झंझारपुर: रेल सुरक्षा को लेकर RPF का बड़ा अभियान, पटरी पर सेल्फी और इयरफोन के खतरों से कराया रूबरू

Star Mithila News
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Highlights
  • सावधानी में ही सुरक्षा है
  • ट्रैक पर सेल्फी और इयरफोन को कहें ना!
  • झंझारपुर स्टेशन के शेड हुए छलनी
  • चंद घंटों की बारिश ने खोल दी रेलवे के निर्माण की पोल
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झंझारपुर (मधुबनी): पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में रेल सुरक्षा और यात्री संरक्षा को पुख्ता करने के लिए आरपीएफ (RPF) एक्शन मोड में है। रविवार को दरभंगा पोस्ट कमांडर के निर्देश पर झंझारपुर आउटपोस्ट की टीम ने झंझारपुर-लौकहा रेलखंड के कर्णपुर और बटोआ इलाकों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया।

युवाओं को सख्त हिदायत: ‘शौक न बन जाए मौत’

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अभियान का नेतृत्व कर रहे प्रभारी अरबिंद कुमार और एएसआई विकास कुमार ने स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं को रेल नियमों का पाठ पढ़ाया। टीम ने स्पष्ट किया कि रेलवे ट्रैक पर सेल्फी लेना या इयरफोन लगाकर चलना केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जानलेवा अपराध है। ग्रामीणों को समझाया गया कि ट्रैक पार करना कानूनन जुर्म है और ट्रेनों पर पत्थरबाजी करना या सिग्नल उपकरणों से छेड़छाड़ करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, मवेशियों को ट्रैक के पास न बांधने की अपील की गई ताकि रेल परिचालन बाधित न हो।

नशाखुरानी गिरोह से बचने की सलाह

आरपीएफ ने यात्रियों को सफर के दौरान अलर्ट रहने को कहा। टीम ने सलाह दी कि अनजान लोगों से खाने-पीने की चीजें न लें, क्योंकि यह नशाखुरानी गिरोह की साजिश हो सकती है। साथ ही, ट्रेन में पटाखे या ज्वलनशील पदार्थ ले जाने को पूरी तरह वर्जित बताया गया।

झंझारपुर स्टेशन के नए शेड ने छोड़ा साथ, बारिश में ‘झरना’ बने प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3

झंझारपुर: एक तरफ रेलवे आधुनिक सुविधाओं के दावे कर रहा है, तो दूसरी तरफ झंझारपुर स्टेशन की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। पिछले दो दिनों की बारिश ने स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो और तीन की सूरत बिगाड़ दी है। यात्रियों के सिर ढकने के लिए बनाया गया शेड अब बारिश में ‘झरना’ बन चुका है।

नए निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

हैरानी की बात यह है कि स्टेशन का निर्माण नया है, फिर भी शेड में आधा दर्जन से अधिक जगहों पर लीकेज है। बारिश होते ही पूरा प्लेटफॉर्म किसी खुले मैदान जैसा दिखने लगता है। यात्रियों के बैठने वाली बेंचें पूरी तरह भीग जाती हैं, जिससे यात्रियों को खड़े रहकर या इधर-उधर भागकर खुद को बचाना पड़ता है।

यात्रियों का दर्द: ‘स्टेशन पहुंचना अब सजा जैसा’

ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्री रमेश कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा, “नया स्टेशन होने के बावजूद पानी टपकना निर्माण में लापरवाही को दर्शाता है।” वहीं, छोटे बच्चों के साथ सफर कर रही महिला यात्रियों ने बताया कि स्टेशन परिसर में भीगना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में हुई कोताही के कारण यह नौबत आई है। यदि मानसून से पहले मरम्मत नहीं हुई, तो यात्रियों की मुसीबतें और बढ़ जाएंगी।

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