पूर्व मध्य रेलवे (East Central Railway) के समस्तीपुर रेल मंडल द्वारा बुनियादी ढांचे और जल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मंडल के अंतर्गत सरायगढ़, सहरसा और सुपौल क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए पचास हजार गैलन क्षमता वाले आरसीसी (RCC) ओवरहेड वाटर टैंक, ट्यूबवेल बोरिंग और पंप हाउस के निर्माण हेतु ई-टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य रेलवे परिसरों और स्थानीय स्तर पर जल आपूर्ति को निर्बाध और सुदृढ़ करना है।

परियोजनाओं के वित्तीय आंकड़ों और कार्य की अवधि का विवरण इस प्रकार है। सरायगढ़ परियोजना की विज्ञापित राशि लगभग दो करोड़ पचासी लाख छह हजार नौ सौ सत्ताईस रुपये है, जिसके लिए बयाना राशि पांच लाख सत्तर हजार एक सौ रुपये निर्धारित की गई है। सहरसा परियोजना (टेंडर संख्या TC-115-2026-SPJ) के तहत अनुमानित लागत लगभग दो करोड़ तरेसठ लाख रुपये रखी गई है। वहीं, सुपौल परियोजना (टेंडर संख्या TC-119-2026-SPJ) के अंतर्गत अनुमानित लागत लगभग दो करोड़ पचासी लाख रुपये तय की गई है। सफल बोलीदाताओं को निर्धारित मानदंडों के तहत इन सभी विकास कार्यों को दस महीने की समयावधि के भीतर पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा करना होगा।
भारतीय रेलवे ने पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केवल ऑनलाइन माध्यम को अनिवार्य किया है। किसी भी रूप में मैनुअल ऑफर स्वीकार नहीं किए जाएंगे और उन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया जाएगा। इच्छुक और पात्र ठेकेदार रेलवे के आधिकारिक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल www.ireps.gov.in के माध्यम से अपनी बोलियां जमा कर सकते हैं। सरायगढ़ और सहरसा परियोजनाओं के लिए बोली जमा करने की अंतिम तिथि इकतीस अगस्त सन दो हजार छब्बीस, दोपहर बारह बजे तक निर्धारित की गई है, जबकि सुपौल परियोजना के लिए ऑनलाइन आवेदन चार सितंबर सन दो हजार छब्बीस, दोपहर बारह बजे तक स्वीकार किए जाएंगे।
निविदा में भाग लेने वाले बोलीदाताओं को रेलवे द्वारा तय किए गए वित्तीय और तकनीकी पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा। ठेकेदारों के पास पिछले वर्षों में इसी तरह के सिविल इंजीनियरिंग कार्यों, विशेषकर आरसीसी ओवरहेड टैंक निर्माण का पर्याप्त अनुभव होना चाहिए। साथ ही, मेक इन इंडिया नीति के तहत स्थानीय सामग्री का विवरण देना भी आवश्यक है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर गलत या भ्रामक जानकारी पाए जाने पर संबंधित फर्म का टेंडर रद्द कर दिया जाएगा और बयाना राशि जब्त कर ली जाएगी।

