सहरसा फारबिसगंज रेलखंड पर सवारी गाड़ी की संख्या बढ़ाने की मांग हुई तेज

Star Mithila News
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नरपतगंज (अररिया)।

सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड पर पैसेंजर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग इन दिनों जोर पकड़ रही है। बिहार के लोकआस्था के महापर्व छठ के नजदीक आते ही इस रेलखंड पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। लेकिन सीमित ट्रेनों के कारण आम लोगों, खासकर छठ की खरीदारी के लिए बाजार जाने वाले यात्रियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नरपतगंज स्टेशन पर हर दिन सुबह से लेकर देर रात तक भीड़ उमड़ रही है, जिससे यात्रियों में नाराजगी देखी जा रही है।

 

 

छठ पर्व के दौरान यात्रियों की बढ़ी संख्या

 

छठ महापर्व बिहार का सबसे बड़ा और लोकआस्था से जुड़ा त्यौहार है। इस पर्व के लिए लोग सहरसा, सुपौल, अररिया और फारबिसगंज जैसे बड़े बाजारों से पूजा सामग्री की खरीदारी करते हैं। लेकिन सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड पर ट्रेनों की संख्या सीमित होने के कारण लोग समय पर अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

 

नरपतगंज स्टेशन पर सुबह से ही यात्रियों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। ट्रेनें जब आती हैं तो डिब्बों में तिल रखने की भी जगह नहीं रहती। कई बार लोग छत पर चढ़कर या दरवाजे पर लटककर सफर करते हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर भी खतरा बढ़ गया है।

 

नरपतगंज बाजार में खरीदारी करने पहुंचे अररिया निवासी रमेश तिवारी बताते हैं —

 

> “छठ पूजा की तैयारी के लिए सहरसा जाना था, लेकिन ट्रेन इतनी भीड़भाड़ वाली थी कि तीन बार कोशिश करने के बाद भी जगह नहीं मिली। मजबूरन बस से जाना पड़ा, जो महंगी भी है और समय भी ज्यादा लगाती है।”

 

 

 

स्कूल-कॉलेज के छात्रों को हो रही भारी दिक्कत

 

इस रेलखंड से रोजाना हजारों छात्र-छात्राएं सफर करते हैं। सुपौल, सहरसा, अररिया और फारबिसगंज के कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए ट्रेन सबसे सस्ता और सुविधाजनक साधन है। लेकिन ट्रेनों की कमी से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

 

नरपतगंज निवासी छात्रा रिया झा कहती हैं —

 

> “सुबह की ट्रेन अगर छूट जाए तो फिर दोपहर तक कोई ट्रेन नहीं मिलती। कॉलेज में लेट पहुंचने के कारण कई बार उपस्थिति कम हो जाती है। अगर रेलवे एक-दो अतिरिक्त पैसेंजर ट्रेनें चलाए तो हमें बहुत राहत मिलेगी।”

 

 

 

इसी तरह सुपौल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र अमन कुमार का कहना है —

 

> “हम रोज सुबह ट्रेन से कॉलेज जाते हैं, लेकिन भीड़ इतनी होती है कि कई बार स्टेशन से ही वापस लौटना पड़ता है। त्योहार के समय तो हाल और भी खराब हो जाता है।”

 

 

 

नरपतगंज स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ चरम पर

 

नरपतगंज रेलवे स्टेशन पर इस समय जनसाधारण एक्सप्रेस के समय दृश्य किसी मेला स्थल जैसा है। टिकट काउंटर पर लंबी लाइनें, प्लेटफॉर्म पर बैठे यात्री और ट्रेन के आने का बेसब्री से इंतजार करते लोग — यह आम नजारा बन गया है।

 

 

व्यापारियों और बाजारों पर भी असर

 

सहरसा, सुपौल और फारबिसगंज के बाजारों में छठ पर्व के दौरान खरीदारों की भारी भीड़ रहती है। लेकिन ट्रेनों की कमी से ग्राहक कम पहुंच रहे हैं। इससे बाजारों में कारोबार प्रभावित हो रहा है।

 

फारबिसगंज के व्यापारी मोहम्मद शमीम बताते हैं —

 

> “पहले अररिया, नरपतगंज और सुपौल से लोग बड़ी संख्या में खरीदारी के लिए आते थे। लेकिन अब ट्रेनें कम होने और भीड़ ज्यादा होने के कारण लोग आने से कतराते हैं। इससे व्यापार पर सीधा असर पड़ा है।”

 

 

स्थानीय लोगों में बढ़ता असंतोष

 

