंबी दूरी की ट्रेनों का पहले से ही भारी अभाव बना हुआ है।
इस ट्रेन के सुचारू परिचालन से न केवल कटिहार बल्कि पूर्णिया, फारबिसगंज, ललितग्राम, राघोपुर, निर्मली, झंझारपुर और दरभंगा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के यात्रियों को पंजाब की ओर जाने के लिए एक सीधा, सुगम और किफायती विकल्प मिलने की प्रबल उम्मीद थी। ऐन वक्त पर गाड़ी के निरस्त होने से उन लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, जो अब विकल्प के तौर पर निजी बसों या अन्य साधनों के लिए भारी रकम खर्च करने को मजबूर होंगे।
फिलहाल रेल विभाग की ओर से इस आकस्मिक रद्दीकरण के पीछे के किसी ठोस तकनीकी कारण का विस्तृत विवरण आधिकारिक तौर पर साझा नहीं किया गया है, लेकिन विभागीय गलियारों में परिचालन संबंधी जटिलताओं और रैक की अनुपलब्धता को ही इसका मुख्य आधार माना जा रहा है।
झंझारपुर, मधुबनी: पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल अंतर्गत झंझारपुर स्टेशन क्षेत्र में रेल प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त तेवर अपना लिए हैं। झंझारपुर स्टेशन के पूर्व स्थित अंडरपास और कैथिनिया गुमटी के समीप रेलवे की भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए रेल प्रशासन के आईओडब्ल्यू (IOW) कार्यालय द्वारा 16 स्थानीय निवासियों को आधिकारिक नोटिस निर्गत किया गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है.
30 धुर जमीन पर पक्का निर्माण, खाली करने को मिला 2 दिन का समय
रेलवे विभाग के अनुसार, कैथिनिया गुमटी के पास लगभग 30 धुर रेल भूमि को अतिक्रमित पाया गया है। विभागीय जांच और रेल अमीन द्वारा की गई हालिया नापी के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि रेलवे की एक बड़ी भू-भाग पर लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है और कई जगहों पर तो स्थायी पक्के मकान भी बना लिए गए हैं [उपयोगकर्ता इनपुट]। आईओडब्ल्यू रमेश कुमार ने बताया कि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अवैध निर्माण को हटाने की दिशा में कदम उठाया गया है। नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि महज दो दिनों के भीतर संबंधित भूमि को खाली कर दिया जाए, अन्यथा रेलवे बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा ।
नोटिस की जद में आए लोग
रेलवे द्वारा जारी किए गए इस नोटिस ने क्षेत्र के कई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। जिन 16 लोगों को नोटिस थमाया गया है, उनमें जना नंद ठाकुर, धनेश्वर कामत, भोगी कामत, मुनेश्वर कामत, भगीरथ ठाकुर, उदय कांत ठाकुर, शंकर झा, झोटन कामत, बिनोद ठाकुर, विद्या नंद झा, सुफल कांत झा, श्रवण कुमार ठाकुर, सुरेंद्र झा, शिव शंकर पासवान, गोविंद ठाकुर और श्यामा नंद ठाकुर के नाम शामिल हैं।
ग्रामीणों का दावा: “यह हमारी निजी और रजिस्ट्री की जमीन है”
वहीं दूसरी ओर, नोटिस प्राप्त करने वाले ग्रामीणों ने रेलवे के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रभावित लोगों का तर्क है कि जिस जमीन को रेलवे अपनी बता रहा है, वह वास्तव में उनकी निजी संपत्ति है। ग्रामीणों ने साक्ष्य के तौर पर बताया कि यह जमीन उन्हें विधिवत रजिस्ट्री के माध्यम से प्राप्त हुई है और अंचल कार्यालय में उनकी जमाबंदी भी कायम है। वे वर्षों से इस जमीन की रसीद भी कटा रहे हैं। अचानक मिले इस अल्टीमेटम और घर टूटने के डर से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और तनाव देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि वे अपने साक्ष्यों के साथ रेलवे अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखेंगे ताकि उनकी निजी भूमि का बचाव हो सके।
विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी इस पूरे मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने ला रही है। इस विवाद की जड़ें दशकों पुरानी हैं और इसमें जमीन के मालिकाना हक को लेकर एक बड़ा पेंच फंसा हुआ है।
