दरभंगा: उत्तर बिहार के निवासियों के लिए दरभंगा एयरपोर्ट किसी सपने से कम नहीं है। हाल ही में धुंध और कोहरे के कारण विमानों की लैंडिंग में बाधा आने से काफी असुविधा हुई थी, जिसके बाद नाइट लैंडिंग की मांग जोर पकड़ने लगी। अब अच्छी खबर यह है कि एयरपोर्ट पर CAT-II अप्रोच लाइटिंग सिस्टम का इंस्टालेशन तेजी से चल रहा है, जो रात के समय और कम विजिबिलिटी में भी सुरक्षित उड़ानें सुनिश्चित करेगा।
कोहरे से निपटने के लिए तैयार हो रहा एयरपोर्ट
बार-बार फ्लाइट डायवर्जन की समस्या से जूझ रहे दरभंगा एयरपोर्ट को जल्द राहत मिलने वाली है। अधिकारियों के मुताबिक, नाइट लैंडिंग और कोहरे में विमान संचालन के लिए आवश्यक लाइटिंग सिस्टम का कार्य जनवरी 2026 तक समाप्त होने की संभावना है। जल संसाधन विभाग से एनओसी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट में तेजी आई है। रनवे के आसपास करीब 900 वर्ग मीटर क्षेत्र में यह सिस्टम स्थापित किया जा रहा है, और अधिकांश काम पूरा हो चुका है। इससे सर्दियों में उड़ानों के रद्द होने या डायवर्ट होने की दिक्कत काफी कम हो जाएगी।

ऑपरेशनल समय बढ़ेगा, यात्रियों को मिलेगी सुविधा
CAT-II सिस्टम के चालू होने के साथ एयरपोर्ट का वॉच आवर बढ़ाया जाएगा, जिससे रात्रिकालीन उड़ानें संभव होंगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कनेक्टिविटी भी मजबूत बनेगी। यात्री अब रात में भी आसानी से सफर कर सकेंगे।

बिजली व्यवस्था को मिलेगी नई ताकत
दरभंगा एयरपोर्ट के विकास को और मजबूती देने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BSPTCL) ने एक महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते से एयरपोर्ट की बिजली सप्लाई अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित हो जाएगी। प्रमुख कदमों में शामिल हैं:
- GSS गंगवारा में 33 केवी का नया बे स्थापित करना।
- गंगवारा से नए टर्मिनल तक नई पावर लाइन का निर्माण।
यह पहल एयरपोर्ट की समग्र क्षमता को बढ़ाएगी और यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करेगी।
नया टर्मिनल भवन ले रहा आकार, आधुनिक सुविधाओं से लैस
दरभंगा एयरपोर्ट पर निर्माणाधीन नया टर्मिनल अब अपनी झलक दिखाने लगा है। पहले फेज में 51,800 वर्ग मीटर क्षेत्र में बन रहा यह टर्मिनल दूसरे फेज के बाद 1,00,000 वर्ग मीटर से ज्यादा फैल जाएगा। इसकी मुख्य विशेषताएं:
- प्रतिदिन 8,000 से अधिक यात्रियों को हैंडल करने की क्षमता।
- रोजाना 50 से ज्यादा फ्लाइट ऑपरेशन।
- सालाना 30 लाख यात्रियों की हैंडलिंग।
- टर्मिनल में ग्राउंड फ्लोर पर अराइवल और पहली मंजिल पर डिपार्चर की व्यवस्था होगी। यहां 40 चेक-इन काउंटर, 14 सेल्फ चेक-इन कियोस्क, 12 ऑटोमैटिक ट्रे रिट्रीवल सिस्टम, 30 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, 4 कन्वेयर बेल्ट और 5 एयरोब्रिज जैसी सुविधाएं होंगी।
एप्रन और टैक्सीवे का काम भी तेज गति से
एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 7 कोड-सी एयरक्राफ्ट के लिए नया एप्रन और दो लिंक टैक्सीवे तैयार हो रहे हैं। नए टर्मिनल के पास मल्टी-लेवल पार्किंग भी बनेगी। यह काम मई 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य है, जिससे अधिक विमानों को पार्क करने की सुविधा मिलेगी और रनवे पर देरी कम होगी।
सितंबर 2026 तक पूरा होगा पूरा प्रोजेक्ट
कुल 912 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह टर्मिनल सितंबर 2026 तक तैयार हो जाएगा। नाइट लैंडिंग, नया एप्रन और आधुनिक टर्मिनल के साथ दरभंगा एयरपोर्ट बिहार का प्रमुख हवाई केंद्र बनने की राह पर है। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक विकास के नए अवसर खुलेंगे। स्थानीय निवासी इस बदलाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।