नरपतगंज और आसपास के गांवों के लोगों ने रेलवे प्रशासन से कई बार मांग की है कि इस रूट पर अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जाएं। त्योहारों के अलावा आम दिनों में भी लोगों को कामकाज, इलाज, पढ़ाई और खरीदारी के लिए बार-बार सफर करना पड़ता है। ऐसे में सिर्फ कुछ ट्रेनों पर निर्भर रहना मुश्किल हो गया है।

 

नरपतगंज नगरपंचायत के वार्ड पार्षद सुरेश पासवान ने बताया,

 

> “यह रेलखंड हमारे क्षेत्र के लिए जीवनरेखा है, लेकिन जब ट्रेनें ही कम चलेंगी तो इसका लाभ अधूरा रह जाएगा। हमारी मांग है कि कम से कम सुबह और शाम में दो नई पैसेंजर ट्रेनें चलाई जाएं ताकि लोग आसानी से यात्रा कर सकें।”

 

 

 

महिलाओं और बुजुर्गों को भी मुश्किलें

 

ट्रेनों की कमी का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और वृद्धजनों पर पड़ रहा है। भीड़भाड़ वाले कोच में उन्हें बैठने की जगह तक नहीं मिलती। कई बार उन्हें अपने बच्चों के साथ फर्श पर बैठकर सफर करना पड़ता है।

 

नरपतगंज की गृहिणी काजल कुमारी कहती हैं —

 

> “छठ की खरीदारी के लिए फारबिसगंज जाना था, लेकिन ट्रेन इतनी भरी थी कि हम चढ़ ही नहीं पाए। छोटी बच्ची को लेकर इतना लंबा सफर बस से करना बहुत मुश्किल होता है।”

 

 

रेल प्रशासन का पक्ष

 

पूर्व मध्य रेलवे के कटिहार मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे प्रशासन स्थिति पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

 

> “छठ पर्व के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ विशेष ट्रेनें चलाने की योजना बन रही है। इसके अलावा नियमित पैसेंजर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है। हमारा लक्ष्य है कि त्योहारों के समय किसी यात्री को परेशानी न हो।”

 

 

 

 

जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज़

 

 

> “सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड के शुरू होने से क्षेत्र के विकास की नई राह खुली है। लेकिन ट्रेनों की कमी के कारण लोग अभी भी पूर्ण सुविधा नहीं पा रहे हैं। हम छठ पर्व से पहले रेलवे से अतिरिक्त ट्रेनें चलाने की अपील करेंगे।”

 

 

साथ ही, अररिया सांसद ने कहा कि वह इस मामले को संसद में उठाएंगे और इस रेलखंड को डबल लाइन व इलेक्ट्रिफिकेशन के साथ सुदृढ़ करने की मांग करेंगे।

 

 

स्थानीय संगठनों का आंदोलन

 

युवाओं और सामाजिक संगठनों ने भी ट्रेनों की कमी को लेकर आंदोलन शुरू किया है। नरपतगंज स्टेशन पर कुछ दिन पहले “रेल सेवा बढ़ाओ अभियान” के तहत सैकड़ों लोगों ने शांतिपूर्ण धरना दिया।

 

युवा नेता प्रदीप कुमार सिंह ने कहा,

 

> “जब से यह रेलखंड शुरू हुआ है, लोगों को उम्मीद थी कि यह जीवन आसान करेगा। लेकिन ट्रेनें इतनी सीमित हैं कि आम लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। हम चाहते हैं कि सुबह, दोपहर और शाम — तीनों समय ट्रेनों की सुविधा दी जाए।”

 

 

 

नरपतगंज रेलवे स्टेशन से सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड की स्थिति साफ बताती है कि यात्रियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन रेल सेवाएं अभी भी अपर्याप्त हैं। छठ महापर्व जैसे अवसरों पर यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

 

यात्रियों, छात्रों, व्यापारियों और किसानों — सभी वर्गों की आवाज एक है: “हमें और ट्रेनें चाहिए।”

रेल प्रशासन और सरकार को चाहिए कि इस मांग पर शीघ्र कार्रवाई करे, ताकि यह रेलखंड अपने उद्देश्य — जनसुविधा और क्षेत्रीय विकास — को पूरी तरह पूरा कर सके।

 

सहरसा–फारबिसगंज रेलखंड ने विकास की दिशा में नई शुरुआत की है, लेकिन अगर पैसेंजर ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई तो यह सुविधा अधूरी रह

जाएगी। आने वाले छठ पर्व में यात्रियों की भीड़ को देखते हुए यह कदम समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।

 

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