वेदानन्द झा ने पहले ही रेलवे को बेच दी थी जमीन सूत्रों के मुताबिक, यह विवादित भूमि मूल रूप से वेदानन्द झा की ‘खतियानी जमीन’ थी। कई वर्ष पूर्व, वेदानन्द झा ने पूर्णतः सचेत अवस्था में रेलवे के विस्तार और विकास हेतु इस जमीन को भारत सरकार (रेलवे) के नाम ‘निबंधित केवाला’ (रजिस्ट्री) कर दिया था। इस रजिस्ट्री के बाद कानूनी रूप से यह जमीन रेलवे की संपत्ति बन गई थी।
एक ही जमीन की दूसरी रजिस्ट्री और विवाद का जन्म रेलवे को जमीन बेचने के कुछ सालों बाद तक वह भूमि खाली पड़ी रही। बताया जाता है कि खाली जमीन देखकर वेदानन्द झा के मन में लोभ आ गया। उन्होंने धोखाधड़ी करते हुए उसी जमीन को, जिसे वे पहले ही रेलवे को बेच चुके थे, पुनः ‘रंगलाल बजाज’ नामक व्यक्ति के नाम लिख दिया। इसके बाद से वह जमीन रंगलाल बजाज के दखल-कब्जे में चली आ रही थी।
छोटी लाइन से बड़ी लाइन तक का सफर और अतिक्रमण जब झंझारपुर में छोटी रेल लाइन (मीटर गेज) थी, तब रेलवे ने अपनी तत्कालीन आवश्यकता के अनुसार जमीन के कुछ हिस्से का उपयोग किया, जबकि शेष भाग खाली छोड़ दिया गया था। रेलवे की इसी खाली जमीन का फायदा उठाते हुए रंगलाल बजाज के पौत्र पंकज बजाज ने एक बड़ा खेल किया।
आरोप है कि पंकज बजाज ने बिना किसी वैध रजिस्ट्री या कागजात के, केवल मनमाना ‘जरसेमन’ (पैसे) लेकर विभिन्न लोगों को यह जमीन बसने के लिए दे दी। जिन लोगों ने पैसे देकर यहाँ मकान बनाए, उन्हें संभवतः इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह जमीन पहले ही रेलवे को बेची जा चुकी है। यही कारण है कि आज जब रेलवे बड़ी लाइन और स्टेशन विस्तार के लिए अपनी जमीन वापस मांग रहा है, तो 16 परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।
विकास कार्यों के लिए खाली कराई जा रही जमीन?
हालांकि वर्तमान कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की है, लेकिन रेलवे के आधिकारिक दस्तावेज़ बताते हैं कि झंझारपुर सहित समस्तीपुर मंडल के कई स्टेशनों पर बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजनाएं चल रही हैं। रेलवे के एक हालिया निविदा दस्तावेज़ (Tender No: TC-216-2025-SPJ) के अनुसार, झंझारपुर, तमुड़िया, निर्मली, लोहना रोड, महरैल और घोघरडीहा स्टेशनों पर पहुँच मार्ग (Station Approach Road) के चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है । इस कार्य के लिए 7,82,67,345.00 रुपये का बजट आवंटित किया गया है । संभवतः इसी तरह के विकास कार्यों और रेल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग अपनी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त करा रहा है।
तनावपूर्ण स्थिति और भविष्य की कार्रवाई
वर्तमान में कैथिनिया गुमटी के आसपास की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। एक तरफ जहां रेलवे प्रशासन अपनी जमीन वापस लेने पर अड़ा है, वहीं ग्रामीण अपनी पुश्तैनी और रजिस्ट्री वाली जमीन को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन ग्रामीणों के दावों की पुनः जांच करता है या निर्धारित समय सीमा के बाद बुलडोजर की कार्रवाई शुरू होती है। फिलहाल, झंझारपुर में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
समस्तीपुर डेस्क: भारतीय रेल बिहार में अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने और यात्री सुविधाओं को विश्वस्तरीय स्तर पर ले जाने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसी कड़ी में, पूर्व मध्य रेल (ECR) के समस्तीपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले 20 प्रमुख रेलवे स्टेशनों के लिए एक व्यापक विकास योजना तैयार की गई है । इन कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने ‘प्रोजेक्ट सुपरविजन सर्विसेज एजेंसी’ (PSSA) की नियुक्ति हेतु निविदा (Tender) जारी कर दी है.
