आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे: बिहार में कनेक्टिविटी की नई क्रांति, दिसंबर 2026 तक शुरू होगा सफर

बिहार की यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे (Amas-Darbhanga Expressway) एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। हाल ही में संसद में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने दरभंगा सांसद गोपाल जी ठाकुर के सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर आवागमन दिसंबर 2026 तक शुरू होने की प्रबल संभावना है।
परियोजना की वर्तमान स्थिति और विस्तार
मंत्री महोदय ने जानकारी दी कि वर्तमान में एक्सप्रेसवे का लगभग 25 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस एक्सप्रेसवे को भविष्य में केवल दरभंगा तक सीमित न रखकर नेपाल सीमा तक विस्तारित करने की योजना है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाएगा।
इन 7 जिलों और 19 शहरों की बदलेगी किस्मत
यह 189 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बिहार के सात प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा:
पटना में यह एक्सप्रेसवे कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल के जरिए गंगा नदी को पार करेगा। इसके शुरू होने से औरंगाबाद (आमस) से दरभंगा की दूरी घंटों कम हो जाएगी और पटना से दरभंगा का सफर लगभग 4 घंटे कम समय में पूरा होगा।
दरभंगा-जयनगर NH 527B और अन्य लंबित परियोजनाएं
चर्चा के दौरान सांसद गोपाल जी ठाकुर ने दरभंगा-जयनगर NH 527B की धीमी प्रगति पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि वर्षों से लंबित इस परियोजना में अब तक केवल 15 किमी का ही टेंडर हुआ है। इसके अतिरिक्त दरभंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के मुद्दों को भी उठाया गया। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि आगामी वित्तीय वर्ष में इन पर ठोस कार्रवाई की जाएगी और राज्य सरकार के समन्वय से कार्यों को गति दी जाएगी।
आर्थिक और व्यापारिक लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस एक्सप्रेसवे से न केवल आम जनता का समय और ईंधन बचेगा, बल्कि बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। नेपाल सीमा तक कनेक्टिविटी बढ़ने से कृषि उत्पादों और अन्य व्यापारिक वस्तुओं के निर्यात में आसानी होगी, जिससे क्षेत्रीय विकास और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।
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