झंझारपुर, मधुबनी: पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल अंतर्गत झंझारपुर स्टेशन क्षेत्र में रेल प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त तेवर अपना लिए हैं। झंझारपुर स्टेशन के पूर्व स्थित अंडरपास और कैथिनिया गुमटी के समीप रेलवे की भूमि पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए विभाग ने कमर कस ली है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए रेल प्रशासन के आईओडब्ल्यू (IOW) कार्यालय द्वारा 16 स्थानीय निवासियों को आधिकारिक नोटिस निर्गत किया गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है.

30 धुर जमीन पर पक्का निर्माण, खाली करने को मिला 2 दिन का समय
रेलवे विभाग के अनुसार, कैथिनिया गुमटी के पास लगभग 30 धुर रेल भूमि को अतिक्रमित पाया गया है। विभागीय जांच और रेल अमीन द्वारा की गई हालिया नापी के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि रेलवे की एक बड़ी भू-भाग पर लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है और कई जगहों पर तो स्थायी पक्के मकान भी बना लिए गए हैं [उपयोगकर्ता इनपुट]। आईओडब्ल्यू रमेश कुमार ने बताया कि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अवैध निर्माण को हटाने की दिशा में कदम उठाया गया है। नोटिस में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि महज दो दिनों के भीतर संबंधित भूमि को खाली कर दिया जाए, अन्यथा रेलवे बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा ।
नोटिस की जद में आए लोग
रेलवे द्वारा जारी किए गए इस नोटिस ने क्षेत्र के कई परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। जिन 16 लोगों को नोटिस थमाया गया है, उनमें जना नंद ठाकुर, धनेश्वर कामत, भोगी कामत, मुनेश्वर कामत, भगीरथ ठाकुर, उदय कांत ठाकुर, शंकर झा, झोटन कामत, बिनोद ठाकुर, विद्या नंद झा, सुफल कांत झा, श्रवण कुमार ठाकुर, सुरेंद्र झा, शिव शंकर पासवान, गोविंद ठाकुर और श्यामा नंद ठाकुर के नाम शामिल हैं।
ग्रामीणों का दावा: “यह हमारी निजी और रजिस्ट्री की जमीन है”
वहीं दूसरी ओर, नोटिस प्राप्त करने वाले ग्रामीणों ने रेलवे के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रभावित लोगों का तर्क है कि जिस जमीन को रेलवे अपनी बता रहा है, वह वास्तव में उनकी निजी संपत्ति है। ग्रामीणों ने साक्ष्य के तौर पर बताया कि यह जमीन उन्हें विधिवत रजिस्ट्री के माध्यम से प्राप्त हुई है और अंचल कार्यालय में उनकी जमाबंदी भी कायम है। वे वर्षों से इस जमीन की रसीद भी कटा रहे हैं। अचानक मिले इस अल्टीमेटम और घर टूटने के डर से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और तनाव देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि वे अपने साक्ष्यों के साथ रेलवे अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखेंगे ताकि उनकी निजी भूमि का बचाव हो सके।
विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी इस पूरे मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने ला रही है। इस विवाद की जड़ें दशकों पुरानी हैं और इसमें जमीन के मालिकाना हक को लेकर एक बड़ा पेंच फंसा हुआ है।
वेदानन्द झा ने पहले ही रेलवे को बेच दी थी जमीन सूत्रों के मुताबिक, यह विवादित भूमि मूल रूप से वेदानन्द झा की ‘खतियानी जमीन’ थी। कई वर्ष पूर्व, वेदानन्द झा ने पूर्णतः सचेत अवस्था में रेलवे के विस्तार और विकास हेतु इस जमीन को भारत सरकार (रेलवे) के नाम ‘निबंधित केवाला’ (रजिस्ट्री) कर दिया था। इस रजिस्ट्री के बाद कानूनी रूप से यह जमीन रेलवे की संपत्ति बन गई थी।
एक ही जमीन की दूसरी रजिस्ट्री और विवाद का जन्म रेलवे को जमीन बेचने के कुछ सालों बाद तक वह भूमि खाली पड़ी रही। बताया जाता है कि खाली जमीन देखकर वेदानन्द झा के मन में लोभ आ गया। उन्होंने धोखाधड़ी करते हुए उसी जमीन को, जिसे वे पहले ही रेलवे को बेच चुके थे, पुनः ‘रंगलाल बजाज’ नामक व्यक्ति के नाम लिख दिया। इसके बाद से वह जमीन रंगलाल बजाज के दखल-कब्जे में चली आ रही थी।
छोटी लाइन से बड़ी लाइन तक का सफर और अतिक्रमण जब झंझारपुर में छोटी रेल लाइन (मीटर गेज) थी, तब रेलवे ने अपनी तत्कालीन आवश्यकता के अनुसार जमीन के कुछ हिस्से का उपयोग किया, जबकि शेष भाग खाली छोड़ दिया गया था। रेलवे की इसी खाली जमीन का फायदा उठाते हुए रंगलाल बजाज के पौत्र पंकज बजाज ने एक बड़ा खेल किया।
आरोप है कि पंकज बजाज ने बिना किसी वैध रजिस्ट्री या कागजात के, केवल मनमाना ‘जरसेमन’ (पैसे) लेकर विभिन्न लोगों को यह जमीन बसने के लिए दे दी। जिन लोगों ने पैसे देकर यहाँ मकान बनाए, उन्हें संभवतः इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह जमीन पहले ही रेलवे को बेची जा चुकी है। यही कारण है कि आज जब रेलवे बड़ी लाइन और स्टेशन विस्तार के लिए अपनी जमीन वापस मांग रहा है, तो 16 परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।
विकास कार्यों के लिए खाली कराई जा रही जमीन?
हालांकि वर्तमान कार्रवाई अतिक्रमण हटाने की है, लेकिन रेलवे के आधिकारिक दस्तावेज़ बताते हैं कि झंझारपुर सहित समस्तीपुर मंडल के कई स्टेशनों पर बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजनाएं चल रही हैं। रेलवे के एक हालिया निविदा दस्तावेज़ (Tender No: TC-216-2025-SPJ) के अनुसार, झंझारपुर, तमुड़िया, निर्मली, लोहना रोड, महरैल और घोघरडीहा स्टेशनों पर पहुँच मार्ग (Station Approach Road) के चौड़ीकरण का कार्य प्रस्तावित है । इस कार्य के लिए 7,82,67,345.00 रुपये का बजट आवंटित किया गया है । संभवतः इसी तरह के विकास कार्यों और रेल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग अपनी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त करा रहा है।
तनावपूर्ण स्थिति और भविष्य की कार्रवाई
वर्तमान में कैथिनिया गुमटी के आसपास की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। एक तरफ जहां रेलवे प्रशासन अपनी जमीन वापस लेने पर अड़ा है, वहीं ग्रामीण अपनी पुश्तैनी और रजिस्ट्री वाली जमीन को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन ग्रामीणों के दावों की पुनः जांच करता है या निर्धारित समय सीमा के बाद बुलडोजर की कार्रवाई शुरू होती है। फिलहाल, झंझारपुर में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है।