₹4.33 करोड़ का बड़ा प्रोजेक्ट: 2 साल में बदलेगी सूरत
डिप्टी चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (GSU), समस्तीपुर द्वारा जारी इस टेंडर (संख्या: DyCPM-SPJ-GSU-03-2025) की कुल अनुमानित लागत 4,33,76,701.20 रुपये (लगभग 4.33 करोड़ रुपये) आंकी गई है । इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्टेशनों पर होने वाले निर्माण और पुनर्विकास कार्यों की बारीकी से निगरानी करना है, ताकि काम की गुणवत्ता और समय सीमा से कोई समझौता न हो । रेलवे ने इस कार्य को पूरा करने के लिए 24 महीने का समय निर्धारित किया है ।
इन 20 स्टेशनों की बदलेगी तस्वीर
इस सुपरविजन प्रोजेक्ट के दायरे में समस्तीपुर मंडल के छोटे-बड़े 20 स्टेशनों को शामिल किया गया है:
मिथिलांचल के प्रमुख स्टेशन: लहेरियासराय, मधुबनी, सकरी, जयनगर, जनकपुर रोड और झंझारपुर ।
चंपारण और तराई क्षेत्र: बेतिया, नरकटियागंज, सुगौली, रक्सौल, चकिया और मोतीपुर ।
कोशी और अन्य क्षेत्र: सहरसा, सुपौल, दौरम मधेपुरा, बनमनखी, सिमरी बख्तियारपुर, सलौना, घोड़ासहन और खुद समस्तीपुर जंक्शन ।
विशेषज्ञों की फौज करेगी हर ईंट की निगरानी
इस मेगा प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रेलवे निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘थर्ड पार्टी सुपरविजन’ का सहारा ले रही है। निविदा के अनुसार, नियुक्त होने वाली एजेंसी को उच्च शिक्षित और अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम तैनात करनी होगी।
इस टीम में निम्नलिखित प्रमुख पद शामिल हैं:
प्रोजेक्ट मैनेजर और रेजिडेंट इंजीनियर: जो पूरे प्रोजेक्ट की कमान संभालेंगे और तकनीकी बारीकियों की देखरेख करेंगे।
सिविल और पी-वे सुपरवाइजर: रेलवे ट्रैक (Permanent Way) और स्टेशनों के सिविल निर्माण कार्यों की पल-पल की रिपोर्ट तैयार करेंगे।
इलेक्ट्रिकल विशेषज्ञ: स्टेशनों पर बिजली आपूर्ति और ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) से जुड़े कार्यों की गुणवत्ता जांचेंगे।
सर्वेयर और सपोर्ट स्टाफ: जमीन की सटीक पैमाइश के लिए आधुनिक सर्वेयर और प्रशासनिक कार्यों के लिए कंप्यूटर ऑपरेटरों की तैनाती की जाएगी।
24 घंटे फील्ड पर तैनात रहेंगे आधुनिक वाहन
स्टेशनों के बीच की दूरी और कार्यों की सघनता को देखते हुए, रेलवे ने एजेंसी के लिए सख्त नियम बनाए हैं। पर्यवेक्षण टीम की आवाजाही के लिए 4 आधुनिक मल्टी-यूटिलिटी वाहनों (जैसे स्कॉर्पियो, इनोवा या टवेरा) का बेड़ा तैयार रहेगा। ये वाहन प्रतिदिन 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे ताकि आपातकालीन स्थितियों में भी अधिकारी तुरंत साइट पर पहुँच सकें। इसके लिए रेलवे ने लगभग ₹46.83 लाख का बजट अलग से निर्धारित किया है।
डिजिटल पारदर्शिता: ‘इनफराकॉन’ पोर्टल की अनिवार्यता
रेलवे ने भ्रष्टाचार और कागजी हेरफेर को रोकने के लिए इस बार डिजिटल कवच का उपयोग किया है। टेंडर की शर्तों के अनुसार, बोली लगाने वाली कंपनियों को अपने इंजीनियरों और विशेषज्ञों का विवरण INFRACON पोर्टल से ही डाउनलोड कर जमा करना होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल वही विशेषज्ञ काम पर रखे जाएं जिनके पास वैध अनुभव और योग्यता है।
स्थानीय व्यापार और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा
भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत, इस निविदा में ‘मेक इन इंडिया’ (Public Procurement Order 2017) का पूर्ण पालन किया गया है। कंपनियों को टेंडर भरते समय यह स्पष्ट करना होगा कि वे स्थानीय सामग्री का कितना उपयोग करेंगी। इससे न केवल रेलवे का विकास होगा, बल्कि क्षेत्र में स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी गति मिलेगी।