समस्तीपुर की युवा सांसद शांभवी चौधरी ने क्षेत्र के विकास और जनहित से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे को देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में प्रमुखता से उठाया है।

सांसद ने नियम 377 के माध्यम से रेल मंत्री का ध्यान सकरी-हसनपुर रेल परियोजना की ओर खींचते हुए मांग की कि कुशेश्वरस्थान रेलवे स्टेशन का निर्माण उसके पहले से निर्धारित मूल स्थान पर ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि यह स्टेशन न केवल कनेक्टिविटी बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए भी रीढ़ की हड्डी साबित होगा, इसलिए इसकी अवस्थिति जनसुविधाओं के अनुरूप होनी चाहिए।
सांसद शांभवी चौधरी ने सदन को जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में पर्यावरणीय कारणों और पक्षी विहार से संबंधित नियमों की पाबंदी के चलते प्रस्तावित रेलवे स्टेशन को उसके मूल स्थान से लगभग 1.3 किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दिया गया था।
तत्कालीन परिस्थितियों में वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के लिए यह कदम उठाया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अब उस मूल स्थान पर निर्माण कार्य को लेकर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध प्रभावी नहीं है, जिससे पुराने नक्शे पर काम करना अब संभव और सरल हो गया है।
उन्होंने वर्तमान योजना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अभी जिस स्थान पर स्टेशन बनाने की तैयारी चल रही है, वह मुख्य आबादी और बाजार से काफी दूर है। अगर स्टेशन आबादी से इतनी दूरी पर बनता है, तो आम यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं को आवागमन में भारी असुविधा होगी।
इसके अलावा, दूरी अधिक होने के कारण स्थानीय व्यापारियों और किसानों को अपना माल ढुलाई करने में अतिरिक्त खर्च और समय देना पड़ेगा, जो इस परियोजना के वास्तविक उद्देश्य को कमजोर करता है।
शांभवी चौधरी के अनुसार, यदि रेलवे इस स्टेशन को वापस उसके पुराने तय स्थान पर बनाता है, तो इससे समस्तीपुर और दरभंगा जिले के सीमावर्ती इलाकों के हजारों लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा। कुशेश्वरस्थान एक महत्वपूर्ण धार्मिक और व्यापारिक केंद्र है, ऐसे में स्टेशन का आबादी के करीब होना पर्यटन और स्थानीय व्यापार को नई गति प्रदान करेगा।
सांसद की इस सक्रिय पहल का स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया है। लोगों को अब उम्मीद है कि रेल मंत्रालय इस जनहितैषी मांग पर जल्द ही सकारात्मक मुहर लगाएगा।